- सांसद चंद्रशेखर ने कहा कि सरकार ने पक्ष मजबूती से नहीं रखा इसीलिए SC ने यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगा दी
- चंद्रशेखर ने कहा कि सरकार की कथनी और करनी में अंतर है, वह दोनों पक्षों को खुश करना चाहती थी
- चंद्रशेखर ने जातिविहीन समाज बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट से सरकार को कड़े निर्देश देने की आवश्यकता पर जोर दिया
उत्तर प्रदेश के नगीना से सांसद चंद्रशेखर ने देश के शिक्षा मंत्री को चिट्ठी लिखकर मांग की थी कि यूजीसी के नए नियम IIT, IIM, और AIIMS में भी लागू हों. सुप्रीम कोर्ट ने अब इन नए नियमों पर रोक लगा दी है. इस पर NDTV को दिए खास इंटरव्यू में चंद्रशेखर ने उल्टा सरकार पर भी सवाल उठा दिए. उनका कहना है कि सरकार की कथनी और करनी में अंतर है.
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सरकार ने कोर्ट में पक्ष मजबूती से नहीं रखा
सांसद चंद्रशेखर ने कहा कि एक अधिवक्ता के तौर पर वह सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करते हैं. वह मानते हैं कि जब सरकार कोई गलत काम करती है या पुलिस या एडमिनिस्ट्रेशन कोई गलत काम करता है तो हमारा ध्यान न्यायपालिका की तरफ ही जाता है कि वहीं से हमको न्याय मिलेगा. चंद्रशेखर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से उनका कोई सवाल नहीं है. उन्होंने नए नियमों पर रोक लगाने का बड़ा कारण यह बताया कि हमारी सरकार ने गाइडलाइन तो बनाई लेकिन उस पर अपना पक्ष मजबूती से नहीं रख पाई, इसलिए अदालत ने इस पर रोक लगाई है. उन्होंने कहा कि कानून तो बन जाता है लेकिन उसका इंप्लीमेंटेशन नहीं हो पाता है. उन्होंने कहा कि देश में कानून तो बहुत सारे बने हैं.

सरकार की कथनी और करनी में फर्क
चंद्रशेखर ने सरकार की कथनी और करनी में फर्क बताते हुए कहा कि अगर ऐसा नहीं होता तो वह अदालत में नए नियमों पर मजबूती से अपना पक्ष रखती. फिर रोक नहीं लगती बल्कि उल्टा गाइडलाइन ही आ जाती कि समितियां बनाकर इसको लागू किया जाए. चंद्रशेखर से जब पूछा गया कि सरकार को इसे कमजोर रूप से ही रखना होता तो वह ये नए नियम लाती ही क्यों? इस पर उन्होंने कहा कि सरकार दोनों पक्षों को खुश रखना चाहती है. पहले उन्होंने SC/ST/OBC को खुश करने के लिए गाइडलाइन बनाने की बात कही, जिससे उनके साथ भेदभाव नहीं होगा. ये गाइडलाइन भी इसलिए बनाई गईं क्यों कि रोहित बेमुला वाले केस में सुप्रीम कोर्ट का ही आदेश था कि इस तरह के क्राइम में 118 प्रतिशत वृद्धि हुई है तो इस पर कानून और गाइडलाइन बनाई जाए.
SC/ST/OBC वर्ग के बच्चों पर उठाया जा रहा सवाल
अब जब सामान्य वर्ग के लोग नाराज होने लगे और उनकी पार्टी के नेता ही कहने लगे तो वह चुप रहे. उनको लगा कि मामला अदालत में चला गया है तो अगर वे कोर्ट में पैरवी मजबूत नहीं करेंगे तो कोर्ट से खुद ही रोक लग जाएगी. इससे दोनों पक्ष खुश हो जाएंगे. क्या यूजीसी पर सरकार की गाइडलाइन उनको सही लगीं? इस सवाल के जवाब में चंद्रशेखर ने कहा कि बहुत बड़ा सवाल SC/ST/OBC वर्ग के बच्चों पर उठाया जा रहा है कि ये लोग हायर एजुकेशन सेंटरों में पढ़ने के लिए नहीं जाते बल्कि बदला लेने के लिए और आरोप लगाने के लिए, किसी का उत्पीड़न करने और किसी को मानसिक प्रताड़ना देने के लिए जाते हैं.

कानून के मिसयूज के डर से क्या कानून नहीं बनेगा
उन्होंने कहा कि जिस तरह से मीडिया में इस मुद्दे पर डिबेट हो रही है और कोर्ट ने भी अगर ऐसा कहा तो इस पर वह ऑब्जेक्शन करते हैं. चंद्रशेखर ने सवाल पूछा कि क्या आप भेदभाव का लीगलाइजेशन करना चाहते हैं. कौन सा ऐसा मामले है, जहां बदला लेने का आरोप नहीं लगाया जाता. कौन सा ऐसा कानून है जिसका दुरुपयोग नहीं किया जाता. उन्होंने कहा कि कानून का मिसयूज न हो इसके लिए कानून न बनाया जाए, ये कहां की बात है.
सरकार जातियां खत्म क्यों नहीं कर देती
चंद्रशेखर ने आर्म्स एक्ट का उदारण देते हुए कहा कि इसका लाइसेंस अपनी सुरक्षा के लिए मिलता है, किसी की हत्या के लिए नहीं. कोई भी कानून किसी भी अपराध से बचने के लिए होता हा ना कि अपराध करने के लिए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम जातिविहीन समाज के लिए क्या कर रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट के पास पावर है कि वह सरकार को निर्देश दे कि जातिविहिन समाज बना दिया जाएऔर जातियां खत्म कर देनी चाहिए. फिर सकार इस पर कदम क्यों नहीं उठाती.
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