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ट्विशा शर्मा केस: आखिरी मुलाकात से 10 दिन की चुप्पी तक, समर्थ सिंह से पूछताछ में खुलेगी ये परतें

ट्विशा शर्मा मौत मामले में पुलिस ने 7 दिन की रिमांड पर समर्थ सिंह से पूछताछ शुरू की है. जांच में आखिरी शाम की गतिविधियों से लेकर 10 दिनों तक की चुप्पी को खंगाला जा रहा है, जिससे मामले की कई परतें खुलने की संभावना है.

ट्विशा शर्मा केस: आखिरी मुलाकात से 10 दिन की चुप्पी तक, समर्थ सिंह से पूछताछ में खुलेगी ये परतें
  • समर्थ सिंह की सात दिन की पुलिस रिमांड में पूछताछ में ट्विशा शर्मा मौत मामले के हर पहलू की गहन जांच की जाएगी
  • पुलिस ट्विशा की स्थिति, प्रेग्नेंसी, रिश्तों की स्थिति और घटना वाले दिन के गतिविधियों को सबूतों से मिलाएगी
  • समर्थ सिंह के बयान की सत्यता के लिए घटनास्थल पर स्पॉट वेरिफिकेशन और फॉरेंसिक जांच की संभावना है
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भोपाल के बहुचर्चित और संवेदनशील ट्विशा शर्मा मौत मामले में अब जांच का सबसे अहम दौर शुरू हो गया है. आरोपी पति समर्थ सिंह फिलहाल भोपाल पुलिस की 7 दिन की रिमांड पर है. पुलिस के आला सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ सिर्फ सामान्य सवाल-जवाब तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि समर्थ के पूरे बयान को परत-दर-परत जांचा जाएगा. रिश्तों की स्थिति, कथित विवाद, ट्विशा की प्रेग्नेंसी, मौत से पहले उसकी गतिविधियां, घटनास्थल, कॉल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन और घटना के बाद समर्थ का व्यवहार इन सभी पहलुओं को जांच के दायरे में रखा गया है.

पुलिस सूत्रों के मुताबिक समर्थ सिंह से सबसे पहला और सबसे निर्णायक सवाल यही होगा कि 12 मई को आखिर हुआ क्या था? जांचकर्ता उससे घटना वाले दिन का मिनट-टू-मिनट हिसाब मांग सकते हैं. सुबह से शाम तक ट्विशा कहां थी, किससे बात कर रही थी, उसका व्यवहार कैसा था, क्या वह तनाव में थी, क्या घर के भीतर कोई विवाद हुआ था, और आखिर वह कौन-सी परिस्थिति थी जिसके बाद कुछ ही घंटों में उसकी मौत हो गई?

सूत्रों के मुताबिक समर्थ को घटनास्थल पर ले जाकर स्पॉट वेरिफिकेशन भी कराया जा सकता है. पुलिस उससे यह जानना चाहती है कि घटना के समय वह कहां था, उसने क्या देखा, उसे घटना की जानकारी कैसे मिली, घर में कौन-कौन मौजूद था और ट्विशा का शव किस हालत में मिला. जिस जगह फांसी लगाए जाने की बात कही जा रही है, कथित बेल्ट, कमरा, छत, पलंग और परिवार के सदस्यों की आवाजाही इन सभी को समर्थ के बयान से मिलाया जाएगा.

जांच का एक बड़ा हिस्सा ट्विशा के मायके पक्ष के आरोपों पर भी केंद्रित रहेगा. ट्विशा के परिवार ने लगातार प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं और समर्थ सिंह तथा उसकी मां, रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं. पुलिस समर्थ को इन आरोपों से आमने-सामने कर सकती है. सवाल होंगे कि क्या वैवाहिक विवाद थे? क्या दहेज से जुड़ा कोई दबाव था? क्या ट्विशा ने पहले कभी अपने परिवार से शिकायत की थी? और मौत से पहले पति-पत्नी के रिश्ते की वास्तविक स्थिति क्या थी?

