UGC New Rules 2026: डिंडोरी दौरे पर पहुंचे पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री एवं क्षेत्रीय सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने यूजीसी (UGC) के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा लगाई गई रोक को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी. जब NDTV ने उनसे इस मुद्दे पर सवाल किया तो यूजीसी का नाम सुनते ही वे कुछ असहज नजर आए. हालांकि, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के स्टे का स्वागत करते हुए स्पष्ट किया कि अदालत ने अभी कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है, बल्कि फिलहाल केवल रोक लगाई गई है. उनका कहना था कि इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निर्णय अभी आना बाकी है. पढ़िए डिंडोरी से विजय तिवारी और भोपाल से आकाश द्विवेदी की रिपोर्ट.
राजनीतिक संतुलन में उलझी प्रतिक्रियाएं
फग्गन सिंह कुलस्ते सिर्फ बीजेपी के सीनियर सांसद ही नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख नेताओं में भी शुमार हैं. ऐसे में यूजीसी के नए नियम, खासकर इक्विटी कमेटी और भेदभाव विरोधी प्रावधानों को लेकर उनकी सतर्क प्रतिक्रिया को राजनीतिक संतुलन के तौर पर देखा जा रहा है. सवर्ण और ओबीसी वोट बैंक के बीच संतुलन साधने की चुनौती के चलते खुलकर समर्थन या विरोध करना जोखिम भरा माना जा रहा है. यही वजह है कि इस मुद्दे पर बीजेपी नेताओं के बयान फिलहाल संतुलित और गोलमोल नजर आ रहे हैं.
अब देशभर की नजरें सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं. यूजीसी के नए नियमों को लेकर राजनीति, समाज और शिक्षा जगत में मंथन जारी है, और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाज़ी और तेज होने की संभावना है.
भोपाल में सवर्ण समाज का जश्न और विरोध
यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट के स्टे के बाद मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में सवर्ण समाज के लोगों ने जोरदार प्रतिक्रिया दी. ढोल-नगाड़ों के साथ मिठाइयां बांटकर कुछ लोगों ने जश्न मनाया, तो वहीं सरकार के खिलाफ नाराज़गी भी खुलकर सामने आई. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बीजेपी ‘जय श्रीराम' के नाम पर सत्ता में आई, लेकिन आज सवर्ण समाज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है. लोगों ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर यही रवैया रहा तो आने वाले समय में बीजेपी को वोट नहीं, बल्कि “बूट” मिलेंगे.
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