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MP की सियासत में आएगा महा-बदलाव: अब 116 नहीं 174 पर बनेगी सरकार, महिलाओं के पास होगी सत्ता की चाबी

MP Assembly Seats Expansion: मध्य प्रदेश में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के बाद राजनीति का पूरा रंग बदलने वाला है. जिसके बाद विधानसभा की सीटें 345 और लोकसभा की 43 होंगी. जानिए अब कितनी महिला विधायक और सांसद एमपी की आवाज बुलंद करेंगी. इस बदलाव पर पूरी रिपोर्ट

MP की सियासत में आएगा महा-बदलाव: अब 116 नहीं 174 पर बनेगी सरकार, महिलाओं के पास होगी सत्ता की चाबी
  • MP में महिला आरक्षण अधिनियम के बाद विधानसभा की सीटें 345 हो सकती हैं, जिनमें 114 सीटें महिलाओं के लिए होंगी
  • महिलाओं की संख्या विधानसभा में लगभग चार गुना बढ़कर 27 से 114 तक पहुंचने की संभावना है
  • सरकार बनाने के लिए अब कम से कम 174 विधायकों का समर्थन जरूरी होगा और मंत्रिमंडल में 52 मंत्री तक हो सकते हैं
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Women Reservation MP:  देश के साथ-साथ मध्य प्रदेश की राजनीति में अब तक का सबसे बड़ा फेरबदल होने वाला है. ये बदलाव सिर्फ सीटों की गिनती का नहीं है, बल्कि सत्ता चलाने के तरीके का है. सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या अब महिलाएं सिर्फ वोट देने तक सीमित रहेंगी? 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' आने के बाद अब राजनीति का पूरा खेल ही बदलने वाला है. अब विधानसभा में महिलाओं की सिर्फ मौजूदगी नहीं होगी, बल्कि उनकी असली ताकत दिखेगी. आइए समझते हैं कि आने वाले समय में मध्य प्रदेश की राजनीति की नई तस्वीर कैसी होने वाली है.

 विधानसभा होगी हाउसफुल, महिला विधायक होंगी 4 गुना

मध्य प्रदेश की नई विधानसभा में बैठने के लिए पर्याप्त जगह है और अब लगता है कि ये सदन पूरी तरह 'हाऊसफुल' होने वाला है. अभी विधानसभा में 230 सीटें हैं और बहुमत के लिए 116 विधायकों की जरूरत होती है. फिलहाल सदन में सिर्फ 27 महिला विधायक ही बैठती हैं, लेकिन नए कानून के बाद ये तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी. आने वाले वक्त में सीटें बढ़कर 345 हो सकती हैं, जिनमें से 114 सीटें अकेले महिलाओं के लिए सुरक्षित होंगी. यानी विधानसभा में महिलाओं की संख्या अब के मुकाबले लगभग चार गुना तक बढ़ जाएगी.

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सरकार बनाने का नया गणित और मंत्रियों की बड़ी फौज

सीटें बढ़ेंगी तो सरकार बनाने का जादुई आंकड़ा भी बदल जाएगा. अब तक जो सरकार 116 विधायकों के साथ बन जाती थी, उसे बनाने के लिए अब कम से कम 174 विधायकों का साथ चाहिए होगा. सिर्फ इतना ही नहीं, जब विधायक ज्यादा होंगे तो मंत्रिमंडल भी बड़ा होगा. अभी तक सरकार में ज्यादा से ज्यादा 34 मंत्री हो सकते थे, लेकिन नए नियमों के बाद मंत्रियों की ये संख्या बढ़कर 52 तक पहुंच सकती है. यानी अब प्रदेश में मंत्रियों की एक बड़ी फौज कामकाज संभालती नजर आएगी.
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दिल्ली तक दिखेगा एमपी की महिलाओं का दम

ये बदलाव सिर्फ भोपाल की विधानसभा तक ही नहीं रुकेगा, इसका सीधा असर दिल्ली की संसद पर भी पड़ेगा. अभी मध्य प्रदेश से 29 सांसद लोकसभा जाते हैं, जिनमें सिर्फ 6 महिलाएं हैं. लेकिन नए समीकरणों के हिसाब से मध्य प्रदेश में लोकसभा की सीटें 29 से बढ़कर 43 हो सकती हैं. 33 प्रतिशत आरक्षण के हिसाब से अब 14 सीटें महिलाओं के लिए पक्की होंगी. पहले ये संख्या 39 के आसपास रहने की उम्मीद थी, लेकिन अब नए परिसीमन के बाद महिलाओं की ताकत और ज्यादा बढ़ती दिख रही है.

नेताओं के हिसाब-किताब

इस बड़े बदलाव को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच बयानों के तीर भी खूब चल रहे हैं. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिलाओं को उनका हक दिलाकर बाबा साहेब अंबेडकर के सपनों को पूरा कर रहे हैं. दूसरी तरफ, बीजेपी विधायक अर्चना चिटनिस ने कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं को सिर्फ 'वोट बैंक' समझा और उन्हें सत्ता में आने से रोका. उन्होंने पुराने केसों का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस ने कभी महिलाओं के लिए ईमानदारी से काम नहीं किया.

अब आधी आबादी की होगी पूरी हिस्सेदारी

कुल मिलाकर, अब राजनीति सिर्फ पुराने चेहरों के दम पर नहीं चलेगी. असली लड़ाई इस बात की होगी कि कौन सी पार्टी नए चेहरों को मौका देती है और कौन महिलाओं को टिकट देने में बाजी मारता है. अब महिलाएं सिर्फ रैलियों में भीड़ बढ़ाने का काम नहीं करेंगी, बल्कि विधानसभा और लोकसभा में बैठकर बड़े फैसले लेंगी. अब वो दौर आने वाला है जहां आधी आबादी अपनी पूरी हिस्सेदारी के साथ सत्ता संभालेगी.
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