Cancer Survivor Sanjay Dahariya Success Story: यूपीएसी 2025 का रिजल्ट आने के बाद कई ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई. ऐसी ही एक कहानी छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बेलटुकरी से निकल कर सामने आई. बेलटुकरी के एक किसान के बेटे संजय डहरिया के यूपीएसी चयन की कहानी बड़ी ही दर्दभरी और चुनौतीपूर्ण रही. संजय डहरिया 7 साल तक कैंसर से लड़ाई (Cancer Survivor) लड़ी और इसके बाद यूपीएससी की जंग जीती.
गरीबी में बीता बचपन
दरअसल, संजय की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो छोटी छोटी परेशानी में डिप्रेशन में आ जाते हैं. संजय डेहरिया 7 सालों तक चार बार कैंसर से जंग जीती और फिर यूपीएससी क्लियर किया. संजय ने साबित किया कि उड़ान पंखों से नहीं, हौसलों से होती है. संजय डेहरिया का बचपन गरीबी में बीता. इस बीच 2012 में वो कैंसर के भी शिकार हो गए. इलाज के लिए पैसे नहीं थे... पिता लखन डहरिया और माता रेशम डहरिया के लिए आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई. हालांकि बेटे के लिए माता-पिता ने किसी भी तरह इलाज का खर्च उठाया.
7 सालों तक कैंसर से जूझते रहे संजय डहरिया
संजय डहरिया महासमुंद जिले के बेलटुकरी के रहने वाले हैं. गांव से निकलर यूपीएसी में चयन होने तक सजंय की कहानी काफी संघर्षों, दर्दभरी और चुनौतीपूर्ण रही. यूपीएसी की तैयारी से पहले डहरिया 7 सालों तक कैंसर की बीमारी से जूझते रहें. इस दौरान वो भगवान से ऐसा जीवन ना देने की शिकायत की. हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी...जब वो कैंसर से उबरे, तो 2022 में यूपीएसी की तैयारी शुरू की.
पिता ने किसी तरह उठाया इलाज का खर्च
संजय डहरिया 5वीं तक पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से की. हालांकि पांचवी कक्षा में उनका चयन नवोदय विद्यालय के लिए हो गया. उन्होंने नवोदय विद्यालय से 12वीं तक पढ़ाई की. बता दें कि संजय डहरिया ने 10वीं कक्षा में एक आईएएस अधिकारी को देखकर आईएएस बनने का सपना देखा. हालांकि इस बीच वो 2012 में कैंसर के शिकार हो गए. इलाज के दौरान माता-पिता के लिए आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई. बेटे के लिए माता-पिता ने किसी भी तरह इलाज का खर्च उठाया.
4 सालों की मेहनत के बाद हासिल की सफलता
2012 से 2018 तक चार बार कैंसर से जंग जीती. वहीं 2018 में संजय कैंसर से उबर गए. इसके बाद उन्होंने अपना सपना साकार करने का निर्णय लिया. उन्होंने 2022 में यूपीएससी की तैयारी शुरू की. इसके लिए वो रायपुर के चौबे कॉलोनी में 100 स्क्वायर फीट के किराए से मकान लिया. वहीं नालंदा परिसर स्थित लाइब्रेरी में बैठकर यूपीएसी की तैयारी की. हालांकि 4 सालों की मेहनत और संघर्ष के बाद संजय डहरिया ने UPSC 2025 में 946वीं रैंक हासिल कर संघर्ष और हौसले की मिसाल पेश की. उन्होंने तीसरे प्रयास में सफलता हासिल की.
संजय डहरिया ने NDTV से क्या कहा?
संजय डहरिया ने NDTV से खास बातचीत में बताया कि बचपन में उनके घर में खाने को नहीं होता था. उनकी मां अक्सर भूखी रह जाती थी. मां चार बच्चों को खाना खिलाती, लेकिन ख़ुद भूखी होती थी. उन्होंने आगे बताया कि मेडिकल ग्राउंड और रिज़र्व कैटेगरी की रैंकिंग में उन्हें आईएएस अवार्ड मिल सकता है.
संजय ने आगे बताया कि यूपीएसी की तैयारी से पहले वह 8 साल कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे. जब वो कैंसर से उबरे, तब 2022 में यूपीएसी की तैयारी शुरू की. उन्होंने बताया कि स्नातक की पढ़ाई के दौरान समय 2012 में उन्हें कान के पास कैंसर डिटेक्ट हुआ, उसके बाद 8 साल तक मुंबई के टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल में इलाज चला. इस बीमारी ने शरीर को असहनीय दर्द से तोड़कर रख दिया था.
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