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भारत में 10 दिन में 7 रुपये महंगा हुआ पेट्रोल, एशिया से लेकर यूरोप तक जानें-दूसरे देशों में कितने बढ़ रहे दाम

Petrol Diesel Price in Delhi: पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 10 दिनों में चौथी बार वृद्धि हुई है, पेट्रोल में 2.61 और डीजल में 2.71 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है. हालांकि, भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें यूरोप और पड़ोसी देशों की तुलना में बेहद कम हैं.

भारत में 10 दिन में 7 रुपये महंगा हुआ पेट्रोल, एशिया से लेकर यूरोप तक जानें-दूसरे देशों में कितने बढ़ रहे दाम
हॉर्मुज बंद होने के 78 दिन तक नहीं बढ़ाए थे दाम
  • पेट्रोल और डीजल की कीमतों में पिछले 10 दिनों में चौथी बार वृद्धि हुई. पेट्रोल 2.61 और डीजल 2.71 रुपए महंगा हुआ
  • 15 मई से शुरू हुए संशोधन के तहत पेट्रोल-डीजल के दामों में कुल सात रुपये प्रति लीटर की वृद्धि दर्ज की गई है
  • वैश्विक स्तर कीमतों में भारी वृद्धि के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें अन्य देशों की तुलना में काफी कम
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नई दिल्‍ली:

Petrol Diesel Price Hike: पेट्रोल और डीलज के कीमतों में एक बार फिर इजाफा हो गया है. पिछले 10 दिनों में ये चौथी बार है, जब पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़े हैं. पेट्रोल की कीमतों में 2.61 रुपए प्रति लीटर और डीजल में 2.71 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है. इस ताजा बढ़ोतरी के बाद, लंबे समय तक कीमतों में स्थिरता रहने के बाद 15 मई से शुरू हुए संशोधन के तहत पेट्रोल और डीजल के दामों में कुल मिलाकर करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हो चुकी है. पेट्रोल और डीजल की इस बढ़ोतरी के बीच राहत की खबर ये है कि अन्‍य देशों में हुई बढ़ोतरी के मुकाबले ये बेहद कम है. ईरान युद्ध से पैदा हुए ऊर्जा संकट के बाद से कई यूरोपीय देशों में पेट्रोल 180 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है. वहीं,  म्यांमार में पेट्रोल की कीमतों में लगभग 90% और पाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात में 50% से अधिक की वृद्धि हुई है. 

हॉर्मुज बंद होने के 78 दिन तक नहीं बढ़ाए थे दाम
 

ईरान युद्ध के बाद हुई उथल-पुथल के कारण वैश्विक स्तर पर कीमतों में आई तीव्र वृद्धि के बावजूद, भारत खुदरा ईंधन कीमतों में सबसे कम प्रभावित देशों में से एक बनकर उभरा है. इस महीने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में चरणबद्ध तरीके से 7 रुपये प्रति लीटर की मामूली वृद्धि हुई है. 28 फरवरी, 2026 को हॉर्मुज स्‍ट्रेट के बंद होने के बाद 78 दिनों तक कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ था. इसके बाद तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने 15, 19, 23 और 25 मई को चार किस्तों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में संशोधन किया. कुल वृद्धि पेट्रोल की कीमत में 7.35 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 7.53 रुपये प्रति लीटर है, जो लगभग 7.5% की वृद्धि दर्शाती है. दिल्ली में पेट्रोल की कीमत अब 102.12 रुपये प्रति लीटर है, जबकि डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर है.

