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₹100 में हो रहा तैयार और बिक रहा ₹80 में ! महाराष्ट्र में सूखे की मार से बिगड़ा दूध का गणित

महाराष्ट्र के नंदुरबार में सूखे से पशु चारा ₹8 से बढ़कर ₹14 किलो हो गया है. किसानों का दावा है कि एक लीटर दूध पर करीब ₹100 खर्च हो रहे हैं, जबकि कीमत सिर्फ ₹80 मिल रही है. पशुपालकों ने सरकार से आर्थिक मदद मांगी है.

₹100 में हो रहा तैयार और बिक रहा ₹80 में ! महाराष्ट्र में सूखे की मार से बिगड़ा दूध का गणित

महाराष्ट्र में सूखे की मार अब सिर्फ खेत और फसलों तक सीमित नहीं रही है.नासिक डिवीजन में मौजूद नंदुरबार जिले के पशुपालकों का कहना है कि चारे और पशु आहार की बढ़ती कीमतों ने डेयरी कारोबार का पूरा गणित बिगाड़ दिया है. जिस पशु चारे की कीमत पहले 8 रुपये किलो थी, वह बढ़कर 14 रुपये किलो पहुंच गई है. किसानों का कहना है कि एक लीटर दूध के उत्पादन पर अब करीब 100 रुपये खर्च हो रहे हैं, जबकि उन्हें इसकी कीमत करीब 80 रुपये ही मिल रही है. यानी हर लीटर दूध पर लगभग 20 रुपये का नुकसान हो रहा है. बढ़ते घाटे से परेशान पशुपालक अब सरकार से सूखा प्रभावित किसानों की तरह आर्थिक मदद देने की मांग कर रहे हैं.

8 रुपये से 14 रुपये किलो पहुंचा पशु चारा

नंदुरबार जिले में सूखे का सीधा असर पशुओं के चारे की कीमत पर दिखाई दे रहा है. पशुपालकों के मुताबिक पहले जो चारा करीब 8 रुपये प्रति किलो मिल रहा था, उसकी कीमत अब 14 रुपये प्रति किलो हो गई है.सिर्फ चारा ही नहीं, मक्का और दूसरे पशु आहार भी महंगे हुए हैं. पशुपालकों के अनुसार मक्का की कीमत 1,500 रुपये से बढ़कर 1,900 रुपये हो गई है. इससे पशुओं को पालने पर होने वाला रोजाना खर्च बढ़ता जा रहा है. 

डेयरी किसानों का दावा है कि पशु चारा और दूसरे खर्च बढ़ने के कारण अब एक लीटर दूध तैयार करने की लागत करीब 100 रुपये तक पहुंच गई है. इसके मुकाबले दूध की बिक्री लगभग 80 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से हो रही है. किसानों के इस हिसाब को मानें तो उन्हें हर एक लीटर दूध पर करीब 20 रुपये का नुकसान हो रहा है.

ऐसे में जितना ज्यादा दूध उत्पादन हो रहा है, किसानों पर आर्थिक बोझ भी उतना ही बढ़ रहा है.

पशुओं को पालना हो रहा मुश्किल

पशुपालकों का कहना है कि लगातार महंगा होता चारा उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया है. दूध से मिलने वाली रकम और पशुओं के रखरखाव पर हो रहे खर्च के बीच का अंतर बढ़ता जा रहा है. इससे उनके लिए पशुओं को पालने के साथ डेयरी व्यवसाय जारी रखना भी मुश्किल होता जा रहा है.सूखे के चलते पहले से मुश्किलों का सामना कर रहे ग्रामीण इलाकों में पशुपालकों के सामने अब अपने मवेशियों के लिए पर्याप्त चारे और आहार की व्यवस्था करने की चिंता भी बढ़ गई है. बढ़ती लागत और दूध पर हो रहे नुकसान को देखते हुए पशुपालकों ने सरकार से मदद की मांग की है. उनका कहना है कि जिस तरह सूखे से प्रभावित किसानों को राहत दी जाती है, उसी तरह डेयरी किसानों और पशुपालकों को भी आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए.पशुपालकों का कहना है कि अगर चारा और पशु आहार इसी तरह महंगे होते रहे और दूध से पर्याप्त कीमत नहीं मिली तो डेयरी व्यवसाय को चलाना मुश्किल हो जाएगा. ऐसे में वे चाहते हैं कि सरकार बढ़ती लागत और सूखे की दोहरी मार को देखते हुए उनके लिए भी राहत के उपाय करे.
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