अमेरिका और ईरान जंग के बीच ट्रंप एक ऐसा दांव खेलना चाहते हैं जो पश्चिम एशिया के शक्ति संतुलन में नई कहानी पेश कर देगा. एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने शनिवार को कई अरब और मुस्लिम देशों के साथ कांफ्रेंस कॉल में सारे देश मिलकर एक डील साइन करें. इस डील के तहत ईरान के साथ युद्ध खत्म होने के बाद अब्राहम अकॉर्ड में ये देश शामिल होंगे. ट्रंप ने कहा ईरान से जंग खत्म होने पर सारे देश इजरायल के देश की मान्यता दें.
क्या बोले खाड़ी और मुस्लिम देश?
रिपोर्ट में दो अमेरिका अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि संयुक्त अरब अमीरात के प्रेसिडेंट मोहम्मद बिन जायद समेत सभी देश के चीफ ने कहा कि वे ट्रंप के साथ हैं और इस मुद्दे पर उनका समर्थन करते हैं.
कुछ देश हैरान हुए तो ट्रंप ने ली चुटकी
सऊदी अरब, पाकिस्तान सरीखे देशों के इजरायल के साथ कोई राजनयिक संबंध नहीं हैं. वे ट्रंप के प्रस्ताव से हैरान थे. अमेरिका अधिकारी ने बताया कि ट्रंप ने उनसे चुटकी लेते हुए पूछा कि वे कॉल पर हैं या नहीं.
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क्या है अब्राहम अकॉर्ड?
अब्राहम अकॉर्ड अमेरिका की मध्यस्थता में 2020 में हुआ एक ऐतिहासिक शांति समझौता है. इसका मकसद इज़रायल और कई अरब देशों के बीच दशकों पुरानी रंजिश को खत्म कर राजनयिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को सामान्य बनाना है. इसके अलावा पश्चिम एशिया को बैलेंस और अमन-चैन की लिए ये शांति समझौता अमल में लाया गया था.
इस समझौते की वजह से 1994 के बाद पहली बार किसी अरब देश ने इजरायल को एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में औपचारिक रूप से स्वीकार किया है. ये देश हैं यूएई और बहरीन हैं. इसके बाद सूडान और मोरक्को भी इसमें शामिल हो गए. इससे पहले केवल मिस्र और जॉर्डन के ही इजरायल के साथ औपचारिक शांति संबंध थे. हालांकि फिलिस्तीन के मुद्दे पर सारे देशों की राय एक नहीं है.
इस समझौते का अहम लक्ष्य मध्य पूर्व में ईरान के बढ़ते प्रभाव को रोकना और अमेरिका के नेतृत्व में एक नया क्षेत्रीय समीकरण तैयार करना है.
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