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तेल का बढ़ता संकट: 1-22 मई के बीच देश में पेट्रोल की बिक्री 14% और डीज़ल की बिक्री 18% बढ़ी- इंडियन ऑयल

Petrol Diesel Price Hike: स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज से कार्गो जहाज़ों की आवाजाही बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय एनर्जी मार्किट में करीब 20% कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हो रही है, जिसकी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में इनकी कीमत काफी बढ़ गयी है.

तेल का बढ़ता संकट: 1-22 मई के बीच देश में पेट्रोल की बिक्री 14% और डीज़ल की बिक्री 18% बढ़ी- इंडियन ऑयल
पेट्रोल-डीजल की बिक्री बढ़ी.
  • अमेरिका-ईरान टकराव के कारण तेल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है और कीमतों में वृद्धि हो रही है
  • इस साल मई के पहले 22 दिनों में देश में पेट्रोल की बिक्री 14 प्रतिशत और डीजल की बिक्री 18 प्रतिशत तक बढ़ी है
  • इंडियन ऑयल ने कहा है कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है, पैनिक बायिंग असंतुलन का कारण है
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मध्यपूर्व एशिया में युद्ध और अमेरिका-ईरान टकराव की वजह से तेल बाज़ार में अनिश्चितता बनी हुई है. इसकी वजह से तेल की सप्लाई और कीमतों को लेकर सोशल मीडिया में अफवाहों के चलते कुछ जगहों पर अफरा-तफरी है और लोग बड़ी मात्रा में पेट्रोल और डीजल खरीद रहे हैं. इंडियन ऑयल के मुताबिक, इस साल 1 से 22 मई के बीच देश में पेट्रोल की बिक्री 14% और डीज़ल की बिक्री 18% तक बढ़ गयी है. अप्रैल महीने के दौरान भी पेट्रोल-डीजल की बिक्री में बढ़ोतरी दर्ज की गयी थी. इंडियन ऑयल के मुताबिक, 1 अप्रैल से 21 अप्रैल, 2026 के दौरान देश में पेट्रोल और डीजल की बिक्री 13% से ज़्यादा बढ़ गयी थी.  

पैनिक बायिंग से बढ़ी पेट्रोल-डीजल की बिक्री

इंडियन ऑयल ने शनिवार को एक बयान जारी कर कहा कि ग्राहकों और आम जनता को आश्वस्त रहना चाहिए कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है. कुछ खुदरा दुकानों पर पैनिक बायिंग लोकल कारणों की वजह से हुई है, जो स्थानीय स्तर पर मांग-आपूर्ति असंतुलन (local demand-supply imbalances) और बिक्री पैटर्न के पुनर्वितरण (redistribution of sales patterns in select areas) की वजह से हुई.

PTI फोटो.

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कुछ स्थानों पर पेट्रोल-डीजल की बढ़ती मांग के निम्नलिखित कारण हैं:

  • arvesting period के दौरान डीजल की मांग में मौसमी वृद्धि
  • कुछ निजी पंपों पर अधिक खुदरा कीमत होने की वजह से निजी खुदरा दुकानों से ग्राहकों का अस्थायी स्थानांतरण
  • थोक और संस्थागत सप्लाई (bulk and institutional supplies) की कीमत मौजूदा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के अनुरूप काफी अधिक है
  • -इसीलिए संस्थागत और वाणिज्यिक डिमांड (institutional and commercial demand) का रुख PSU retail outlets की ओर बढ़ गया है.

क्यों बढ़ रहे तेल के दाम?

दरअसल स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज से कार्गो जहाज़ों की आवाजाही बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय एनर्जी मार्किट में करीब 20% कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हो रही है, जिसकी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में इनकी कीमत काफी बढ़ गयी है. भारत अपनी जरूरत का 85% से ज़्यादा कच्चा तेल, 60% एलपीजी और करीब 50% नेचुरल गैस का आयात करता है. ऐसे में पिछले करीब दो महीनों के दौरान महंगे तेल और गैस के आयात पर खर्च भी काफी बढ़ चुका है.

पेट्रोलियम मंत्रालय ने गुरुवार को एक बयान जारी कर कहा था, "मध्य-पूर्व संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में असामान्य वृद्धि हुई है. उपभोक्ताओं को इस प्रभाव से बचाने के लिए, भारत सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कमी करके इस बोझ का कुछ हिस्सा स्वयं वहन करने का निर्णय लिया है. भारत सरकार ने 15.05.2026 की राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से डीजल पर निर्यात शुल्क 23 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 16.50 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर निर्यात शुल्क 33 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 16 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। इसके अलावा, पेट्रोल पर निर्यात शुल्क 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। देश के सभी पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है"

PTI फोटो.

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इससे पहले सरकारी तेल कंपनियों पर तेल आयात के बढ़ते बोझ को कम करने के लिए भारत सरकार ने 27 मार्च, 2026 को पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10 रुपये प्रति लीटर घटाने का फैसला किया था. लेकिन राज्यों ने VAT/Sales Tax में कोई कमी नहीं किया है.  

VAT/Sales Tax से लाखों करोड़ रुपये की कमाई

राज्य सरकारों को पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले VAT/Sales Tax से हर साल लाखों करोड़ रुपये की कमाई होती है. इसीलिए, संकट के इस दौर में भी राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर VAT/Sales Tax घटाने के लिए तैयार नहीं हैं.  पेट्रोलियम मंत्रालय के Petroleum Planning and Analysis Cell (PPAC) की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक: पीओएल प्रॉडक्ट्स पर राज्यों का सेल टैक्स और वेट. 

  • वित्तीय साल 2024-25 में राज्यों की POL products (Petroleum, Oil, and Lubricants) पर Sales Tax/VAT से कुल कलेक्शन 3,02,058.5 करोड़ रुपया था.
  • वित्तीय साल 2025-26 के पहले 9 महीने में राज्यों की POL products (Petroleum, Oil, and Lubricants) पर Sales Tax/VAT से कुल कलेक्शन 2,29,168.5 करोड़ रुपया रही.

PTI फोटो.

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ज़ाहिर है, पेट्रोल-डीजल की बिक्री में बढ़ोतरी से राज्यों का राजस्व बढ़ा है, और उन्हें इस संकट के दौर में काफी फायदा मिल रहा है.

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