शुरुआती दो घंटे की पूछताछ में समर्थ ने पुलिस को बताया कि शादी के बाद दोनों के रिश्ते सामान्य थे. उसके मुताबिक 17 अप्रैल 2026 को ट्विशा की प्रेग्नेंसी की पुष्टि हुई और इसके बाद उसके व्यवहार में बदलाव आने लगा. समर्थ ने दावा किया कि अस्पताल से लौटने के बाद ट्विशा ने कहा कि वह दिल्ली स्थित अपने घर जाना चाहती है और घरेलू जिंदगी नहीं जी सकती। उसी शाम वह फ्लाइट से दिल्ली और फिर नोएडा स्थित अपने घर चली गई.

समर्थ ने पुलिस को यह भी बताया कि काफी समझाने के बाद 23 अप्रैल को ट्विशा अपनी मां और भाई के साथ भोपाल लौटी. लेकिन उसके मुताबिक रिश्तों में तनाव बना रहा. समर्थ का कहना है कि उसने 24 अप्रैल को बेंगलुरु जाने के टिकट पहले से बुक कर रखे थे. शुरुआत में ट्विशा इसके लिए तैयार थी, लेकिन बाद में उसने साथ जाने से इनकार कर दिया और कहा कि वह अपने भाई के पास नसीराबाद, अजमेर जाना चाहती है. समर्थ के मुताबिक इसी बात को लेकर दोनों के बीच कहासुनी हुई.

अब यही हिस्सा पुलिस की जांच का अहम बिंदु बन सकता है. पुलिस यह जांच सकती है कि बेंगलुरु की यात्रा क्या दोनों की सहमति से तय हुई थी? ट्विशा ने अचानक जाने से इनकार क्यों किया? क्या उस पर साथ चलने का दबाव था? वह अपने भाई के पास क्यों जाना चाहती थी? और क्या दोनों परिवारों को इस विवाद की जानकारी दी गई थी, जैसा समर्थ दावा कर रहा है?

समर्थ ने पुलिस को बताया कि 24 अप्रैल को ट्विशा ट्रेन से अपने भाई के पास अजमेर चली गई थी. कुछ दिन बाद उसे पता चला कि ट्विशा केवल एक दिन अजमेर में रुकी और वहां से दिल्ली चली गई. समर्थ के मुताबिक, उसके बेंगलुरु से लौटने के बाद ट्विशा 30 अप्रैल को वापस भोपाल आ गई. पुलिस अब इस मूवमेंट को रेलवे रिकॉर्ड, फ्लाइट डिटेल, फोन लोकेशन, परिवार के बयान और डिजिटल सबूतों से मिलाकर देख सकती है.

समर्थ के बयान का एक और अहम हिस्सा ट्विशा की मानसिक स्थिति से जुड़ा है, उसने पुलिस को बताया कि प्रेग्नेंसी के दौरान ट्विशा के स्वभाव में अचानक बदलाव आ रहा था. वह अक्सर कहती थी कि वह ग्लैमर वर्ल्ड से जुड़ी है और घरेलू जिंदगी उसके लिए नहीं है. पुलिस इस दावे को गंभीरता से जांचेगी कि क्या यह सचमुच पृष्ठभूमि का हिस्सा है या फिर आरोपी खुद को बचाने के लिए ट्विशा की मानसिक स्थिति को ढाल बना रहा है.

लेकिन जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा 12 मई की शाम है. समर्थ ने पुलिस को बताया कि ट्विशा शाम करीब 6 बजे पार्लर से घर लौटी. इसका सीसीटीवी भी सामने आया है. उसके मुताबिक घर आने के बाद शाम 6:30 बजे से 7:30 बजे तक दोनों घर के सामने स्थित पार्क में वॉक पर गए. इसके बाद दोनों ने साथ में खाना खाया, कुछ देर घर के बाहर बैठे और फिर रात करीब 8:30 बजे कमरे में जाकर टीवी देखने लगे.

