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एक परीक्षा एक संकल्प, PM से SDM तक सबने मिलकर कराई NEET

रविवार को 20 लाख से ज्यादा छात्रों ने NEET की दोबारा परीक्षा दी. देशभर के 5 हजार से ज्यादा सेंटर पर ये परीक्षा हुई.

एक परीक्षा एक संकल्प, PM से SDM तक सबने मिलकर कराई NEET
NEET के दोबारा एग्जाम में 20 लाख से ज्यादा छात्र शामिल हुए.
PTI
नई दिल्ली:

तीन मई को जब देश का सबसे बड़ा मेडिकल एग्जाम NEET हुआ तो एग्जाम देने वाले छात्र खुशी-खुशी घर चले गए. लेकिन कुछ ही दिन बाद पेपर लीक का मामला सामने आया और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने इसे रद्द कर दिया. NTA के एक फैसले ने सीधे तौर पर 22 लाख से ज्यादा छात्रों पर असर डाला. इसे लेकर न सिर्फ NTA, बल्कि सरकार भी सीधे निशाने पर आ गई और जगह-जगह विरोध हुए. लेकिन पेपर लीक के 37 दिन बाद जब देशभर में दोबारा NEET की परीक्षा हुई तो सिर्फ सरकार ही नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम और छात्रों ने भी ताकत लगा दी.

कई एग्जाम सेंटर पर छात्रों का बुलंद हौसला देखने को मिला तो कहीं पर छात्र निराश भी दिखे. कहीं पर घायल छात्रा के लिए खास इंतजाम किए गए तो कहीं पर देरी से आने पर छात्रों को सेंटर के अंदर आने भी नहीं दिया गया. कई छात्रों ने कहा कि अगर यही इंतजाम पहले हो गए होते तो पेपर लीक ही नहीं होता.

पेपर लीक होने के बाद 21 जून को जब दोबारा एग्जाम हुआ तो इसे अच्छे से और बिना गड़बड़ी के करवाना सबसे बड़ी चुनौती थी. कोई गड़बड़ी न हो, इसके लिए देशभर के 5 हजार से ज्यादा एग्जाम सेंटर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे. इतना ही नहीं, सरकार ने सबसे पहले टेलीग्राम पर बैन लगाया, ताकि पेपर लीक की अफवाहें न फैलें. 

NEET का एग्जाम करवाने वाली संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने बताया कि रविवार को एग्जाम के लिए पूरे देश में लगभग 7 लाख से ज्यादा अधिकारियों को तैनात किया गया था, जिनमें पुलिस की टीम के साथ-साथ पर्यवेक्षक और परीक्षा कर्मचारी थे. 

कैसी थी इस बार तैयारी?

एग्जाम दोपहर 2.00 बजे से शाम 5.15 बजे तक करवाया गया. दिव्यांग कैंडिडेट्स को शाम 6.20 बजे तक एग्जाम लिखने की अनुमति दी गई. पेपर हिंदी और अंग्रेजी के अलावा 13 भाषाओं में करवाया गया. 

NEET का पेपर सेंटरों तक पहुंचाने के लिए वायुसेना की मदद ली गई. NTA के मुताबिक, NEET की परीक्षा देशभर के 551 शहरों में करवाई गई. इसके लिए देशभर में 5,440 और विदेशों में 14 एग्जाम सेंटर बनाए गए थे.

किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए 95 हजार से ज्यादा एग्जाम रूम में CCTV लगाए गए थे. अधिकारियों ने बताया कि कुल 1,38,560 CCTV कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी लगातार निगरानी की गई.

NTA ने बताया कि हर एक एग्जाम रूम में दो इनविजिलेटर तैनात रहे, जबकि हर केंद्र पर 10 से ज्यादा अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे. इसके अलावा 38,795 फ्रिस्किंग स्टाफ और 48,448 बायोमेट्रिक कर्मियों की नियुक्ति की गई. इस बार फेस ऑथेंटिकेशन प्रणाली को भी शामिल किया गया. 

परीक्षा प्रक्रिया की निगरानी के लिए लगभग 6,700 ऑब्जर्वर और 100 से ज्यादा वर्चुअल ऑब्जर्वर तैनात किए गए. परीक्षा में नकल और दूसरी गड़बड़ियों को रोकने के लिए 51,311 जैमर लगाए गए. 

NTA के मुताबिक, एग्जाम करवाने में CAPF, विदेश मंत्रालय, डाक विभाग, वायुसेना, गृह मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC), इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय, वित्तीय सेवा विभाग, रक्षा मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय के साथ-साथ SBI, केनरा बैंक, PNB और यूको बैंक ने भी सहयोग दिया.

