- संसद में महिलाओं को तीस प्रतिशत आरक्षण देने वाला बिल तीन साल पहले पास हुआ था लेकिन इसे 2029 से लागू किया जाएगा
- सरकार लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाकर आठ सौ पचास करने और नए परिसीमन के लिए तीन बिल लाने वाली है
- महिला आरक्षण विधेयक में अनुसूचित जाति और जनजाति की महिलाओं के लिए भी आरक्षण शामिल होगा
संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने वाला बिल पास तो तीन साल पहले ही हो गया था. लेकिन इस कानून को 2029 के लोकसभा चुनाव से ही लागू करने के लिए अब संशोधित बिल सरकार लाने जा रही है. इसके लिए संसद का विशेष सत्र 16 से 18 अप्रैल को बुलाया गया है. इस सत्र में इस बिल को पेश किया जाएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बिल को सर्वसम्मति से पास कराने की अपील की है.
अब इस बिल की कॉपी सांसदों को मिल गई है. इससे पता चला है कि सरकार तीन बिल लाने वाली हैं. इसका मकसद लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण जल्दी लागू करना और नए सिरे से सीटों का परिसीमन करना है.
इस बिल का कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल पेश करेंगे. महिलाओं को आरक्षण देने वाला कानून 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' सितंबर 2023 में पास हो चुका है. लेकिन अब कानून को संशोधन कर इसे 2029 से ही लागू किया जाएगा.
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क्या है नए बिल में प्रावधान?
इस बिल में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रावधान है. बिल पास होता है तो लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 850 हो जाएगी. इनमें से 815 सीटें राज्यों में और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों में होंगी. अभी लोकसभा में 543 सीटें हैं.
Women's Reservation Bill is the need of the hour. This is the rightful due of our Nari Shakti to contribute to policymaking and empower the nation. The Modi government is resolved to bring and implement this legislation. This is a change that should certainly take place for the… https://t.co/Ed6MmaNVUc
— Amit Shah (@AmitShah) April 14, 2026
महिलाओं के लिए यह आरक्षण 15 साल तक लागू रहेगा. यानी 2029, 2034 और 2039 के लोकसभा चुनावों तक. आरक्षित सीटें हर चुनाव में बदलती रहेंगी, ताकि महिलाओं का हर जगह प्रतिनिधित्व मिल सके.
इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए भी आरक्षण शामिल होगा. ये आरक्षित सीटें अलग-अलग क्षेत्रों में रोटेशन के आधार पर तय की जाएंगी.
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परिसीमन से क्या होगा?
महिला आरक्षण बिल के साथ-साथ परिसीमन आयोग के गठन के लिए भी बिल पेश किया जाएगा. अभी लोकसभा सीटें 1971 की जनगणना के आधार पर हैं. संविधान ने नए सिरे से परिसीमन पर रोक लगा रखी है. अब इसमें संशोधन किया जाएगा, ताकि इस रोक को हटाया जा सके.
बिल के पास होने के बाद परिसीमन आयोग का गठन किया जाएगा, जिसके अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड या मौजूदा जज होंगे.
इसका मकसद लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं की सीटों का नए सिरे से परिसीमन करना है. इसके तहत ताजा जनगणना के आंकड़ों के आधार पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सीटें बढ़ाई जाएंगी.
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बिल पास होने के बाद क्या होगा?
संसद का विशेष सत्र 16 से 18 अप्रैल के लिए बुलाया गया है. बिल पास होने के बाद परिसीमन आयोग का गठन किया जाएगा. यह आयोग लोकसभा और विधानसभा सीटों के पुनर्गठन को लेकर अपनी रिपोर्ट जारी करेगा. इसमें आम जनता से भी सुझाव मांगे जाएंगे. आखिर में सरकार इसे मंजूरी देगी. मंजूरी मिलने के बाद गजट नोटिफिकेशन जारी होगा और इसे लागू किया जाएगा. सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से ही इसे लागू करने की तैयारी कर रही है.
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