- राजपाल यादव केस में नया मोड़, समझौते की संभावना बढ़ी
- कनाडा कार्यक्रम में शामिल हो सकेंगे राजपाल यादव
- फिल्म फाइनेंस विवाद से शुरू हुआ मामला, 16 साल बाद भी जारी कानूनी लड़ाई
अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है. गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने मामले को आपसी समाधान की संभावना तलाशने के लिए मीडिएशन के लिए भेज दिया. सुनवाई के दौरान राजपाल यादव के वकील ने अदालत को बताया कि कोर्ट के निर्देशानुसार 13 अक्टूबर को शेष 85 लाख रुपये भी रजिस्ट्री में जमा करा दिए गए हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि राजपाल यादव को कनाडा जाना है, जहां कार्यक्रमों से होने वाली आय भुगतान प्रक्रिया में मदद कर सकती है.
सुप्रीम कोर्ट ने मीडिएशन का दिया सुझाव
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने दोनों पक्षों से पूछा कि आखिर आपस में बैठकर समझौता क्यों नहीं कर लेते. इसके बाद अदालत ने मामले को मीडिएशन के लिए भेजने का फैसला किया. राजपाल यादव की ओर से पेश वकील ने बताया कि कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए बकाया राशि भी जमा कर दी गई है. उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि राजपाल यादव को कनाडा जाना है वहां प्रोग्राम है जहां से कुछ पैसा मिलेगा तो हेल्प हो जाएगी.
पासपोर्ट रिलीज करने का आदेश
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को राजपाल यादव का पासपोर्ट रिलीज करने का निर्देश दिया. इससे उनके विदेश यात्रा का रास्ता साफ हो गया है. इससे पहले शीर्ष अदालत ने पिछली सुनवाई में राजपाल यादव को तत्काल 1 करोड़ 15 लाख रुपये जमा करने और शेष 85 लाख रुपये 13 अक्टूबर तक जमा कराने का निर्देश दिया था.
क्या है पूरा मामला?
यह मामला मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े सात चेक बाउंस मामलों का है. आरोपों के अनुसार राजपाल यादव ने वर्ष 2010 में अपनी फिल्म 'अता पता लापता' के निर्माण के लिए कंपनी से करीब 5 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता ली थी. फिल्म के अपेक्षित प्रदर्शन नहीं करने के बाद भुगतान को लेकर विवाद शुरू हो गया. शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार वर्ष 2012 में हुए एक समझौते के तहत राजपाल यादव, उनकी पत्नी राधा यादव और उनकी कंपनी ने ब्याज सहित करीब 11 करोड़ रुपये लौटाने पर सहमति दी थी.
सात चेक हुए थे बाउंस
बताया गया कि वर्ष 2013 में राजपाल यादव की ओर से 1.05 करोड़ रुपये के सात चेक जारी किए गए थे, लेकिन सभी चेक बाउंस हो गए. इसके बाद मुरली प्रोजेक्ट्स ने सात अलग-अलग मुकदमे दर्ज कराए. अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट अदालत ने राजपाल यादव को दोषी ठहराते हुए छह महीने की सजा सुनाई थी. बाद में मामला सेशंस कोर्ट और फिर दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा.
जेल भी जा चुके हैं राजपाल
दिल्ली हाई कोर्ट ने जुलाई 2026 में राजपाल यादव की दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए सातों मामलों में तीन-तीन महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई थी. इससे पहले फरवरी 2026 में भी उन्हें जेल जाना पड़ा था. अदालत ने भुगतान संबंधी आश्वासनों के बार-बार पूरे नहीं होने पर राहत वापस लेते हुए उन्हें सरेंडर करने का निर्देश दिया था.
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