महाराष्ट्र में सूखे और पानी की किल्लत की आशंका का असर अब बड़े विकास कार्यों पर भी दिखने लगा है. नागपुर में संभावित जल संकट को देखते हुए महानगर पालिका ने 900 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली 265 सीमेंट सड़कों का निर्माण फिलहाल रोक दिया है. इन सड़कों की कुल लंबाई 89.22 किलोमीटर है. प्रशासन का कहना है कि सीमेंट-कंक्रीट की सड़कें बनाने और उनकी तराई में बड़ी मात्रा में पानी लगता है, इसलिए पानी को विकास कार्यों पर खर्च करने के बजाय पीने के लिए बचाने को प्राथमिकता दी जा रही है. हालात को देखते हुए निजी और व्यावसायिक निर्माण कार्यों के साथ पार्क-उद्यानों की सिंचाई में भी पीने के पानी के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है.
900 करोड़ के प्रोजेक्ट पर लगा ब्रेक
नागपुर महानगर पालिका यानी NMC ने पांचवें चरण में होने वाले सीमेंट सड़क निर्माण के काम को स्थगित करने का फैसला किया है. इस परियोजना पर करीब 900 करोड़ रुपये खर्च होने थे. इसके तहत शहर में कुल 265 सड़कों का कंक्रीटीकरण किया जाना था. इन सड़कों की कुल लंबाई करीब 89.22 किलोमीटर है. अब पानी की स्थिति को देखते हुए इस पूरे निर्माण कार्य को फिलहाल आगे के लिए टाल दिया गया है.बता दें कि पांचवें चरण में शुरुआत में 135 सड़कों के कंक्रीटीकरण की योजना बनाई गई थी.
सड़क से ज्यादा जरूरी पानी बचाना
सीमेंट और कंक्रीट की सड़कों के निर्माण में बड़ी मात्रा में पानी इस्तेमाल होता है. सड़क बनने के बाद उसकी तराई में भी पानी की जरूरत पड़ती है. इस साल अपर्याप्त बारिश, पानी की बढ़ती मांग और बांधों में गिरते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने फैसला किया है कि फिलहाल उपलब्ध पानी को विकास कार्यों में खर्च करने के बजाय लोगों की पीने की जरूरतों के लिए संरक्षित किया जाए.पानी बचाने की कोशिश केवल सरकारी सड़क परियोजनाओं तक सीमित नहीं रखी गई है. महानगर पालिका ने निजी और व्यावसायिक निर्माण कार्यों में भी पीने के पानी के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है.इसी तरह शहर के पार्कों और उद्यानों की सिंचाई के लिए भी पीने के पानी के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया गया है. यानी प्रशासन फिलहाल उन गतिविधियों में पेयजल का इस्तेमाल नहीं होने देना चाहता, जिन्हें टाला जा सकता है.
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पानी की किल्लत ने बदली विकास की प्राथमिकता
नागपुर में लिया गया यह फैसला संभावित जल संकट की गंभीरता को बताता है. जिस शहर में 900 करोड़ रुपये की लागत से करीब 89 किलोमीटर लंबे सड़क नेटवर्क के कंक्रीटीकरण की तैयारी चल रही थी, वहां अब उसी प्रोजेक्ट को पानी बचाने के लिए रोक दिया गया है.प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल नए निर्माण के बजाय शहर के लोगों के लिए पर्याप्त पेयजल बचाना है. इनपुट के मुताबिक जब तक जलाशयों में पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं होता, बड़ी मात्रा में पानी की खपत वाले गैर-जरूरी कामों पर रोक जारी रहने की बात कही गई है.नंदुरबार में महंगे चारे और दूध उत्पादन की बढ़ती लागत से परेशान पशुपालकों के बाद नागपुर में बड़े निर्माण कार्यों पर रोक का यह मामला महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों में पानी की कमी के असर को सामने रखता है. एक तरफ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुपालन पर दबाव है, तो दूसरी ओर शहर में करोड़ों रुपये के विकास कार्य भी पानी बचाने के लिए टालने पड़ रहे हैं.
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