Deori Name Change: सागर जिले की ऐतिहासिक नगरी देवरी को जल्द ही उसकी दो सदी पुरानी पहचान वापस मिलने जा रही है. लंबे समय से क्षेत्रवासियों द्वारा उठाई जा रही मांग अब पूरी होती नजर आ रही है. 14 जून को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के केसली दौरे के दौरान देवरी का नाम बदलकर “देवपुरी” किए जाने की घोषणा प्रस्तावित है. इस ऐलान को लेकर इलाके में उत्साह का माहौल है. माना जा रहा है कि यह सिर्फ नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि नगर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को पुनर्स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम है. स्थानीय लोग इसे अपनी विरासत और गौरव से जोड़कर देख रहे हैं और इस ऐतिहासिक क्षण का इंतजार कर रहे हैं.
14 जून को केसली में होगी घोषणा
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव 14 जून को सागर जिले के केसली में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे. इसी दौरान देवरी का नाम बदलकर “देवपुरी” करने की घोषणा की जाएगी. यह फैसला लंबे समय से चल रही जन मांग के अनुरूप लिया जा रहा है.
क्या है ‘देवपुरी' नाम का इतिहास?
NDTV ने अपनी पड़ताल में पाया कि इतिहासकारों और स्थानीय परंपराओं के अनुसार, देवरी का प्राचीन नाम “देवपुरी” था. बताया जाता है कि वर्ष 1813 में यहां भीषण आग लगी थी, जिसमें पूरा नगर लगभग नष्ट हो गया था. इसके बाद जब नगर का पुनर्निर्माण हुआ तो समय के साथ “देवपुरी” नाम अपभ्रंश होकर “देवरी” बन गया. अब करीब 200 साल बाद पुराने नाम को फिर से स्थापित करने की पहल की जा रही है.
स्थानीय लोगों की पुरानी मांग
प्रदेश में हाल के वर्षों में कई शहरों और कस्बों के नाम बदलने के बाद देवरी क्षेत्र में भी यह मांग तेज हुई थी. NDTV से स्थानीय लोगों ने कहा कि “देवपुरी” नाम नगर की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान को बेहतर तरीके से दर्शाता है. स्थानीय निवासियों और सामाजिक संगठनों ने इस मांग को लंबे समय से उठाया था.
विधायक ने बताया नाम बदलने की वजह
देवरी विधायक बृज बिहारी पटेरिया ने NDTV को बताया कि “देवरी” शब्द को लेकर कई बार गलत अर्थ और अशोभनीय संदर्भ सामने आते हैं. उन्होंने कहा कि इससे सामाजिक असहजता की स्थिति बनती है. ऐसे में “देवपुरी” नाम से नगर की गरिमा और सम्मान को मजबूती मिलेगी.
धार्मिक महत्व भी है बड़ा कारण
देवरी धार्मिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है. यहां करीब 400 साल पुराना ऐतिहासिक खंडेराव मंदिर स्थित है, जो क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र है. मान्यता है कि खंडेराव भगवान शिव के अवतार हैं और इस मंदिर में मध्यप्रदेश के साथ महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु आते हैं.
अग्निकुंड मेला बनाता है खास
खंडेराव मंदिर में हर वर्ष विशाल अग्निकुंड मेले का आयोजन होता है. इस मेले में हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं और इसे क्षेत्र की प्रमुख धार्मिक परंपरा माना जाता है. “देवपुरी” नाम होने से इस धार्मिक पहचान को और मजबूती मिलने की उम्मीद है.
पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा
स्थानीय लोगों का मानना है कि नाम परिवर्तन से क्षेत्र में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान मजबूत होने से बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों की संख्या बढ़ सकती है.
बुजुर्गों की यादों में आज भी ‘देवपुरी'
नगर के बुजुर्ग हेमराज NDTV को बताते हैं कि पुराने समय में यह क्षेत्र “देवपुरी” के नाम से ही जाना जाता था. समय के साथ यह नाम बदल गया, लेकिन लोगों की स्मृति में आज भी “देवपुरी” की पहचान कायम है.
प्रशासनिक प्रक्रिया होगी शुरू
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद नाम परिवर्तन की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होगी. इसके तहत सरकारी दस्तावेजों, साइन बोर्ड, मानचित्र और अन्य अभिलेखों में “देवपुरी” नाम दर्ज किया जाएगा.
लोगों में उत्साह का माहौल
घोषणा से पहले ही पूरे देवरी क्षेत्र में उत्साह का माहौल है. लोग इसे सिर्फ नाम बदलने का फैसला नहीं बल्कि अपनी संस्कृति, इतिहास और आस्था के सम्मान के तौर पर देख रहे हैं.
विकास कार्यों की भी सौगात
14 जून को आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री अन्य विकास योजनाओं की भी घोषणा करेंगे. लेकिन देवरी का नाम बदलकर “देवपुरी” करना इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक घोषणा मानी जा रही है.
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