- BJP ने पश्चिम बंगाल में बूथ स्तर पर मजबूत संगठन बनाकर 70 हजार से अधिक समितियां और लाखों कार्यकर्ता तैनात किए
- BJP ने महिलाओं और युवाओं को भरोसा कार्ड के जरिए जोड़ा तथा रोजगार-बेरोजगारी के मुद्दों पर व्यापक अभियान चलाया
- भाजपा ने राज्य सरकार की विफलताओं को उजागर करते हुए बड़ी जनसभाओं और चार्जशीट रणनीति से चुनावी माहौल बदला
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव दर्ज करते हुए भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में ऐतिहासिक जीत हासिल की है. यह जीत केवल एक चुनावी परिणाम नहीं, बल्कि सालों की छोटे-छोटे प्रयास, जमीनी स्तर पर संगठन के सशक्तीकरण और प्रभावशाली नैरेटिव का परिणाम है. भाजपा ने बंगाल के दुर्ग को फतह करने के लिए महीन रणनीति पर काम किया. बीजेपी ने इस रणनीति को जमीन पर उतारने के लिए कड़ी मेहनत की.
संगठनात्मक शक्ति: बूथ स्तर पर अभेद्य घेराबंदी
भाजपा की जीत का सबसे बड़ा स्तंभ उसका सांगठनिक ढांचा रहा.
- बूथ सशक्तीकरण: पार्टी ने 70,671 बूथों पर समितियां गठित कीं और 8,76,765 कार्यकर्ताओं की विशाल फौज तैनात की.
- फोकस विधानसभा: 2019 और 2021 के आंकड़ों का विश्लेषण कर 210 फोकस विधानसभाएं और विशिष्ट 'फोकस बूथ' चिह्नित किए गए.
- चुपचाप कमल छाप: कोलकाता प्रेसीडेंसी जैसे कठिन क्षेत्रों में वार्ड समितियों के साथ-साथ एक विशेष गुप्त टीम को लगाया गया, जिसका उद्देश्य भाजपा के पक्ष में मौन मतदान बढ़ाना था.

2. महिला और युवा: 'भरोसा कार्ड' से साधने की कोशिश
पार्टी ने राज्य के सबसे बड़े वोट बैंक महिलाओं और युवाओं को सीधे जोड़ा.
- भरोसा कार्ड: महिलाओं के लिए 1.60 करोड़ और युवाओं के लिए 40 लाख (कुल 2 करोड़) 'भरोसा कार्ड' फॉर्म भरवाए गए, जो एक सीधा संवाद तंत्र बना.
- चाकरी चाई बांग्ला: 220 विधानसभाओं में रोजगार के इच्छुक युवाओं का पंजीकरण कर बेरोजगारी के मुद्दे को धार दी गई.
- ड्रॉइंग रूम बैठकें: महिलाओं के बीच पैठ बनाने के लिए 1,96,000 छोटी बैठकें सीधे उनके घरों (ड्रॉइंग रूम) में की गईं.

3. 'वंदे मातरम' और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद
भाजपा ने बंगाल की अस्मिता और संस्कृति को अपने प्रचार का केंद्र बनाया.
- वंदे मातरम 150 वर्ष: इस महोत्सव के माध्यम से 1 लाख से अधिक लोगों को पदयात्रा और सामूहिक गायन से जोड़कर सांस्कृतिक गौरव जगाया गया.
- नरेंद्र कप: फुटबॉल प्रेमी बंगाल में 18,000 खिलाड़ियों और 1,200 टीमों के साथ मेगा फुटबॉल टूर्नामेंट आयोजित किया गया, जिसमें महिलाओं की 253 टीमों ने भी हिस्सा लिया.
- धार्मिक संपर्क: रामनवमी और पोइला बैसाख जैसे मौकों पर 6,250 स्थानों पर धार्मिक संगठनों के 2 लाख प्रमुखों से संपर्क साधा गया.

4. आक्रामक प्रचार और 'चार्जशीट' रणनीति
पार्टी ने राज्य सरकार की विफलताओं को जनता के बीच प्रभावी ढंग से रखा.
- परिवर्तन यात्रा: 9 यात्राओं के जरिए 217 विधानसभा क्षेत्रों को कवर किया गया, जिससे 7 लाख लोग सीधे जुड़े.
- आरोप पत्र: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य स्तरीय और कार्यकर्ताओं ने 220 विधानसभा क्षेत्रों में स्थानीय भ्रष्टाचार पर 'चार्जशीट' जारी की.
- दिग्गजों का जमावड़ा: पीएम मोदी की 19 सभाएं, अमित शाह की 40 सभाएं और 9 मुख्यमंत्रियों की 101 सभाओं ने माहौल को पूरी तरह बदल दिया. ब्रिगेड चलो जनसभा में 7.5 लाख की भीड़ ने जीत की नींव रखी.

5. प्रवासी और आउटरीच
- बंगाली प्रवासी: देश के 21 राज्यों से आए 9,498 प्रवासी बंगालियों ने स्थानीय लोगों के बीच जाकर पार्टी का प्रचार किया, जिससे यह संदेश गया कि पूरा देश बंगाल के साथ है.
- क्लब एवं एनजीओ: बंगाल की 'क्लब संस्कृति' को समझते हुए पार्टी ने 19,250 क्लबों और एनजीओ से सीधा संवाद किया.
6. नैरेटिव जिसने बदली सोच
पार्टी के तीन नारों ने जनता के मन में घर किया:
- बाचते चाई बीजेपी ताई (बचना है तो भाजपा चाहिए)
- पलटानों दरकार चाई बीजेपी सोरकार (बदलाव की जरूरत, भाजपा सरकार)
- भय OUT भरोसा IN (डर को भगाओ, भरोसे को लाओ)

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सोशल मीडिया पर पीएम मोदी के झारग्राम में 'झालमुरी' खाने से लेकर हुगली में नौका विहार तक के दृश्यों को 10 करोड़ से अधिक लोगों ने देखा. यह जमीनी सक्रियता और डिजिटल पहुंच का अनूठा संगम ही था, जिसने पश्चिम बंगाल में 'परिवर्तन' के संकल्प को हकीकत में बदल दिया.
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