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आज तक अंधेरे से आजाद नहीं हो पाया ये गांव, आजादी के 80 साल बाद भी बिजली का इंतजार कर रहें ग्रामीण

मध्य प्रदेश के उमरिया जिले का महोबादादर गांव आजादी के 80 साल बाद भी बिजली का इंतजार कर रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि कई पीढ़ियां गुजर गईं, लेकिन गांव तक बिजली नहीं पहुंची. अंधेरे के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और लोगों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

आज तक अंधेरे से आजाद नहीं हो पाया ये गांव, आजादी के 80 साल बाद भी बिजली का इंतजार कर रहें ग्रामीण
  • MP के उमरिया जिले के महोबादादर गांव में आज तक बिजली की सुविधा नहीं पहुंच पाई. लोग अंधेरे में जीवन जी रहे हैं.
  • बिजली की कमी से बच्चों की पढ़ाई सबसे अधिक प्रभावित हो रही है और शाम होते ही गांव में अंधेरा छा जाता है.
  • ग्रामीणों ने कई बार आवेदन देकर कलेक्टर से बिजली उपलब्ध कराने की मांग की, लेकिन स्थायी समाधान नहीं मिला है.

देश आजादी के 80वें वर्ष पूरे हो चुके हैं. शहरों और गांवों में विकास की नई तस्वीरें दिखाई दे रही हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के उमरिया जिले का एक गांव ऐसा भी है, जहां आज तक बिजली की रोशनी नहीं पहुंच सकी. महोबादादर गांव के लोग पीढ़ियों से अंधेरे में जीवन बिता रहे हैं. यहां के बुजुर्ग बताते हैं कि उनके पूर्वज भी बिजली आने का इंतजार करते हुए दुनिया से चले गए, लेकिन गांव की किस्मत नहीं बदली. शाम ढलते ही पूरा गांव मानो अंधेरे का गुलाम हो जाता है और बच्चों की पढ़ाई से लेकर रोजमर्रा की जिंदगी तक हर काम प्रभावित होता है.

उमरिया जिले के महोबादादर गांव की कहानी विकास के दावों पर सवाल खड़े करती है. ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के बाद से अब तक गांव में बिजली की सुविधा नहीं पहुंची है. वर्षों से लोग रोशनी का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन उनके हिस्से में सिर्फ आश्वासन आए हैं. गांव के अधिकांश परिवार आज भी रात का समय अंधेरे में गुजारने को मजबूर हैं.

बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा सबसे ज्यादा असर

बिजली नहीं होने का सबसे बड़ा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है. शाम होते ही गांव में अंधेरा छा जाता है, जिससे बच्चों के लिए पढ़ाई करना मुश्किल हो जाता है. ग्रामीणों का कहना है कि दूसरे गांवों के बच्चे बिजली की रोशनी में पढ़ते हैं, जबकि उनके बच्चे आज भी अंधेरे और सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई करने को मजबूर हैं.

जनसुनवाई में ग्रामीणों ने लगाई गुहार

अपनी समस्या से परेशान गांव के लोग जनसुनवाई में पहुंचकर कलेक्टर से मिले. ग्रामीणों ने मांग की कि गांव में जल्द से जल्द बिजली पहुंचाई जाए ताकि वर्षों से अंधेरे में जीवन बिता रहे लोगों को राहत मिल सके. उनका कहना है कि कई बार आवेदन देने के बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है.

'पूर्वज चले गए, लेकिन गांव में बिजली नहीं आई'

गांव के बुजुर्ग मानसिंह धुर्वे ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि उनके गांव में पीढ़ियों से लोग बिजली का इंतजार कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि उनके पूर्वज भी इस उम्मीद के साथ दुनिया से चले गए कि शायद कभी गांव में रोशनी आएगी. उन्होंने बताया कि बिजली न होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और मिट्टी तेल तक आसानी से नहीं मिलता. रात के समय कीड़े-मकोड़ों और अन्य परेशानियों के बीच लोगों को जीवन बिताना पड़ता है.

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ग्रामीणों ने गांव में लाइट की तो व्यवस्था कर ली है, लेकिन बिजली नहीं आ पा रही.  

'उम्र गुजर गई, लेकिन उजाला नहीं देखा'

ग्रामीण छोटे सिंह कहते हैं कि उनकी पूरी जिंदगी अंधेरे में गुजर गई. उन्होंने बताया कि गांव में बच्चों की पढ़ाई और अन्य सुविधाएं बिजली के अभाव में प्रभावित हो रही हैं. उनका कहना है कि उन्होंने बिजली के बारे में बहुत सुना है, लेकिन गांव में आज तक उसकी रोशनी देखने को नहीं मिली. यह दर्द सिर्फ उनका नहीं, बल्कि पूरे गांव का है.

आवेदन पर आवेदन, फिर भी नहीं मिली राहत

ग्रामीण महेंद्र सिंह के अनुसार, गांव के लोग वर्षों से बिजली की मांग कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि कई बार आवेदन दिए गए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. रात में सांप-बिच्छुओं का खतरा बना रहता है और लोगों को बुनियादी सुविधाओं के बिना जीवन बिताना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि बिजली विभाग ने कभी दो खंभे लगाए थे, लेकिन उसके बाद काम आगे नहीं बढ़ा. आज भी गांव के लोगों के पास हजारों आवेदनों की रसीदें मौजूद हैं.

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ग्रामीण बिजली की समस्या को लेकर जिला मुख्यालय में चल रही जनसुनवाई में पहुंचे. 

बिजली विभाग ने दिया जल्द राहत का भरोसा

बिजली विभाग के कार्यपालन यंत्री डी.के. तिवारी ने बताया कि महोबादादर क्षेत्र में 'धरती आबा योजना' के तहत विद्युतीकरण का प्रावधान किया गया है. उन्होंने कहा कि पास के बिछिया क्षेत्र में करीब 150 घरों में बिजली पहुंचाई जा चुकी है. महोबादादर गांव बिछिया से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर है और वहां भी विद्युतीकरण का काम प्रगति पर है. विभाग का दावा है कि जल्द ही गांव के घरों में भी बिजली की रोशनी पहुंच जाएगी.

उम्मीद और इंतजार के बीच गांव

महोबादादर के लोगों के लिए बिजली सिर्फ एक सुविधा नहीं, बल्कि बेहतर जिंदगी का सपना है. वर्षों से अंधेरे में रह रहे ग्रामीण अब भी इस उम्मीद में हैं कि शायद इस बार उनका इंतजार खत्म होगा और उनके गांव में भी पहली बार रोशनी की किरण पहुंचेगी. अभी उनके पास सिर्फ उम्मीद है और उसी के सहारे वे आने वाले उजाले का इंतजार कर रहे हैं.

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