- केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि यूजीसी के नए नियमों पर SC ने रोक लगाई है और पुनःसमीक्षा का आदेश दिया है
- सरकार इस मामले को पुनः समीक्षा के लिए देखेगी और न्यायालय के आदेशों का सम्मान करते हुए निर्णय करेगी
- उन्होंने कहा कि भारत में जाति व्यवस्था के दुष्परिणामों को पूरी तरह ठीक करने में समय लगेगा
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक और पुनःसमीक्षा के आदेश पर कहा कि सरकार इन सब विषयों को एक बार फिर नए सिरे से देखेगी और उस पर निर्णय करेगी.यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक और पुनःसमीक्षा के आदेश से संबंधित सवाल पर शेखावत ने कहा कि मुझे लगता है कि वह विषय अभी विचाराधीन है.न्यायालय ने उस पर आदेश दे दिया है.इसलिए अब जनता के लिए बोलने के लिए कुछ शेष नहीं बचा है. मैं जिस पद पर हूं, मुझे लगता है कि जो विषय न्यायालय में लंबित है. उस पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए, लेकिन मैं इतना मानता हूं कि समाज के एक बहुत बड़े वर्ग की भावनाएं उससे आहत हुई थीं.
साथ ही उस निर्णय को लेकर समाज के एक बड़े वर्ग के मन में संशय का भाव उत्पन्न हुआ था.उन्होंने कहा कि सरकार उस पर निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रारंभ कर चुकी थी, लेकिन न्यायालय ने चूंकि उसे एक बार स्थगन में रख दिया है.आने वाले समय में न्यायालय ने इस पर पुनःसमीक्षा करने के लिए कहा है.निश्चित रूप से सरकार इन सब विषयों को एक बार फिर नए सिरे से देखेगी और उस पर निर्णय करेगी.
केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि जहां तक आज सुप्रीम कोर्ट की यूजीसी मामले में टिप्पणी का प्रश्न है तो मुझे लगता है कि आपने न्यायालय के लिखित आदेश को ठीक से नहीं पढ़ा है.उन्होंने आरक्षण को लेकर कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की. न्यायालय ने केवल समानता के अधिकार और पुनःसमीक्षा की बात कही है.वर्ग,जाति और धर्म से ऊपर उठने के सवाल पर शेखावत ने कहा कि भारत में सदियों से चली आ रही व्यवस्था के दूषित होने के जो दुष्परिणाम हुए हैं. उन्हें 70-75 वर्षों में पूरी तरह ठीक करने की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए.इसमें समय लगेगा.जब भारत आर्थिक रूप से और अधिक प्रगति करेगा और एक विकसित राष्ट्र बनेगा, तब ये व्यवस्थाएं स्वतः ही समाप्त होती जाएंगी.
शेखावत ने कहा कि कानून निर्माण की प्रक्रिया पर मैं बस इतना कह सकता हूं कि बिना परामर्श के कोई कानून नहीं बनता.संसद की समिति, जिसकी अध्यक्षता विपक्ष के पास थी.उसने इस पर विचार-विमर्श करके ही अपनी रिपोर्ट दी थी.अब सांसदों ने अपने विवेक से जो निर्णय लिया, उस पर यह टिप्पणी करना उचित नहीं होगा कि उन्होंने ठीक से देखा या नहीं.
देना पड़ रहा है' और 'दे रहे हैं' में बहुत अंतर
एक तरफ अर्थव्यवस्था की मजबूती और दूसरी तरफ देश में 80 करोड़ लोगों को निःशुल्क अनाज देने के सवाल पर शेखावत ने कहा कि जो 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन देने की व्यवस्था को लेकर है.हमने कभी यह नहीं कहा कि उन्हें देना पड़ रहा है.'देना पड़ रहा है' और 'दे रहे हैं', इन दोनों में बहुत अंतर है.हमारे देश का किसान इतना अन्न पैदा करता है कि देश के भंडार भरे हुए हैं.सरकार एमएसपी पर अनाज खरीदती है.वह सरकार के पास एक संपत्ति के रूप में रखा हुआ है.सरकार के पास दो मार्ग हैं, या तो उसे निर्यात करे या बाजार में बेचे.हमने अपने सामान्य मानवी को प्रोत्साहन के रूप में अन्न देना प्रारंभ किया.
शेखावत ने कहा कि जब एक सामान्य परिवार को प्रति व्यक्ति 5 किलो के हिसाब से अनाज मिलता है तो लगभग 1000 रुपए से ज्यादा का राशन उसे मुफ्त मिलता है.उसे वह अनाज खरीदना नहीं पड़ता, जिससे उसके पॉकेट में 1000 रुपए बचते हैं.उस राशि को वह अपने परिवार के सदस्यों के बेहतर पोषण, बच्चों की अच्छी चिकित्सा, शिक्षा और मनोरंजन पर खर्च कर सकता है.यदि सरकार अपने लोगों को इस तरह परोक्ष रूप से 'इंसेंटिवाइज़' करे तो इसमें चिंता का विषय कहां है?
विपक्ष को जनता ने वोट से सबक सिखाया
शेखावत ने कहा कि विपक्ष आधारहीन आक्षेप लगाकर स्वयं को राजनीतिक रूप से प्रासंगिक बनाए रखने का विफल प्रयास निरंतर करता रहा है.अभी ग्रामीण रोजगार गारंटी (मनरेगा) में जो नई व्यवस्था की गई है, उसे लेकर भी झूठ का पहाड़ खड़ा करने की कोशिश की गई.जहां रोजगार न दे सकने की स्थिति में 'पेनल्टी क्लॉज' लगाया गया और विलंबित भुगतान के लिए ब्याज सहित भुगतान सुनिश्चित किया गया, वहां भी वे भ्रांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं.वे लोगों को भटकाकर अपने राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ति करना चाहते हैं.
नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) का स्मरण दिलाते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जोधपुर में आपने हिंदू विस्थापितों की पीड़ा देखी है.जहां नागरिकता के लिए उन्हें 15-15 साल तक संघर्ष करना पड़ता था.उनके लिए जो कानून बना, उसे लेकर दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक समाज के बीच खाई पैदा करने के लिए पदयात्रा का नेतृत्व कर रहे थे, जबकि वहां अल्पसंख्यकों का कोई विषय ही नहीं था.शेखावत ने कहा कि राफेल को लेकर भी कितना दुष्प्रचार किया गया, लेकिन आखिरकार सुप्रीम कोर्ट का डंडा पड़ने के बाद उस विषय को छोड़ना पड़ा.जनता ने हर बार उन्हें वोट के माध्यम से सबक सिखाया है, फिर भी वे मानने को तैयार नहीं हैं.
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