वाशिंगटन और तेहरान के बीच पर्दे के पीछे पक रही खिचड़ी ने इजरायल के कान खड़े कर दिए हैं. ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु समझौते को लेकर बढ़ती नजदीकियों ने इजरायल की नींद उड़ा दी है. इजरायल ने साफ लफ्जों में इस संभावित डील पर अपने नामंजूरी जाहिर कर दी है. इजरायल ने कहा कि यह समझौता किसी भी कीमत पर उसके हितों के मुताबिक नहीं है.
इजरायल के सीनियर सिक्योरिटी अधिकारियों ने इस मामले पर खुली चेतावनी जारी की है. इजरायली ब्रॉडकास्टर 'चैनल 12' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच जिस समझौते का खाका तैयार हो रहा है, वह इजरायल की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकता है.
इजरायल को क्यों सता रहा है डर?
इजरायली सुरक्षा अधिकारियों को सबसे बड़ा डर इस बात का है कि इस डील के जरिए ईरान को एक बड़ा 'लाइफलाइन' मिल जाएगा. अधिकारियों का कहना है कि समझौते की आड़ में ईरान को आर्थिक और मिलिट्री (सैन्य) रूप से खुद को मजबूत करने का पूरा समय मिल जाएगा. अगर ईरान एक बार फिर आर्थिक रूप से पैरों पर खड़ा हो गया, तो उसकी सैन्य ताकत को रोकना नामुमकिन हो जाएगा.
'चैनल 12' की रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया गया है कि इजरायली अधिकारी इस वक्त एक बेहद अहम बिंदु पर बारीक नजर रख रहे हैं. उनका पूरा ध्यान इस बात पर है कि क्या इस डील के तहत ईरान के न्यूक्लियर स्टॉक (परमाणु सामग्री) को सच में उसके देश से बाहर निकाला जाएगा या नहीं.
नेतन्याहू को साइडलाइन किया गया?
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल को शांति वार्ता की पूरी प्रक्रिया से बिल्कुल अलग-थलग यानी 'साइडलाइन' कर दिया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता से इजरायल लगभग पूरी तरह से बाहर है. अमेरिकी राष्ट्रपति के इस रुख से इजरायली खेमे में भारी बेचैनी है. ईरान को लेकर अमेरिकी फैसलों पर अब नेतन्याहू का कोई नियंत्रण नहीं रह गया है.
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