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इंदौर मेट्रो vs तोतों का बसेरा: सुप्रीम कोर्ट ने दखल से किया इनकार, हाईकोर्ट जाने की दी छूट

सुप्रीम कोर्ट ने इंदौर मेट्रो परियोजना के लिए तोतों के बसेरे वाले पेड़ों की कटाई मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है. अदालत ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण जरूरी है, लेकिन शहर में ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए मेट्रो भी आवश्यक है.

इंदौर मेट्रो vs तोतों का बसेरा: सुप्रीम कोर्ट ने दखल से किया इनकार, हाईकोर्ट जाने की दी छूट
तोतों के बसेरे वाले पेड़ों पर SC की टिप्पणी, कहा- मेट्रो भी जरूरी
NDTV
  • इंदौर मेट्रो परियोजना पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई, पर्यावरण और विकास दोनों पर जोर
  • तोतों के प्राकृतिक आवास को बचाने की मांग, SC ने दी हाईकोर्ट जाने की अनुमति
  • मेट्रो परियोजना रोकने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
नई दिल्ली / इंदौर:

सुप्रीम कोर्ट ने इंदौर मेट्रो परियोजना के लिए उन पेड़ों की कटाई से जुड़े मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिन पर बड़ी संख्या में तोतों का बसेरा बताया गया है. अदालत ने कहा कि पर्यावरणीय चिंताओं का समाधान किया जाना चाहिए, लेकिन तेजी से बढ़ते शहरों में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता को निर्देशों के कथित उल्लंघन से जुड़े मुद्दों पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का रुख करने की स्वतंत्रता प्रदान की.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कुछ कहा? 

ये मामला इंदौर मेट्रो परियोजना के तहत उन पेड़ों की कटाई से जुड़ा था, जिनमें तोते अपने घोंसले बनाते हैं. याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि अब केवल 45 से 48 पेड़ ही बचे हैं और उन्हें बचाने या उनका प्रत्यारोपण किए जाने की जरूरत है. याचिकाकर्ता की ओर से यह भी दलील दी गई कि तोते पेड़ों के तनों में प्राकृतिक रूप से बने खोखले हिस्सों में घोंसला बनाते हैं. ऐसे में इन पेड़ों की कटाई उनके प्राकृतिक आवास को प्रभावित कर सकती है.

मेट्रो की जरूरत पर भी अदालत की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने माना कि पर्यावरण संबंधी चिंताओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए. हालांकि पीठ ने यह भी कहा कि इंदौर जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर को वाहनों पर निर्भरता कम करने और यातायात का दबाव घटाने के लिए मेट्रो जैसी आधुनिक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की आवश्यकता है. अदालत ने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है.

हाईकोर्ट जाने का रास्ता खुला है

सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सीधे हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया. इसके बाद याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस लेने की इच्छा जताई और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में उचित कानूनी उपाय अपनाने पर सहमति व्यक्त की. बेंच ने याचिकाकर्ता को निर्देशों के कथित उल्लंघन और अन्य संबंधित मुद्दों को लेकर हाईकोर्ट में जाने के लिए स्वतंत्रता दे दी.

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