समर्थ का दावा है कि करीब आधे घंटे बाद ट्विशा नीचे वाले कमरे में चली गई, जहां वह अपने माता-पिता से फोन पर बात कर रही थी. इसी दौरान थकान के कारण उसे नींद आ गई. यह पूरा क्रम अब पुलिस के लिए बेहद अहम है. अगर दोनों ने साथ वॉक की, खाना खाया और टीवी देखा, तो फिर कुछ ही देर बाद ऐसा क्या हुआ कि ट्विशा की मौत हो गई? क्या खाना खाने के बाद कोई विवाद हुआ? क्या ट्विशा फोन पर अपने माता-पिता से रोते हुए बात कर रही थी? समर्थ सचमुच सो गया था या जाग रहा था? ट्विशा को आखिरी बार किसने जीवित देखा? और घर में किसी ने उसके छत की ओर जाने पर ध्यान क्यों नहीं दिया?

समर्थ ने पुलिस को बताया कि बाद में उसकी मां गिरिबाला सिंह का फोन आया और उन्होंने कहा कि ट्विशा दिखाई नहीं दे रही है और कॉल रिसीव नहीं कर रही है. इसी बीच समर्थ के मुताबिक ट्विशा की मां का भी फोन आया. उन्होंने कहा कि ट्विशा परेशान लग रही थी और रो रही थी, इसलिए जाकर उसे देख लें. समर्थ का कहना है कि उसने अपनी मां से कहा कि ट्विशा शायद बात करने के लिए छत पर गई होगी, वहां जाकर देख लें.

समर्थ के बयान के अनुसार, जब गिरिबाला सिंह छत पर पहुंचीं तो उन्होंने देखा कि ट्विशा एक्सरसाइज में इस्तेमाल होने वाली इलास्टिक बेल्ट से फांसी पर लटकी हुई है. शोर सुनकर समर्थ भी वहां पहुंचा, उसका दावा है कि उसने ट्विशा को नीचे से सहारा देकर ऊपर उठाया, जबकि उसकी मां पास रखे पलंग पर चढ़कर फंदा ढीला करने की कोशिश कर रही थीं. काफी प्रयास के बाद फंदा हटाकर ट्विशा को पलंग पर लिटाया गया.

यही बयान अब पुलिस की फॉरेंसिक जांच की कसौटी पर होगा. पुलिस समर्थ को घटनास्थल पर ले जाकर पूछ सकती है कि ट्विशा कहां लटकी मिली? बेल्ट कैसे बंधी थी? पलंग कहां रखा था? गिरिबाला सिंह कहां खड़ी थीं? समर्थ ने ट्विशा को किस तरह सहारा दिया? फंदा कैसे खोला गया? शव को नीचे कैसे लाया गया? और क्या यह पूरा घटनाक्रम ट्विशा की लंबाई, वजन, फांसी के कथित बिंदु और घटनास्थल की वास्तविक स्थिति से मेल खाता है? समर्थ ने पुलिस को बताया है कि ट्विशा की लंबाई करीब 5 फीट 8 इंच और वजन लगभग 80 किलो था.

यह जानकारी घटनास्थल के पुनर्निर्माण में अहम हो सकती है. समर्थ ने यह भी कहा कि ट्विशा को नीचे लाने के बाद उसने पड़ोस में रहने वाले रिश्तेदार और उनके बेटों को बुलाया। उसने ट्विशा को सीपीआर देने की बात भी कही, लेकिन शरीर में कोई हलचल नहीं हुई. इसके बाद तीन लोगों की मदद से ट्विशा को नीचे लाया गया और कार से एम्स अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया. पुलिस अब यह जांच सकती है कि सबसे पहले किसे फोन किया गया, रिश्तेदार या पड़ोसी कब पहुंचे, क्या सचमुच सीपीआर दिया गया, ट्विशा को एम्स कितने बजे ले जाया गया और अस्पताल का समय इस पूरे बयान से मेल खाता है या नहीं.

