Poland Hidden Treasure: उपन्यासों में पढ़े खजाने अक्सर ख्वाब लगते हैं, लेकिन पोलैंड के 69 वर्षीय जान ग्लाजेव्स्की के लिए यह कोई अफसाना नहीं रहा. उन्होंने अपने पिता के बनाए एक पुराने नक्शे पर यकीन किया और जब उसी के सहारे खुदाई की, तो मिट्टी के नीचे दबा इतिहास बाहर आ गया. यह खजाना दूसरे विश्व युद्ध के दौर से जुड़ा है, जिसे जान के दादा ने अपनी जान बचाने के लिए जमीन में छिपाया था.
जंग और बिछड़ता हुआ परिवार (World War II and a broken legacy)
साल 1939 में सोवियत सेना के खौफ के चलते जान के दादा एडम ग्लाजेव्स्की को अपनी हवेली छोड़कर भागना पड़ा. जाने से पहले उन्होंने सोने के सिक्के, चांदी के बर्तन और जेवरात जमीन में दफन कर दिए. जंग खत्म हुई, हवेली खंडहर बन गई, लेकिन खजाना वहीं सोता रहा.

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पिता का बनाया नक्शा (The hand drawn ancestral map)
जान के पिता गुस्ताव ने अपने वालिद की निशानियों के आधार पर एक नक्शा तैयार किया था. वह नक्शा उन्होंने आखिरी सांस तक संभालकर रखा. बरसों बाद जान ने उसी नक्शे को सच मानकर यूक्रेन पोलैंड बॉर्डर के पास उस जगह खुदाई का फैसला किया.
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खुदाई और चमकती किस्मत (Digging revealed hidden treasure)
शुरुआत में कुछ नहीं मिला, लेकिन थोड़ी गहराई में जाते ही मिट्टी से सोने के सिक्के और चांदी के बर्तन झलकने लगे. 19वीं और 20वीं सदी के ये सिक्के आज अंतरराष्ट्रीय बाजार में लाखों डॉलर के बताए जा रहे हैं. यह खबर सिर्फ दौलत की नहीं, बल्कि यादों, विरासत और इतिहास की है. यह दिखाती है कि जंग के जख्म पीढ़ियों तक कैसे साथ चलते हैं. यह खजाना सिर्फ सोना नहीं, एक खानदान की दास्तान है, जो 80 साल बाद मिट्टी से बाहर आई.
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