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पिछली बार से कितनी अलग थी व्यवस्था?

re-NEET के लिए इस बार सरकार ने जिस तरह की व्यवस्था की ती, वह काफी सख्त और मजबूत थी. दिल्ली में re-NEET दे रहीं सोनिया ने PTI से कहा कि वह इस बार पहले की परीक्षा की तुलना में ज्यादा तनाव महसूस कर रही हैं. 

उन्होंने यह भी बताया कि पिछली परीक्षा के मुकाबले इस बार पीने के पानी और कूलर की व्यवस्था की गई है, और सुरक्षा व्यवस्था भी और कड़ी कर दी गई है. 

उन्होंने कहा, 'अगर पिछली बार भी ऐसी सुरक्षा व्यवस्था होती, तो पेपर लीक होने की आशंका कम होती और छात्रों को इतनी परेशानी नहीं झेलनी पड़ती.'

राजधानी दिल्ली समेत कई शहरों के एग्जाम सेंटर में बाहर इंतजार कर रहे माता-पिता और अभिभावकों के लिए मुफ्त पीने के पानी और नाश्ते का भी इंतजाम किया गया था.

घायल छात्रा के लिए अलग से व्यवस्था

NTA ने बताया कि एक हजार से ज्यादा दिव्यांग उम्मीदवार थे, जिनके लिए व्यापक सुविधा की गई थी. वहीं, मेडिकल समस्यां से जूझ रहे 81 उम्मीदवारों के लिए भी खास इंतजाम किए गए थे.

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कोलकाता में एक घायल छात्रा सृष्टि दुबे को एग्जाम सेंटर पर अलग रूम दिया गया, साथ ही मेडिकल सहायता और एक एम्बुलेंस की व्यवस्था भी की गई थी. 

सृष्टि दुबे 14 जून को एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गई थीं और उन्होंने विशेष व्यवस्था के लिए अधिकारियों से सहायता मांगी थी. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सृष्टि के माता-पिता से फोन पर बात की. रोड एक्सीडेंट में सृष्टि की 9 पसलियां टूट गई थीं लेकिन एग्जाम देने की जिद नहीं टूटी. 

छात्र समय पर एग्जाम सेंटर तक पहुंच सकें, इसके लिए एसडीएम और पुलिस ने अलग से ट्रैफिक प्लान बनाया था. पटना के एसडीएम सत्यम सहाय ने बताया था कि पिछली बार की तरह जाम न लगे, इसके लिए एक ट्रैफिक प्लान बनाया गया था.

दिल को छू लेने वाला ऐसा ही एक मामला इंदौर से भी सामने आया, जहां एक छात्रा को एग्जाम सेंटर तक पहुंचाने में एडिशनल डीसीपी ने मदद की. छात्रा दूसरे शहर से एग्जाम देने के लिए आई थी. लेकिन वह लेट हो गई. इसके बाद एडीसीपी ने अपनी सरकारी गाड़ी से छात्रा को एग्जाम सेंटर तक पहुंचाया. इसी तरह एक छात्र कीमोथेरेपी से गुजर रहा था. इसके बावजूद उसने एग्जाम दिया.

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कुछ छात्र re-NEET से थके, बोले- बस निपट जाए

3 मई को 22 लाख छात्रों ने बहुत उम्मीद के साथ परीक्षा दी थी लेकिन पेपर लीक और फिर एग्जाम रद्द होने से उनकी ये उम्मीद टूट गई.

हरियाणा के महेंद्रगढ़ में एग्जाम देने आईं रिया यादव कहती हैं, 'मैं बस चाहती हूं कि यह सब अब खत्म हो जाए. इस समय मेरा दिमाग पूरी तरह सुन्न हो चुका है. यह मामला अब जरूरत से ज्यादा खिंच गया है, जिससे हमारी मानसिक स्थिति खराब हो रही है.'

दिल्ली में दोबारा परीक्षा दे रहे किशन ने कहा, 'सच कहूं तो अब पहले के मुकाबले प्रेशर कम है, क्योंकि पिछले एक महीने में बहुत कुछ हुआ है. इतनी सारी चीजें हुईं कि अब मुझे बस ऐसा लगता है कि ठीक है, जितना हो सका, मैंने उतना रिवीजन किया. अब बस जाकर एग्जाम दूंगा. अब बस एक ही बात मायने रखती है कि एग्जाम निष्पक्ष तरीके से हो.'

वहीं, सोहना के रहने वाले निखिल तंवर का दर्द कुछ अलग है. पेपर लीक की खबर के बाद उनका पढ़ाई से भरोसा ही उठ गया. निखिल ने बताया, 'लीक के बाद मेरा ध्यान भटक गया. मैंने पढ़ाई छोड़ दी, साधारण फोन छोड़कर स्मार्टफोन ले लिया और दोस्तों के साथ घूमने लगा. मेरी पूरी तैयारी बर्बाद हो गई.'