शीर्ष पुलिस सूत्रों के मुताबिक, समर्थ के हर जवाब को सीसीटीवी फुटेज, फोन रिकॉर्ड, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, फॉरेंसिक रिपोर्ट, गवाहों के बयान और मेडिकल रिपोर्ट से मिलाया जाएगा. जांचकर्ता गिरिबाला सिंह द्वारा घटना के बाद कथित तौर पर किए गए फोन कॉल्स की भी जांच कर सकते हैं. इनमें पुलिस, प्रशासन, न्यायिक सेवा से जुड़े लोगों और सीसीटीवी मेंटेनेंस से जुड़े लोगों को किए गए कॉल्स शामिल बताए जा रहे हैं. पुलिस यह देखेगी कि ये कॉल घटना के बाद सामान्य मदद के लिए किए गए थे या फिर इनसे प्रभाव, पहुंच या घटनास्थल से जुड़े प्रबंधन पर सवाल खड़े होते हैं.

जांच का एक और बड़ा सवाल समर्थ सिंह का घटना के बाद का व्यवहार है. एफआईआर के बाद वह कई दिनों तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर रहा. अब पुलिस उससे पूछ सकती है कि वह इस दौरान कहां था, किससे संपर्क में था, किसने उसकी मदद की, उसने तुरंत जांच में सहयोग क्यों नहीं किया और क्या वह गिरफ्तारी से बचते हुए अपनी कानूनी रणनीति तैयार कर रहा था. समर्थ खुद वकील है और एक कानूनी रूप से जागरूक परिवार से आता है, ऐसे में पुलिस उससे एक साथ सारे सवाल पूछने के बजाय चरणबद्ध तरीके से पूछताछ कर सकती है.

सूत्रों का कहना है कि पुलिस को आशंका है कि समर्थ खुद को बचाने के लिए भ्रामक जानकारी दे सकता है. इसलिए अगले सात दिन बेहद अहम माने जा रहे हैं. जांचकर्ता यह देखेंगे कि उसके बयान में निरंतरता है या विरोधाभास. अगर वह कहता है कि ट्विशा परेशान थी, तो पूछा जाएगा कि परेशानी की वजह क्या थी. अगर वह कहता है कि रिश्ते सामान्य थे, तो इसे प्रताड़ना के आरोपों से मिलाया जाएगा. अगर वह कहता है कि मौत से कुछ घंटे पहले दोनों ने साथ वॉक की, खाना खाया और टीवी देखा, तो पूछा जाएगा कि फिर अचानक क्या बदल गया.

ट्विशा शर्मा के परिवार ने हत्या का आरोप लगाया है और पति तथा ससुराल पक्ष की भूमिका पर सवाल उठाए हैं. दूसरी ओर ससुराल पक्ष इसे आत्महत्या बता रहा है. पुलिस फिलहाल मेडिकल रिपोर्ट, पोस्टमॉर्टम, फॉरेंसिक जांच, डिजिटल रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और घटनाक्रम के आधार पर आगे बढ़ रही है. शीर्ष सूत्रों के मुताबिक अब तक मेडिकल और तकनीकी सबूतों ने हत्या की दिशा में कोई निर्णायक संकेत नहीं दिया है, लेकिन पुलिस यह जांच रही है कि क्या प्रताड़ना, घरेलू दबाव या आत्महत्या के लिए उकसाने जैसी कोई परिस्थिति सामने आती है.