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कब-कब बढ़ोतरी

  • 15 मई को, पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में लगभग 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई
  • 19 मई को, इनमें फिर से लगभग 0.80 - 0.90 रुपये (80 - 90 पैसे) की बढ़ोतरी की गई
  • 23 मई को, इनमें फिर से लगभग 0.85 - 0.95 रुपये (85 - 95 पैसे) की बढ़ोतरी की गई
  • भारत में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में प्रति लीटर 3 रुपये की बढ़ोतरी का अर्थव्यवस्था, घरों और अलग-अलग सेक्टरों पर मध्यम, लेकिन दूरगामी असर पड़ेगा
  • हाल ही में हुई बड़ी संभावित बढ़ोतरी (जैसे, कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में उछाल के बीच 10 रुपये या उससे ज़्यादा की बढ़ोतरी) की चर्चाओं के मुकाबले यह बढ़ोतरी काफ़ी कम है, लेकिन फिर भी इसका असर ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और रोज़मर्रा के खर्चों पर ज़रूर पड़ेगा


किस देश में कितने बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम? 

भारत में वैश्विक स्‍तर की तुलना में पेट्रोल-डीजल में यह वृद्धि काफी कम है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इसी अवधि के दौरान कई देशों में कीमतों में 20% से लेकर 90% से अधिक की भारी वृद्धि दर्ज की गई है. उदाहरण के लिए, म्यांमार में पेट्रोल की कीमतों में लगभग 90% और पाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात में 50% से अधिक की वृद्धि हुई, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय देशों जैसी विकसित अर्थव्यवस्थाओं में भी 20% से अधिक की वृद्धि देखी गई.

यूरोपीय देशों में 180 रुपये लीटर पहुंचा पेट्रोल का रेट 

वैश्विक स्तर पर पेट्रोल की कीमतें अब औसतन लगभग 130 रुपये प्रति लीटर हैं, जबकि कई यूरोपीय देशों में यह 180 रुपये प्रति लीटर से भी ऊपर पहुंच गई हैं. इसके विपरीत, भारत में कीमतें गैर-सब्सिडी वाली अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम हैं. कीमतों में मामूली वृद्धि का एक प्रमुख कारण सरकार का हस्तक्षेप है. पिछले चार सालों में केंद्र सरकार ने फ्यूल टैक्‍स में कई बार कटौती की है, जिसमें 27 मार्च, 2026 को 10 रुपये प्रति लीटर उत्पाद शुल्क में कटौती भी शामिल है, जो हालिया सप्‍लाई चेन डिस्‍टर्ब होने से ठीक पहले की गई थी. इन उपायों से कच्चे तेल की बढ़ती लागत को उपभोक्ताओं पर पूरी तरह से डालने के बजाय उसे खुद उठाया. 

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कीमतें बढ़ीं, क्‍योंकि सप्‍लाई चेन हुई इफेक्ट

  • भारत अपनी ज़रूरत का 85% से ज़्यादा कच्चा तेल आयात करता है, और इस पर दुनिया की कीमतों का असर पड़ता है.
  • भारत के लिए कच्चे तेल की कीमत जनवरी 2026 में $63.08 प्रति बैरल से बढ़कर, अप्रैल 2026 में $114.5 प्रति बैरल हो गई है.
  • इसका मतलब है कि भारत, जनवरी 2026 के मुकाबले, अप्रैल 2026 में $51.4 प्रति बैरल या लगभग Rs 4,950 प्रति बैरल ज़्यादा चुका रहा है.
  • भारतीय रुपया लगातार अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमज़ोर हो रहा है.
  • 18 मई 2026 को 1 USD की कीमत Rs 96.30 थी, जबकि 1 जनवरी 2026 को 1 USD की कीमत Rs 89.98 थी.
  • इसका मतलब है कि भारत, कच्चे तेल की कीमत चाहे जो भी हो, जनवरी 2026 के मुकाबले, पहले से ही हर डॉलर पर Rs 6.3 ज़्यादा चुका रहा है.

हालांकि, वैट में अंतर के कारण कीमतों में राज्यों के बीच अंतर है. सरकारी सूत्रों के अनुसार, तेलंगाना और केरल जैसे विपक्षी शासित राज्यों में वर्तमान में ईंधन की कीमतें सबसे अधिक हैं, जहां पेट्रोल की कीमत ₹114 प्रति लीटर से अधिक है, जबकि गुजरात, उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे भाजपा शासित राज्यों में यह कीमत ₹102 प्रति लीटर के आसपास बनी हुई है. 

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