दोबारा एग्जाम दे रहे अंशुल चौहान ने कहा कि पेपर लीक के कारण उनकी मानसिक स्थिति बहुत खराब हो गई है. उन्होंने यह भी कहा कि दोबारा तैयारी के लिए कोचिंग सेंटर को मजबूरन 15 से 20 हजार रुपये की अलग से फीस देनी पड़ी.

लेट पहुंचे छात्रों को नहीं मिली एंट्री

हालांकि, कुछ जगहों पर छात्रों के लेट पहुंचने के मामले भी सामने आए. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में दो उम्मीदवारों को देर से पहुंचने के लिए कारण एग्जाम सेंटर में एंट्री नहीं मिली. छात्र के चाचा आमिर कादरी ने बताया कि आते समय दुर्घटना हो गई थी, इसलिए देरी हो गई. 

वहीं, कर्नाटक के बेंगलुरु के एक एग्जाम सेंटर से भी ऐसा ही मामला सामने आया, जहां देरी से पहुंचने पर तीन छात्राओं को अंदर नहीं आने दिया गया. 

कोलकाता और उसके आस-पास के इलाकों में भारी बारिश हुई, जिससे शहर के कई हिस्सों में जलभराव हो गया और ट्रैफिक व्यवस्था बाधित हुई. इससे छात्रों को एग्जाम सेंटर तक पहुंचने में खासी दिक्कत का सामना करना पड़ा.

मुंबई में, कर्मचारियों की हड़ताल के बावजूद, बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट (BEST) ने री-एग्जाम देने वाले छात्रों के लिए स्पेशल बस सर्विस का इंतज़ाम किया।

मुंबई में दो दिन से बसों की हड़ताल जारी है. रविवार को NEET परीक्षा के चलते स्पेशल बसें चलाई गईं, ताकि छात्रों को दिक्कत न हो. बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (BMC) के मुताबिक, दिन भर में लगभग 180 बस ट्रिप की योजना बनाई गई थी, जिसमें शहर भर के 63 एग्जाम सेंटर तक जाने के लिए 24 रूटों पर 60 बसें लगाई गई थीं.

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45 मिनट तक एयरपोर्ट पर ही रुके रहे PM

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को कोलकाता से दिल्ली पहुंचे. दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहुंचने के बाद आवास तक पहुंचने के लिए कुछ समय तक वह एयरपोर्ट पर ही रहे, ताकि NEET देने वाले किसी भी छात्रा को टैफिक पाबंदियों के कारण असुविधा न हो.

पीएम मोदी दोपहर करीब 1:15 बजे IGI एयरपोर्ट पहुंचे, लेकिन वहां से तुरंत लोक कल्याण मार्ग स्थित अपने आवास रवाना होने के बजाय वहीं रुके रहे.

सूत्रों के अनुसार, चूंकि NEET की परीक्षा दोपहर दो बजे शुरू होनी थी, इसलिए प्रधानमंत्री ने परीक्षा शुरू होने के बाद ही आवास के लिए निकलने का फैसला लिया, ताकि किसी भी छात्र को एग्जाम सेंटर तक पहुंचने में परेशानी ना हो और यातायात व्यवस्था भी प्रभावित ना हो.

टीम 'भारत' ने कर दिखाया!

पेपर लीक के कारण छात्रों में गुस्सा भी था. लेकिन सरकार और NTA की जिम्मेदारी थी कि इस परीक्षा को अच्छे से करवाया जाए, ताकि छात्रों का भविष्य न खराब हो.

पेपर लीक की गलती से सबक लेते हुए re-NEET में सरकार ने जिस तरह के कदम उठाए, वह उसकी गंभीरता दिखाती है. सिर्फ सरकार ही नहीं, बल्कि सिस्टम और आम लोगों ने भी एकजुटता दिखाई. NTA ने कहा भी कि यह 'टीम भारत' के कारण मुमकिन हो सका.

ज्यादातर छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा देना आसान नहीं था. छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा देना एक तरह से फिर से पहली कोशिश जैसा था. 

लेकिन अभी भी ये कहना बहुत जल्दबाजी होगा कि पेपर लीक की समस्या को पार कर लिया गया है लेकिन इस तरह की कोशिशें और एकजुटता एक उम्मीद जरूर जगाती है.

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लेखक के बारे में
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प्रियंक द्विवेदी
चीफ सब एडिटर
डेटा स्टोरीज, एक्सप्लेनर और इंडेप्थ खबरों पर काम करने में दिलचस्पी है. राजनीति के साथ-साथ वर्ल्ड, बिजनेस और लीगल न्यूज पर काम करना पसंद है. घूमना-फिरन... और पढ़ें
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