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"गलती सरकार करे और जान हमारे बच्चों की जाए", पेपर लीक के डर और मानसिक तनाव के बीच परीक्षा दे रहे छात्र

"पेपर लीक होने से योग्य (Meritorist) बच्चे रह जाते हैं और कम नंबर वाले पैसे के बल पर सिलेक्ट हो जाते हैं। इससे मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों का भविष्य बर्बाद हो रहा है."

"गलती सरकार करे और जान हमारे बच्चों की जाए", पेपर लीक के डर और मानसिक तनाव के बीच परीक्षा दे रहे छात्र
पूरा शिक्षा विभाग ही दोषी है,और विद्यार्थी का लाइफ से खेल रहे हैं और जल्दबाजी में बहाली भी नहीं होता है.

पेपर लीक को लेकर चर्चित नीट परीक्षा का संचालन रविवार को एक बार फिर से हो रहा है. अकेले बेगूसराय में कुल आठ सेंटर पर चाकचौबंद व्यवस्था के बीच परीक्षा आयोजित है. इस परीक्षा में बेगूसराय के लगभग चार हजार छात्र और छात्रा शामिल हो रहे है. आज के इस परीक्षा की खास बात यह देखने को मिली की इस परीक्षा में शामिल होने वाले अधिकतर छात्र -छात्राएं पेपर लीक का दंश झेल चुके है.  इस बार भले ही वो परीक्षा में शामिल हो रहे है पर पेपर लीक का डर फिर से उनको अंदर समाया हुआ है. वहीं, पिछली परीक्षा में उनके तैयारी पर पेपरलीक का डाका उन्हें अंदर से खाये जा रहा है.

इस संबंध मे NDTV के रिपोर्टर नें जब छात्र और उनके अभिभावक से बात की तो अधिकतर लोगो नें इस पुरे प्रकरण के लिए सरकार को जिम्मेवार ठहराया. अधिकतर छात्रों नें बताया की वो भले ही परीक्षा दे रहे हैं, पर अब उनका हिम्मत जवाब दे चुका है. कुछ नें बताया की इतनी तैयारी के बाद अगर पेपर लीक हो जाता है तो उनका भरोसा परीक्षा को लेकर खत्म हो जाता है,दोबारा उनकी हिम्मत पहले की तरह नहीं बन पाता है.

दोबारा ऐसा ना हो यही ईश्वर से कामना है.

वहीं अभिभावको की नाराजगी देखने को मिली. लोगों नें कहा की गलती सरकार करें और जान उनके बच्चे की जाये. बच्चे इतने मेहनत से तैयारी करते है पर उनका सपना पेपर लीक के कारण सवरने से पहले टूट जाता है. इस बार दोबारा ऐसा ना हो यही ईश्वर से कामना है.

दरअसल बेगूसराय में इस बार 8 परीक्षा केंद्रों पर 3896 परीक्षार्थी परीक्षा दे रहे हैं. नीट की परीक्षा देने आई छात्रा दिव्या ने बताया कि हम मिडिल क्लास से आते हैं और इतना मेहनत करके हमारे पेरेंट्स हमें पढ़ाते हैं. उसके बाद हम लोग इतने पैनिक में जाते हैं, एग्जाम देते हैं, पूरे साल पढ़ते हैं और फिर एग्जाम देते हैं. एग्जाम भी हमारा अच्छा जाता है और फिर हमें सुनने को मिलता है कि हमारा पेपर लीक हो गया. हमारा एक साल, दो साल का मेहनत ऐसे ही बर्बाद हो जाता है. पेपर लीक एक महीने आप दे रहे हो कि फिर से प्रिपेयर कर लो, तो ऐसे कुछ नहीं होता है.

हमें बहुत प्रॉब्लम होता है, कितने स्ट्रेस,फिजिकल स्ट्रेस, मेंटल स्ट्रेस सब कुछ होता है और उसके बाद हम लोग पेपर देते हैं और बहुत अच्छा जाता है और फिर पेपर लीक हो जाता है. ये बहुत गंदा काम है सरकार का ये कैसे मैनेजमेंट कर रहे हैं कि हमारा पेपर लीक हो जा रहा है.बच्चों को आप इतना स्ट्रिक्ट चेकिंग करते हैं, क्या बच्चे ही पेपर लीक कर रहे हैं. और यहां मैनेजमेंट ही नहीं सही है. मेरा बस यही है कि ये हमारा लास्ट अटेंप्ट हो और हम लोग का पेपर अच्छा आए और हम लोग का निकल जाए और पेपर लीक भी ना हो.

