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भारत का बजट 2026: बाजार की निराशा के बीच चमकती भविष्य की उम्मीदें

अजीत कुमार झा
  • देश,
  • Updated:
    फ़रवरी 02, 2026 08:43 am IST
    • Published On फ़रवरी 02, 2026 06:57 am IST
    • Last Updated On फ़रवरी 02, 2026 08:43 am IST
भारत का बजट 2026: बाजार की निराशा के बीच चमकती भविष्य की उम्मीदें

1 फरवरी का दिन बहुत ही अहम रहा. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश की उम्मीदों का बजट पेश किया. इस बजट से लोगों को बहुत ही उम्मीदें थीं. लेकिन बजट 2026-27 से ज्यादातर लोग खुश होने के बजाय चिंतित नजर आ रहे हैं. लेकिन कई लोगों का मानना है कि बड़े सुधार तुरंत फल नहीं देते, लेकिन धैर्य रखने और सही दिशा में काम करने की जरूरत है.

बजट के बाद क्यों परेशान हैं लोग?

  • 1 फरवरी को बजट के दिन शेयर बाजार में भारी तनाव देखा गया. बड़े स्टॉक्स  बुरी तरह धराशायी हो गए. सेंसेक्स 1,546.84 अंक टूट गया और निफ्टी 495.20 अंक नीचे चला गया. इसका असर निवेशकों पर साफ दिखाई दिया. निवेशकों को ये उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी. उनको लगा था कि बजट में ऐसे कदम उठाए जाएंगे जो बाजार को सपोर्ट करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. स्कॉक गिरने से लोग निराश और परेशान नजर आ रहे हैं.
  • इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह डेरिवेटिव्स (फ्यूचर्स और ऑप्शंस) पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ाना है. इसकी वजह से खासतौर पर उन निवेशकों में घबराहट पैदा हो गई, जो तेजी से खरीद-बिक्री करते हैं. हालांकि बाजार का ऐसा हाल पूरी तरह अप्रत्याशित नहीं था, लेकिन इससे निवेशकों के मनोबल को बड़ा झटका लगा है.
  •  विदेशी निवेशकों (FPI) के लिए बजट में खास प्रोत्साहन न होने की वजह से भी निराशा बढ़ी है. साल 2025 की शुरुआत से अब तक करीब 23 अरब डॉलर विदेशी निवेश भारत के शेयर मार्केट से बाहर निकले जा चुके हैं. ऐसे माहौल में सरकार की तरफ से अनुमानित 10% नाममात्र GDP बढ़ोतरी मार्केट को अनरियल सी लगी.  
  •  सेमीकंडक्टर और बायोफार्मा जैसे क्षेत्रों में दीर्घकालिक योजनाओं की बात जरूर हुई, लेकिन मार्केट की शंका दूर नहीं हो सकी.
  • मस्कट (ओमान) स्थित शानफारी ग्रुप के सीईओ संदीप मिश्रा ने कहा, “जब दुनिया पहले से ही युद्धों, ट्रेड वॉर और आर्थिक अस्थिरता से जूझ रही है, ऐसे समय में STT बढ़ाने का फैसला गलत है. एक तरफ भारत फ्री ट्रेड एग्रीमेंट कर रहा है, दूसरी तरफ निवेशकों के लिए नए रोड़े पैदा कर रहा है."
  • वहीं, रिलायंस निप्पॉन लाइफ (अब इंडसइंड निप्पॉन) के पूर्व चीफ नीरज कुमार उनकी इस बात से असहमत दिखे. उन्होंने कहा, "डिरिवेटिव्स में सट्टेबाजी बहुत ज़्यादा होती है, ज़्यादातर लोग इसमें पैसा गंवा देते हैं. इसकी वजह से मिडिल क्लास निवेशकों को नुकसान झेलना पड़ता है. उन्होंने कहा कि STT बढ़ाना सही कदम है. अभी बाजार गिरा है, लेकिन लंबे समय में संभलेगा.”

 पिछले हाल के सालों पर नजर डालें तो बजट 2026 वाला दिन शेयर मार्केट के लिहाज से बहुत ही खराब रहा. आगे भी अस्थिरता की आशंका बनी हुई है.

बजट की अच्छी और उम्मीद भरी बात भी जान लें

  • शाम होते‑होते बजट की कुछ पॉजिटिव बातें भी सामने आने लगीं. यह बजट सिर्फ आंकड़ों का डॉक्युमेंट नहीं था बल्कि देश के भविष्य के लिए एक साफ संदेश था कि 'सुधारों की रफ्तार जारी रहेगी'. बता दें कि यह पहला बजट था जो रविवार को पेश किया गया. इस बजट में सरकार की दीर्घकालिक सोच नजर आई.  खास तौर पर मैन्युफैक्चरिंग, तकनीक और युवाओं पर खास जोर दिया गया.
  • बजट में सरकार ने 12.2 लाख करोड़ का फंड प्रस्तावित किया, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा मिलेगा और निजी निवेश आकर्षित होगा. वैश्विक अनिश्चितता के बीच यह आर्थिक मजबूती का बड़ा संकेत है. वहीं MSME सेक्टर के लिए 10,000 करोड़ के फंड का ऐलान किया गया, जिससे छोटे और मझोले उद्यम आने वाले समय में बड़े राष्ट्रीय स्तर के व्यवसाय बन सकें.
  • इसके साथ ही कई राज्यों में रेयर-अर्थ मिनरल कॉरिडोर बनाने की बात भी बजट में कही गई, जो भविष्य की तकनीकों के लिए जरूरी हैं. सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की भी घोषणा हुई,  जिससे चप निर्माण, ट्रेनिंग और रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा. इसका मकसद भारत को वैश्विक टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में मजबूत बनाना है.
  • कुल मिलाकर यह पूरा बजट ‘युवा शक्ति' को केंद्र में रखकर तैयार किया गया था. इसमें गरीबी घटाने, आम लोगों की परचेजिंग पावर बढ़ाने और विकास को समावेशी बनाने की बात की गई.

बजट का निचोड़ जानें

2026 के बजट में एक साथ दो तस्वीरें दिखा देती हैं, जिसमें एक तरफ बाजार की निराशा और दूसरी तरफ भविष्य की उम्मीदें दिखाई देती हैं. हालांकि शेयर मार्केट की शुरुआत चिंता की वजह रही, लेकिन सरकार का दीर्घकालिक विज़न मजबूत सुधारों, निवेश और नवाचार पर आधारित है.

इतिहास इस बात का गवाह है कि बड़े सुधार तुरंत फल नहीं देते, लेकिन धैर्य रखने और सही दिशा में काम करने से भविष्य जरूर बदला जा सकता है. भारत की अर्थव्यवस्था की दिशा में यह बजट वही अहम अध्याय है, जो आगे जाकर नए अवसरों की राह खोल सकता है. 

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