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This Article is From Jan 30, 2026

तोतों का आशियाना बचाने को MP हाईकोर्ट ने दिया दखल, इंदौर में मेट्रो के लिए अभी नहीं कटेंगे पेड़

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शुक्रवार को ऐसे करीब 200 पेड़ों को काटने पर अंतरिम रोक लगा दी, जिनकी शाखाओं पर ये परिंदे अपना बसेरा बनाए हुए हैं.

तोतों का आशियाना बचाने को MP हाईकोर्ट ने दिया दखल, इंदौर में मेट्रो के लिए अभी नहीं कटेंगे पेड़

मध्य प्रदेश के इंदौर की एक बेहद व्यस्त सड़क पर एक तरफ मेट्रो रेल दौड़ाने के सपने बुने जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ हजारों तोतों का आशियाना बने करीब 200 घने पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलने का खतरा मंडरा रहा है. विकास बनाम प्रकृति का ये मुद्दा जब बातचीत से नहीं सुलझा तो मध्य प्रदेश हाईकोर्ट पहुंच गया. अब हाईकोर्ट ने ऐसा फैसला दिया है, जिससे इंदौर की सड़कों पर चहचहाते तोते फिलहाल राहत की सांस ले सकते हैं. 

मेट्रो के लिए काटे जाने हैं 200 पेड़

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शुक्रवार को ऐसे करीब 200 पेड़ों को काटने पर अंतरिम रोक लगा दी, जिनकी शाखाओं पर ये परिंदे अपना बसेरा बनाए हुए हैं. ये वही पेड़ हैं, जिन्हें रानी सराय इलाके के रीगल स्क्वायल के पास बनने वाले मेट्रो के पुल के लिए गिराने की तैयारी थी. लेकिन पीपल फॉर एनिमल्स संगठन इस मामले को लेकर हाई कोर्ट चला गया.

केंद्र, राज्य सरकार से जवाब मांगा

मेट्रो पुल के लिए घने पेड़ों की बलि चढ़ाने के खिलाफ पीपल फॉर एनिमल्स संगठन के इंदौर अध्यक्ष प्रियंशु जैन ने जनहित याचिका दायर करके गुहार लगाई. सुनवाई के बाद जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने शुक्रवार को साफ कहा  कि अगली सुनवाई तक किसी भी पेड़ को न काटा जाए, और न ही कहीं स्थानांतरित किया जाए. अदालत ने इस मामले में केंद्र और राज्य सरकार समेत सभी संबंधित पक्षकारों से भी जवाब मांगा है. अगली सुनवाई 16 फरवरी को होगी.

पेड़ कटे तो उजड़ेगा परिंदों का आशियाना

याचिकाकर्ता के वकील लवेश सारस्वत ने हाईकोर्ट में दलील देते हुए कहा कि अगर पेड़ों को काटने की इजाजत दी गई तो न सिर्फ हजारों तोतों का आशियाना उजड़ जाएगा बल्कि शहर की हरियाली पर बुरा असर पड़ेगा और पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ेगा. उन्होंने दावा किया कि ये कार्रवाई वन संरक्षण अधिनियम और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के भी खिलाफ है. इन पेड़ों पर उन तोतों और पक्षियों का बसेरा है, जिन्हें वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत सुरक्षा प्राप्त है.

2019 से चल रहा मेट्रो का काम

गौरतलब है कि इंदौर में 31.32 किलोमीटर लंबी मेट्रो रेल परियोजना 2019 से निर्माणाधीन है. शुरू में इस  प्रोजेक्ट की लागत 7,500 करोड़ रुपये आंकी गई थी, लेकिन अब बदलाव के बाद इसका खर्च और बढ़ने की संभावना है. ये मेट्रो रेल कॉरिडोर घनी आबादी और कमर्शल इलाकों के बीच से बनाया जाना है. इस वजह से भी इसे चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.

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