''हमारे सिस्टम में बहुत बड़ा फाल्ट है''

​​वहीं, एक अन्य छात्र कोमल ने बताया कि ऐसे लीक नहीं होना चाहिए. हम लोग फ्यूचर हैं देश के, तो हम लोग के साथ ऐसा हो रहा है तो आगे पता नहीं क्या होगा. तैयारी करते हैं, फिर एग्जाम देते हैं और फिर पेपर सब लीक हो जाता है. ये तो हमारे सिस्टम में बहुत बड़ा फाल्ट है कि पेपर लीक हो जाता है. बहुत बुरा लगता है. इतना मेहनत करने के बाद फिर से एग्जाम देना पड़ता है, फिर वो जोश नहीं आ पाता है जो पिछली बार दिए थे, फिर बहुत ज्यादा दिक्कत होता है.

''हर बार ऐसे पेपर लीक हो जाता है, कैसे काम चलेगा''

वहीं एक अन्य छात्र रूद्रा ने बताया कि उतना मेहनत करते हैं मतलब, घरवाला का सपोर्ट इतना रहता है, तभी इतना कर पाते हैं और हर बार ऐसे पेपर लीक हो जाता है, कैसे काम चलेगा. पिछले साल हो गया, उसके पिछले साल हो गया, हर साल ऐसे हो रहा है. क्या मतलब है, क्या जिम्मेदारी है गवर्नमेंट का, सो समझ में ही नहीं आता है. कम से कम जो एग्जाम कंडक्ट करा रहे हैं सही से कराएं.  इतना फंडिंग ले रहे हैं, इतना टैक्स ले रहे हैं, उसके बाद भी ऐसे कर रहे हैं तो कैसे चलेगा. जब पिछली बार पेपर दिए थे, उसके बाद जब ये नोटिस आया कि पेपर लीक हो गया है, तो एकदम कॉन्फिडेंस ही खत्म हो गया. दोबारा प्रिपेयर करने के लिए टाइम कैसे निकालेंगे, कैसे प्रिपेयर करेंगे. मतलब एकदम जो मेंटली स्ट्रेस हो जाता है, वो हो गया.

''पेपर लीक कराने में NTA का स्ट्राइक रेट 100% है''

वहीं, एक अन्य छात्र प्रियांशु झा ने बताया कि सिर्फ NEET का बात नहीं है. NTA को अगर आप देखें, जब से यह बॉडी बनी है तब से इस ये विवाद हैं. आप NTA का कोई भी एग्जाम उठा लीजिए NEET हो गया, NEET UG हो गया, JEE Mains वाला हो गया, CUET UG, CUET PG, NET-JRF सारे एग्जाम लीक होते हैं. NTA एकमात्र ऐसी संस्था है जिसका स्ट्राइक रेट 100% है पेपर लीक कराने में, आप जान लीजिए.​और बात सिर्फ सेंट्रल गवर्नमेंट के एग्जाम की बात नहीं है, बिहार में देख लीजिए. बिहार पुलिस का पेपर लीक हो जाता है, दरोगा का लीक हो जाता है. अभी हाल फिलहाल में AE/DO का पेपर लीक हुआ था. 67वीं BPSC का पेपर लीक के सवाल आए थे, जिनका कल रिजल्ट आया. हर एग्जाम लीक होता है. SSC में देख लीजिए, रेलवे में देख लीजिए. यह पूरा सिस्टम ही करप्ट हो गया है, अंदर के लोग बैठे हुए हैं.

''बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ ना हो''

नीट की परीक्षा दिलाने आए छात्र के अभिभावक मदन कुमार ने बताया कि बच्चों का जब मेंटल हैरेसमेंट होता है पेपर लीक होने के बाद तो वाकई बहुत दुखद बात है. उसमें बच्चे ही नहीं, मां-पिताजी का भी वही हाल होता है. हम बस यही कहेंगे कि इस बार सब ठीक-ठाक हो जाए, ऐसी कोई घटना नहीं हो. मुझे न्यूजपेपर से पता चला कि बहुत सारी लड़कियां सुसाइड कर ली. वह इतने तनाव में थी कि मेरा एग्जाम अच्छा गया, इस बार नहीं हुआ तो दोबारा क्या होगा. यह सोच करके उसने आत्महत्या करी है. यह बहुत गलत बात है. सिस्टम में सुधार लाना बहुत जरूरी है. सरकार से यही मांग करते हैं कि बिल्कुल ट्रांसपेरेंट और स्वच्छ एग्जाम ले. बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ ना हो.

