Success Story: आपके घर का कोई बच्चा दुनिया की सबसे बेहतरीन यूनिवर्सिटी हार्वर्ड में पढ़ने जाए. वहां उसे फुल स्कॉलरशिप मिले, शानदार नौकरी के ऑफर्स लाइन में लगे हों और अमेरिका में बसने का सुनहरा मौका हो. लेकिन वो बच्चा अचानक सब कुछ छोड़कर वापस इंडिया लौट आए, तो परिवार का क्या हाल होगा?
जानी-मानी आंत्रप्रेन्योर नईया सग्गी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. जब वो अमेरिका से अपनी पढ़ाई पूरी करके वापस भारत लौटीं, तो घर में कोई जश्न नहीं मना. बल्कि उनके दादा इतने खफा हुए कि पूरे तीन महीने तक अपनी पोती से सीधे मुंह बात तक नहीं की. उन्हें लगा कि जिस सुनहरे भविष्य का सपना हर भारतीय देखता है, उनकी पोती ने उसे अपने ही हाथों से चकनाचूर कर दिया है. मशहूर कंटेंट क्रिएटर विराज अला के साथ एक खास बातचीत में नईया ने अपनी इस दिलचस्प जर्नी बताई.
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सरकारी नौकरी में पेरेंट्स, हार्वर्ड के लिए मिली स्कॉलरशिप
नईया कोई आम स्टूडेंट नहीं थीं. हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से एमबीए करने के लिए उन्हें फुल स्कॉलरशिप मिली थी. इससे पहले वो नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया से वकालत (BA LLB) की पढ़ाई कर चुकी थीं. हार्वर्ड में पढ़ाई के दौरान वो 'फुलब्राइट' और 'जेएन टाटा' स्कॉलर जैसी प्रतिष्ठित लिस्ट में शामिल थीं. एमबीए के बाद उन्हें अमेरिका में ही 'द ब्रिजस्पैन ग्रुप' के साथ काम करने का मौका मिला.
कई लोगों को लगता होगा कि नईया किसी बड़े रईस घराने से आती होंगी, जिनके पास स्टार्टअप में फूंकने के लिए अंधा पैसा होगा. लेकिन नईया खुद इस मिथक को तोड़ती हैं. वो बताती हैं, "मैं कोई खानदानी रईस नहीं हूं. मेरे माता-पिता दोनों सरकारी नौकरी में थे."
"मुझे दुनिया बदलनी है"- भारत वापसी की असली वजह
अमेरिका में एक साल नौकरी करने के बाद, साल 2015 में नईया ने अपना बोरिया-बिस्तर बांधा और भारत का टिकट कटा लिया. उनका मकसद बिल्कुल साफ था- 'मुझे दुनिया बदलनी है'.
भारत आते ही उन्होंने अपनी पहली कंपनी की नींव रखी. दरअसल, नईया ने अपनी बहन को प्रेग्नेंसी के दौरान सही और भरोसेमंद जानकारी के लिए दर-दर भटकते देखा था. इस परेशानी ने उन्हें झकझोर दिया और यहीं से जन्म हुआ 'बेबी चक्रा' (BabyChakra) का. यह कंपनी इतनी कामयाब हुई कि 2021 में इसका 'माई ग्लैम' (MyGlamm) के साथ मर्जर हो गया. इसके बाद प्रियंका गिल और दर्पण संघवी के साथ मिलकर नईया 'द गुड ग्लैम ग्रुप' की को-फाउंडर बन गईं. आज वो 'EDT' नाम की अपनी तीसरी कंज्यूमर-टेक कंपनी खड़ी कर रही हैं.
जब दादा जी का पारा सातवें आसमान पर था
नईया का भारत लौटने का फैसला परिवार के गले नहीं उतरा. दादा को तो मानो गहरा सदमा लगा था. नईया उस दौर को याद करते हुए बताती हैं, "साल 2015 में जब मैं वापस आई, तो दादाजी ने मुझसे तीन महीने तक बात नहीं की. उनका बस यही कहना था कि तुम्हारे पास जिंदगी का सबसे बड़ा मौका था. तुम अमेरिका में सेटल हो सकती थीं, तुम्हारे पास नौकरियों के शानदार ऑफर थे, फुल स्कॉलरशिप थी, फिर तुम ये सब छोड़-छाड़कर यहां धूल फांकने और कंपनी बनाने क्यों आ गई?"
सिर्फ एक 'हां' की जरूरत होती है
आज नईया सग्गी की बनाई गई तीन कंपनियों की वैल्यूएशन एक बिलियन डॉलर (करीब 8300 करोड़ रुपये) को पार कर चुकी है. दादा जी की वो नाराजगी आज गर्व में बदल चुकी होगी. नईया मानती हैं कि कामयाबी के इस लंबे सफर में आपको बस किसी एक इंसान की उस 'हां' की जरूरत होती है, जो आप पर भरोसा जता सके.
नईया देश के उन तमाम युवा आंत्रप्रेन्योर्स के लिए एक जीती-जागती मिसाल हैं, जो कुछ बड़ा करना चाहते हैं. उनका साफ मानना है, "हमारे देश के फाउंडर्स और हमारी टीमों में वो दम है, कि हम यहीं इंडिया में बैठकर ऐसी कंपनियां खड़ी कर सकते हैं जो पूरी दुनिया पर राज करें."
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