समर्थ और उसकी मां पर फिलहाल दहेज मृत्यु और क्रूरता से जुड़ी धाराओं में मामला दर्ज है. लेकिन पुलिस इस बात की भी जांच करेगी कि क्या आगे चलकर आत्महत्या के लिए उकसाने जैसी धाराएं जोड़ी जा सकती हैं. यह फैसला अंतिम रूप से बयानों, डिजिटल सबूतों, फॉरेंसिक रिपोर्ट और पूरी जांच के बाद ही होगा. जांच का तकनीकी पक्ष भी बेहद महत्वपूर्ण है। पुलिस मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल सामग्री की जांच कर रही है.

ट्विशा के पास दो फोन बताए गए हैं एक एप्पल और एक सैमसंग. पुलिस सूत्रों के मुताबिक दोनों फोन जांच एजेंसी के पास हैं. इन फोन से ट्विशा की आखिरी बातचीत, संदेश, मानसिक स्थिति और किसी दबाव या धमकी की संभावना को समझने में मदद मिल सकती है. पुलिस यह भी देखेगी कि दोनों पक्षों द्वारा सार्वजनिक रूप से किए जा रहे दावे जांच डायरी और सबूतों से मेल खाते हैं या नहीं. सूत्रों का कहना है कि मीडिया या परिवार स्तर पर चल रहे कई दावे तब तक आधिकारिक जांच का हिस्सा नहीं माने जाएंगे, जब तक वे विधिवत जांच एजेंसी को नहीं सौंपे जाते. इसमें ऑडियो रिकॉर्डिंग, निजी आरोप और पारिवारिक बातचीत से जुड़े दावे भी शामिल हैं. पुलिस यह भी पूछ सकती है कि यदि किसी के पास महत्वपूर्ण सामग्री थी, तो उसे पहले जांच एजेंसी को देने के बजाय सार्वजनिक क्यों किया गया.

23 मई को समर्थ सिंह को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे 7 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया. हिरासत में भी उसे कोई विशेष सुविधा नहीं दी गई. सूत्रों के मुताबिक समर्थ ने पीने के लिए पैक्ड वॉटर मांगा, लेकिन पुलिस ने उसे थाने का सामान्य पानी दिया. उसने कटारा हिल्स थाने में रात बिताई, जहां कूलर की व्यवस्था नहीं थी. गर्मी के कारण उसकी रात बेचैनी और करवटें बदलते हुए गुजरी. लेकिन इन हिरासत से जुड़ी बातों से कहीं बड़ा दबाव अब उन सवालों का है जो समर्थ सिंह के सामने खड़े हैं. पार्लर से लौटने के कुछ ही घंटों में ट्विशा की मौत क्यों हुई?

शाम 6 बजे से फांसी पर लटके मिलने तक घर में क्या हुआ? क्या पति-पत्नी के बीच झगड़ा हुआ था? क्या ट्विशा सचमुच रो रही थी, जैसा उसकी मां ने कथित तौर पर बताया? क्या प्रेग्नेंसी के बाद उसका व्यवहार बदला था या यह अब बचाव की कहानी बनाई जा रही है? क्या दहेज या प्रताड़ना का कोई पहलू था? समर्थ कई दिनों तक पुलिस से दूर क्यों रहा? और सबसे बड़ा सवाल क्या छत पर फांसी और बचाने की जो कहानी वह बता रहा है, वह फॉरेंसिक सच्चाई से मेल खाती है?

फिलहाल ट्विशा शर्मा की मौत दो बिल्कुल अलग दावों के बीच फंसी हुई है. ससुराल पक्ष इसे आत्महत्या बता रहा है, जबकि मायका पक्ष हत्या और प्रताड़ना का आरोप लगा रहा है. अब समर्थ सिंह की 7 दिन की पुलिस रिमांड तय कर सकती है कि यह मामला संदिग्ध मौत और दहेज प्रताड़ना की जांच तक सीमित रहता है या फिर नए विरोधाभास इसे और बड़े कानूनी मोड़ की ओर ले जाते हैं.

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