''पेपर  लीक नहीं होना चाहिए, इससे बच्चे का मनोबल टूटता है''

वहीं, एक दूसरे अभिभावक निर्मला देवी ने बताया कि हम यही कहेंगे कि पेपर कदापि लीक नहीं होना चाहिए. इससे बच्चे का मनोबल टूटता है, बच्चे का भविष्य खराब होता है, माता-पिता का भी मनोबल टूटता है, माता-पिता हतोत्साहित होते हैं और बच्चे कोई गलत कदम उठाते हैं तो माता-पिता जीवन भर भुक्तभोगी रहते हैं. इसलिए पेपर कभी भी लीक नहीं होना चाहिए. क्योंकि बच्चे को हम लोग हमेशा गाइड करते हैं कि तुम लोग किस तरह से पढ़ाई करोगे. सामान्य वर्ग के बच्चे रहते हैं, मध्यमवर्गीय लोग रहते हैं, अपना पूरा कमाई उसमें लगा देते हैं. बच्चे अपना मेहनत,और मूल्यवान समय लगाते हैं, माता-पिता मूल्यवान समय देते हैं और अगर पेपर लीक होता है तो यह देश के लिए, देश के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होता है. कम नंबर वाले बच्चे सिलेक्ट हो जाते हैं और जो मेरिटोरियस बच्चे हैं, वो सिलेक्ट होने से रह जाते हैं. जिसके पास ना पैसा होता है, वह बच्चा कहां जाएगा ना प्राइवेट कॉलेज ले सकता है और सरकारी में उसको स्थान नहीं मिलता है. इस तरह बच्चे का भविष्य बर्बाद हो जाता है.

''विद्यार्थी तो डिप्रेशन में चला ही जाता है''

वहीं नीट की परीक्षा दिलवा रही अभिभावक पूजा किरण ने बताया कि अभी क्या कह सकते हैं, बार-बार तो पेपर ही लीक होता है. इस बार भी सुन रहे हैं कि पेपर लीक हो जाएगा,  लेकिन अब देखिए सरकार क्या करती है. अभी विद्यार्थी तो डिप्रेशन में चला ही जाता है, उतना ही महत्वपूर्ण एग्जाम है. दिन-रात एक करके पढ़ता है विद्यार्थी, पेपर लीक हो जाता है. और सरकार से मांग करते हैं कि बार-बार इस तरह का ना हो, पेपर लीक ना हो.

''पूरा शिक्षा विभाग ही दोषी है''

​वह एक अन्य अभिभावक शंभू कुमार चौधरी ने बताया कि बच्चा जो साल भर से मेहनत  करता हैं और उसमें क्वेश्चन आउट हो जाता है, तो सारा परिश्रम बेकार हो जाता है और बहुत विद्यार्थी बहुत टेंशन में आ जाता है. उसी में आक्रोश में जाकर अपना आत्महत्या कर लेती है. समय बर्बाद हो जाता है, उम्र बर्बाद हो जाता है, विद्यार्थी का मेहनत बेकार हो जाता है. इस पर सरकार को, मोदी जी को ज्यादा से ज्यादा ध्यान देना चाहिए. पूरा शिक्षा विभाग ही दोषी है,और विद्यार्थी का लाइफ से खेल रहे हैं और जल्दबाजी में बहाली भी नहीं होता है. एक बहाली के लिए 5 वर्ष लगाते हैं और उसके बाद विद्यार्थी का लाइफ खराब हो जाता है.

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लेखक के बारे में
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संतोष प्रसाद श्रीवास्तव
संवाददाता, बेगूसराय
संतोष प्रसाद श्रीवास्तव बिहार के बेगूसराय जिले से NDTV के लिए रिपोर्टिंग करते हैं. उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत वर्ष 2000 से एक स्थानीय न्यूज़ चैनल स... और पढ़ें
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