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असम में JMM को नहीं मिली एक भी सीट, फिर भी सीएम हेमंत सोरेन क्यों हैं उत्साहित

असम चुनाव में JMM ने एक भी सीट हासिल नहीं कर पाई. लेकिन इसके बाद भी हेमंत सोरेन इस चुनाव के नतीजों को लेकर काफी उत्साहित हैं.

असम में JMM को नहीं मिली एक भी सीट, फिर भी सीएम हेमंत सोरेन क्यों हैं उत्साहित
Hemant Soren

असम विधानसभा में बीजेपी ने एक बार फिर बड़ी जीत दर्ज की है. वहीं कांग्रेस को फिर से करारी हार का सामना करना पड़ा है. दूसरी ओर असम में पहली बार हेमंत सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) चुनाव लड़ने उतरी थी. इस चुनाव में JMM ने कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं किया था और अलग चुनाव लड़ने का फैसला किया था. जिसके बाद सियासत भी खूब हुई थी. हालांकि असम चुनाव में JMM को एक भी सीट हासिल नहीं हो सकी. लेकिन इसके बावजूद झारखंड सीएम हेमंत सोरेन काफी उत्साहित दिख रहे हैं.

दरअसल हेमंत सोरेन JMM पार्टी के प्रदर्शन से काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं. क्योंकि बिना किसी बड़े गठबंधन के मैदान में उतरी पार्टी ने 16 सीटों पर चुनाव लड़ा और अब तक की मतगणना में करीब 1.8 प्रतिशत मत हासिल किए हैं.

हेमंत सोरेन ने क्या कहा

पार्टी के अध्यक्ष और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि हमारे लिए सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि दो सीटों पर हमारे प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रहे, जबकि 7 सीटों पर हमारे प्रत्याशियों ने 15 हजार से अधिक वोट प्राप्त कर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई. सीएम हेमंत सोरेन ने असम की जनता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इस प्रदर्शन को एक नई ऊर्जा का स्रोत बताया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने संदेश में कहा कि बहुत ही सीमित समय और संसाधनों के बावजूद जो कुछ हासिल किया गया, वह जनता के सहयोग के बिना संभव नहीं था.

यह चुनाव राजनीतिक विस्तार नहीं

सोरेन ने स्पष्ट किया कि असम में चुनाव लड़ने का फैसला केवल राजनीतिक विस्तार मात्र नहीं था, बल्कि वहां के आदिवासी, दलित और अल्पसंख्यक समाज के हक, सम्मान और पहचान की लड़ाई को मजबूत आवाज देने की दिशा में एक ठोस कदम था. मुख्यमंत्री ने असम में आदिवासियों और चाय बागान मजदूरों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि वहां आदिवासियों को अब तक एसटी का दर्जा न मिलना, मजदूरों को उचित मजदूरी का अभाव और जमीन के अधिकारों से वंचित रहना जैसे मुद्दों ने ही इस संघर्ष की नींव रखी थी.

उन्होंने कहा कि बिना किसी बड़े गठबंधन के पहली ही कोशिश में दो सीटों पर दूसरे नंबर पर आना और सात सीटों पर सम्मानजनक वोट पाना यह संकेत देता है कि जेएमएम ने असम की जनता के बीच अपनी पकड़ बनानी शुरू कर दी है. सीएम हेमंत सोरेन ने अपने वक्तव्य में जोर देते हुए कहा कि यह केवल एक चुनावी प्रयास नहीं, बल्कि अस्तित्व और अधिकारों की लड़ाई है.

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