Sangeet Natak Akademi Award: भारतीय शास्त्रीय नृत्य जगत के दिग्गज और रायगढ़ कथक घराने के वरिष्ठ कथक आचार्य पद्मश्री पंडित रामलाल बरेठ को संगीत नाटक अकादमी की सर्वोच्च फेलोशिप ‘अकादमी रत्न' से सम्मानित किया जाएगा. यह सम्मान उन्हें कथक कला में उनके अतुलनीय योगदान और रायगढ़ घराने को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए दिया जा रहा है. इस प्रतिष्ठित सम्मान की घोषणा के बाद कला जगत में उत्साह का माहौल है. राष्ट्रपति के हाथों मिलने वाले इस सम्मान से न केवल पंडित बरेठ का गौरव बढ़ा है, बल्कि छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से रायगढ़-बिलासपुर क्षेत्र के लिए भी यह उपलब्धि गर्व का विषय बन गई है.
कथक जगत को मिला बड़ा सम्मान
संगीत नाटक अकादमी द्वारा दिया जाने वाला ‘अकादमी रत्न' देश का सर्वोच्च कला सम्मान माना जाता है. पंडित रामलाल बरेठ को यह सम्मान कथक के क्षेत्र में उनके लंबे और समर्पित योगदान के लिए दिया जा रहा है. रायगढ़ कथक घराने को स्थापित करने और इसकी विशिष्ट शैली को वैश्विक मंच तक पहुंचाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है.
NDTV पर खुशी जाहिर करते हुए बोले-जीवन सार्थक हुआ
पंडित रामलाल बरेठ ने इस सम्मान पर खुशी व्यक्त करते हुए NDTV से कहा कि यह उनके जीवन का सबसे बड़ा गौरव है. उन्होंने कहा कि अनेक पुरस्कार मिलने के बावजूद इस सम्मान से उनके जीवन की एक बड़ी कमी पूरी हो गई है. उन्होंने अपने परिवार, साथियों और कला जगत के प्रति आभार जताते हुए कहा कि यह सम्मान उनके वर्षों की साधना का परिणाम है.
रायगढ़ घराने के आखिरी दरबारी नर्तक
पंडित बरेठ रायगढ़ कथक घराने के एकमात्र जीवित दरबारी नर्तक माने जाते हैं. उनका जन्म रायगढ़ में हुआ और उन्होंने प्रारंभिक प्रशिक्षण राजा चक्रधर सिंह की परंपरा से जुड़े विद्वानों से लिया. उनकी शैली में परंपरा और नवाचार का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है, जिसने उन्हें विशिष्ट पहचान दिलाई.
शिक्षण और गुरु परंपरा में भी दिया योगदान
अपने लंबे करियर में उन्होंने इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में रीडर के रूप में सेवाएं दीं. इसके बाद 1981 से 2011 तक चक्रधर नृत्य केंद्र में गुरु के रूप में हजारों विद्यार्थियों को कथक की शिक्षा दी. उनके शिष्यों ने देश-विदेश में प्रस्तुति देकर रायगढ़ घराने की ख्याति को और बढ़ाया.
नई पीढ़ी को सौंप रहे परंपरा
पंडित बरेठ ने अपने पुत्र गुरु भूपेंद्र बरेठ को भी कथक में प्रशिक्षित किया है. वर्तमान में भूपेंद्र बरेठ बिलासपुर स्थित कार्तिक कथक नृत्य केंद्र का संचालन कर रहे हैं और नई पीढ़ी को इस कला की शिक्षा दे रहे हैं. इस तरह उनकी परंपरा आगे बढ़ रही है और कथक की विरासत सुरक्षित बनी हुई है.
पहले भी मिल चुके कई बड़े सम्मान
पंडित रामलाल बरेठ को इससे पहले मध्यप्रदेश शासन का शिखर सम्मान, छत्तीसगढ़ का चक्रधर सम्मान, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और वर्ष 2024 का पद्मश्री जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं. अब ‘अकादमी रत्न' से सम्मानित होने के बाद उनके कला जीवन को नई ऊंचाई मिली है.
कला जगत में खुशी की लहर
इस सम्मान की घोषणा के बाद कला और संस्कृति जगत में खुशी की लहर है. रायगढ़ और बिलासपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में इसे गर्व के रूप में देखा जा रहा है. कला क्षेत्र से जुड़े लोगों और प्रशंसकों ने पंडित रामलाल बरेठ को बधाई देते हुए इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है.
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