- खेलो एमपी यूथ गेम्स में खिलाड़ियों को पोषण के लिहाज से केवल पूरी, आलू की सब्जी और हलवा दिया जा रहा है
- खिलाड़ियों को प्रोटीन युक्त दूध, अंडा, पनीर और मल्टीग्रेन ब्रेड जैसी जरूरी पोषक चीजें नहीं मिल रही हैं
- खिलाड़ियों ने कई दिनों तक एक जैसा खाना मिलने की शिकायत की है, साथ ही पानी की भी कमी बताई गई है
मध्यप्रदेश में इन दिनों ‘खेलो एमपी यूथ गेम्स 2026' का भव्य आयोजन चल रहा है. विकासखंड स्तर से लेकर राज्य स्तर तक फैले इस महाकुंभ में लाखों युवा खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने के सपने के साथ मैदान में उतर रहे हैं और जमकर मेहनत कर रहे हैं. लेकिन मेडल की इस होड़ के बीच अब एक गंभीर सवाल खड़ा हो गया है, क्या खिलाड़ियों को मिलने वाला खाना उनके प्रदर्शन के लिए वाकई पर्याप्त है?
NDTV की ग्राउंड रिपोर्ट में खिलाड़ियों ने जो हकीकत सामने रखी है, वह निराश करने वाली है. खिलाड़ियों को डाइट के नाम पर सिर्फ तेल में तली पूरी, आलू की सब्जी और हलवा परोसा जा रहा है. नौबत ये है कि दूध, उबला अंडा, पनीर और मल्टीग्रेन ब्रेड जैसे प्रोटीन और पोषण से भरपूर चीजें गायब हैं. ऐसे में सवाल यह है कि क्या ऐसी डाइट के सहारे मध्यप्रदेश अंतरराष्ट्रीय स्तर के चैंपियन तैयार कर पाएगा?

पेट भरेगा लेकिन खिलाड़ी को ताकत कैसे मिलेगी
रीवा से आए बॉक्सिंग खिलाड़ी नैतिक कहते हैं, “पेट भरने के लिए खाना तो मिल रहा है, लेकिन एक एथलीट को जो जरूरी प्रोटीन चाहिए, वह थाली में नहीं है.” ये सिर्फ अकेले उनका ही दर्द नहीं है, प्रदेश के अलग‑अलग हिस्सों से आए हजारों युवा खिलाड़ी, जो ओलंपिक और नेशनल गेम्स में पदक जीतने का सपना देख रहे हैं, उसी परेशानी से जूझ रहे हैं. खिलाड़ियों का कहना है कि उन्हें रोज़ाना खाने में सिर्फ पूरी, आलू की सब्जी और हलवा दिया जा रहा है, जबकि दूध, अंडा और पनीर जैसी न्यूट्रिशन वाली चीजें फूड मेनू में शामिल ही नहीं हैं.
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पूरी‑सब्जी और हलवे के भरोसे कैसे बनेगा चैंपियन?
खेल विज्ञान के मुताबिक एथलेटिक्स, बॉक्सिंग और कबड्डी जैसे हाई‑इंटेंसिटी वाले खेलों में खिलाड़ियों को भरपूर प्रोटीन और कैल्शियम की जरूरत होती है. लेकिन मध्य प्रदेश में जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है. सुजालपुर के एथलीट आलोक सालोदिया बताते हैं कि पूरी और हलवा तो मिल रहा है, लेकिन दूध और पनीर का कहीं अता‑पता नहीं है. वहीं एथलीट देवेंद्र का कहना है कि खाना देखने में ठीक लगता है, लेकिन बिना दूध और उबले अंडे के किसी एथलीट की रिकवरी कैसे होगी?ग्वालियर से आए कबड्डी खिलाड़ी प्रशांत ने भी निराशा जताते हुए कहा कि डाइट में जो जरूरी चीजें होनी चाहिए थीं, उनमें से कुछ भी नहीं दिया जा रहा.

दो‑दो दिन एक ही खाना, पानी तक की समस्या
सागर से आए एथलीट कृष्णा प्रजापति ने व्यवस्थाओं की एक और चिंताजनक तस्वीर पेश की. उन्होंने बताया कि दूध और अंडे की तो बात छोड़िए, कई जगह हाथ धोने के लिए पानी तक का भी बंदोबस्त नहीं है. खिलाड़ियों का कहना है कि उन्हें लगातार दो‑तीन दिनों से एक जैसा ही खाना दिया जा रहा है. एथलीट आर्यन सिंह बताते हैं कि दो दिन से उन्हें सिर्फ पूरी‑सब्जी ही परोसी जा रही है, जबकि नाश्ते में दूध और मल्टीग्रेन ब्रेड जैसी पौष्टिक चीजों का वादा किया गया था. जबलपुर में भी खिलाड़ियों में यही नाराज़गी देखने को मिली कि अंडा, पनीर और बॉर्नविटा वाले दूध का जिक्र तो है, लेकिन थाली में ये चीजें दूर-दूर तक नहीं दिख रही.
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डाइटिशियन की चेतावनी: फायदे से ज्यादा नुकसान
खिलाड़ियों की डाइट को लेकर एक्सपर्ट्स ने भी गंभीर चिंता जाहिर की है. सीनियर डाइटिशियन सिमरा के मुताबिक, एक खिलाड़ी को बेहतर प्रदर्शन के लिए मॉडरेट कार्बोहाइड्रेट और करीब 20 से 40 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है. उनका कहना है कि पूरी और आलू जैसी तली‑भुनी चीजें आम लोगों के लिए भी नुकसानदेह हैं, ऐसे में खिलाड़ियों के लिए यह और ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती हैं. खिलाड़ियों को बैलेंस और हेल्दी डाइट चाहिए, ताकि मसल्स की रिकवरी हो सके और लंबे समय तक एनर्जी बनी रहे. प्रोटीन की कमी का सीधा असर उनकी परफॉर्मेंस और करियर पर पड़ता है.
खेल मंत्री का जवाब: ‘सब बहुत अच्छा चल रहा है'
एक ओर हैरानी की बात यह है कि जब इन समस्याओं और फूड मेनू में गड़बड़ी को लेकर प्रदेश के खेल मंत्री विश्वास सारंग से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने जमीनी हकीकत से इतर जवाब दिया. मंत्री का कहना था कि “सब अच्छा चल रहा है… सब बहुत अच्छा चल रहा है.” लेकिन हकीकत यह है कि न तो डाइट की निगरानी के लिए कोई एक्सपर्ट तैनात है और न ही किसी तय न्यूट्रिशन प्लान को सही से फॉलो किया जा रहा है. ऐसे में बड़ा सवाल यही है, क्या तेल में तली पूरी खाकर मध्यप्रदेश के ये युवा खिलाड़ी भविष्य में देश के लिए गोल्ड मेडल ला पाएंगे?
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