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SIR में नाम कटा, कानूनी लड़ाई लड़कर वापस जुड़वाया... बंगाल में जीते कांग्रेस विधायक मोताब शेख की कहानी

पश्चिम बंगाल में सिर्फ दो सीटों पर कांग्रेस की जीत हुई है. उनके एक विधायक फरक्का से मोताब शेख हैं, जिनका नाम SIR में कट गया था. बाद में ट्रिब्यूनल के आदेश पर उनका नाम जोड़ा गया था.

SIR में नाम कटा, कानूनी लड़ाई लड़कर वापस जुड़वाया... बंगाल में जीते कांग्रेस विधायक मोताब शेख की कहानी
कांग्रेस उम्मीदवार मोताब शेख.
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  • पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 294 सीटों में से 207 सीटें जीतकर सरकार बनाने की स्थिति में है
  • तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों पर सिमट गई है जबकि कांग्रेस ने दो सीटें जीतने में सफलता पाई है
  • फरक्का सीट से कांग्रेस के मोताब शेख और रानीनगर से जुल्फिकार अली विजयी हुए हैं

पश्चिम बंगाल में 200 से ज्यादा सीटों के साथ बीजेपी सरकार बनाने जा रही है. बीजेपी ने 294 में से 207 सीटें जीत ली हैं. वहीं, ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) 80 सीटों पर सिमट गई है. कांग्रेस ने भी दो सीटें जीत ली हैं. फरक्का सीट से मोताब शेख और रानीनगर से जुल्फिकार अली की जीत हुई है. इसमें मोताब शेख तो वह उम्मीदवार थे, जिनका नाम SIR में कट गया था और उनके चुनाव लड़ने पर ही सस्पेंस बढ़ गया था. 

मोताब शेख का मामला पहला था, जिसे अपीलीय ट्रिब्यूनल ने निपटाया था. अपीलीय ट्रिब्यूनल का काम वोटर लिस्ट से हटाए गए लोगों की अर्जियां निपटाना था. ट्रिब्यूनल के फैसले के बाद उनका नाम दोबारा वोटर लिस्ट में जोड़ा गया और तब जाकर वह चुनाव लड़ पाए.

क्या हुआ था?

28 फरवरी को चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट का फाइनल डेटा पब्लिश किया था. इसमें 61 लाख से ज्यादा वोटरों के नाम हटाए गए थे. 10 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस की अध्यक्षता में एक ट्रिब्यूनल बनाने का आदेश दिया था, ताकि जिन लोगों के नाम SIR के कारण हटे हैं, वे वहां अपील कर सकें.

मोताब शेख का नाम भी इस लिस्ट में हटा दिया गया था. उन्होंने ट्रिब्यूनल में इसे चुनौती दी. चुनाव आयोग ने उनका नाम हटाने के लिए 'तकनीकी कारणों' का हवाला दिया था. 

अपने आदेश में ट्रिब्यूनल के प्रमुख कलकत्ता हाई कोर्ट के रिटायर्ड चीफ जस्टिस टीएस शिवज्ञानम ने कहा था कि चुनाव आयोग ने मोताब शेख का नाम हटाने के कारणों के बारे में जानकारी न देने के लिए 'तकनीकी कारणों' का हवाला दिया था.

मोताब शेख ने दलील रखी थी कि उनका नाम छोड़कर बाकी उनके सभी छह भाई-बहन, पत्नी और बच्चों का नाम वोटर लिस्ट में रखा गया है. इसके बाद ट्रिब्यूनल ने चुनाव आयोग को मोताब शेख का नाम वोटर लिस्ट में जोड़ने का आदेश दिया था.

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अब कांग्रेस की टिकट पर जीते

मोताब शेख शुरुआती रुझानों में पीछे चल रहे थे. लेकिन बाद में उन्होंने जीत हासिल कर ली. मोताब शेख ने बीजेपी के सुनील चौधरी को 8193 वोटों से हराया है. 

कौन हैं मोताब शेख?

मोताब शेख 57 साल के हैं. वह मुर्शिदाबाद की फरक्का सीट से कांग्रेस के विधायक बने हैं. चुनाव आयोग में दाखिल हलफनामे के मुताबिक, उनके पास 5.70 करोड़ रुपये से ज्यादा की चल और 11.31 करोड़ रुपये से ज्यादा की अचल संपत्ति है.

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