- कलिता माजी, जो घरेलू कामगार थीं, पश्चिम बंगाल के ऑसग्राम विधानसभा सीट से बीजेपी उम्मीदवार बनकर विधायक बनीं
- महीने करीब 2,500 रुपये कमाने वाली कलिता माजी ने 12,535 वोटों के अंतर से चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को हराया
- उन्होंने कुल 1,07,692 वोट प्राप्त किए और घर-घर जाकर मेहनत से चुनाव प्रचार किया था
कल तक जो हाथ दूसरों के घरों में बर्तन साफ करते और फर्श साफ करते थे, आज उन्हीं हाथों में जनता ने अपनी किस्मत की चाबी सौंप दी है. पश्चिम बंगाल के ऑसग्राम विधानसभा से आई यह खबर किसी फिल्मी कहानी जैसी लग सकती है, लेकिन यह भारतीय लोकतंत्र की वो हकीकत है जो हर आम नागरिक के सपनों को पंख देती है. महीने के महज 2,500 रुपये कमाने वाली एक घरेलू कामगार, कलिता माजी ने तमाम राजनीतिक दिग्गजों और संसाधनों की कमी को पीछे छोड़ते हुए विधानसभा तक का सफर तय कर लिया है. बीजेपी ने कलिता को अपना उम्मीदवार बनाया और वहां की जनता ने उन पर भरोसा जताकर विधायक बना दिया.
कौन हैं कलिता माजी?
कलिता माजी बीजेपी की नवनिर्वाचित विधायक हैं. उन्होंने ऑसग्राम (एससी) सीट से चुनाव जीता है. राजनीति में आने से पहले कलिता पिछले दो दशकों से घरेलू कामगार के रूप में काम कर रही थीं. वह 2-4 घरों में साफ-सफाई और बर्तन मांजने का काम करती थीं, जिससे उन्हें हर महीने करीब 2,500 रुपये की कमाई होती थी. इसी कमाई से वो अपने परिवार को भरण-पोषण करतीं.
BJP Bengal candidate Kalita Majhi, who works as a domestic worker in 4 households and earns ₹2,500 a month, wins from the Ausgram constituency. This is the power of the BJP, where even the most humble citizen can rise and script a truly inspiring journey. pic.twitter.com/LVI4V9xSFU
— P C Mohan (@PCMohanMP) May 4, 2026
12000 से ज्यादा वोटों से जीता चुनाव
कलिता माजी ने ऑसग्राम सीट से 12535 के बड़े अंतर से चुनाव जीता है. माजी ने तृणमूल कांग्रेस के श्यामा प्रसन्ना लाहौर का शिकस्त दी. माजी को कुल 107692 वोट हासिल किए. उन्होंने घर-घर जाकर चुनाव प्रचार किया था. उनकी मेहनत आखिरकार रंग लाई और जनता ने उन्हें बड़ी जीत दिलाई.
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बीजेपी ने पिछली बार भी जताया था भरोसा
माजी पर बीजेपी ने पिछले विधानसभा चुनाव 2021 में भी भरोसा जताया था. उस चुनाव में उन्होंने लगभग 41% वोट हासिल किए थे. हालांकि वह 12000 वोटो के अंतर से हार गए थी. कलिता पिछले 10 सालों से ज्यादा समय से राजनीति में सक्रिय हैं. उन्होंने अपनी शुरुआत एक बूथ-स्तर की कार्यकर्ता के रूप में की थी और बाद में पंचायत चुनाव भी लड़ा.
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