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BMC Election Result 2026: मुंबई समेत महाराष्ट्र के सभी 29 नगर निगमों के नतीजों की संपूर्ण जानकारी

महाराष्ट्र में 29 महानगरपालिकाओं के नतीजे आ गए हैं. बीजेपी गठबंधन ने 25 में बहुमत हासिल किया है. जानिए चुनाव नतीजों से जुड़े सवालों के जवाब...

BMC Election Result 2026: मुंबई समेत महाराष्ट्र के सभी 29 नगर निगमों के नतीजों की संपूर्ण जानकारी
  • महाराष्ट्र की 29 महानगर पालिकाओं के चुनाव में बीजेपी के अगुआई वाले महायुति ने 25 पर जीत हासिल की है
  • BMC में बीजेपी-शिंदे के गठबंधन ने प्रचंड जीत दर्ज कर बहुमत के आंकड़े को पार कर लिया है
  • कभी संघ के गढ़ जिस नागपुर में कांग्रेस का दबदबा रहता था, वहां BJP की प्रचंड लहर
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मुंबई:

महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव में टीम बीजेपी (BJP) की सूनामी में सब उड़ गए. मुंबई BMC समेत 25 महानगरपालिकाओं में बीजेपी की अगुआई वाले महायुति ने जीत हासिल की है. इसमें संघ, सीएम देवेंद्र फडणवीस और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का 'घर' नागपुर भी है. जिस मुंबई पर सबकी नजरें लगी हुई थीं, वहां बीजेपी-शिंदे की जोड़ी ने प्रचंड बहुमत हासिल किया है. महाराष्ट्र में किसे क्या मिला है, जानिए हर सवाल का जवाब...

महाराष्ट्र महानगर पालिका 2026 चुनाव के नतीजे

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BMC के चुनाव नतीजों का फाइनल निचोड़

  • टीम BJP को 118 सीटें: ठाकरे परिवार के गढ़ में सेंध लगाते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के गठबंधन ने बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) चुनावों में 227 में से 118 सीट जीतकर शुक्रवार को बहुमत हासिल कर लिया.
  • BJP बिग ब्रदर: BJP के 89 सीट जीतने और शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को 29 सीट मिलने के साथ ही गठबंधन ने देश के सबसे अमीर नगर निकाय पर नियंत्रण पाने के लिए आवश्यक 114 सीट का आंकड़ा पार कर लिया.
  • ठाकरे राज खत्म: शिवसेना (UBT),महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) गठबंधन 72 सीट जीतने में कामयाब रहा. अविभाजित शिवसेना ने 1997 से 25 वर्षों तक नगर निकाय पर शासन किया था.
  • उद्धव ने खेली अच्छी पारी: उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) ने 65 सीट जीतीं जबकि राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने छह सीट जीतीं और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) को केवल एक सीट मिली.
  • कांग्रेस को 24 सीटें: अन्य दलों में, कांग्रेस ने 24 सीटें, एआईएमआईएम ने आठ, अजित पवार के नेतृत्व वाली राकांपा ने तीन और समाजवादी पार्टी ने दो सीटें जीतीं. नौ साल के अंतराल के बाद हुए इन बहुचर्चित चुनावों में दो निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी जीत हासिल की. 
  • चार पूर्व महापौर जीते: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव में पूर्व महापौर किशोरी पेडनेकर, श्रद्धा जाधव, विशाखा राउत और मिलिंद वैद्य के साथ-साथ तीन पूर्व उपमहापौर भी विजयी हुए. वार्ड 192 से पेडनेकर, वार्ड 202 से जाधव, वार्ड 191 से राउत और वार्ड 182 से वैद्य ने जीत हासिल की।.​​ये चारों उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उबाठा) से हैं. वार्ड 41 से पूर्व उपमहापौर सुहास वाडकर, वार्ड 193 से हेमांगी वारलिकर और वार्ड 98 से अलका केरकर की जीत हुई. वाडकर और वारलिकर शिवसेना (उबाठा) से हैं, जबकि केरकर भाजपा से हैं. 
  • पूर्व महापौर और कांग्रेस नेता चंद्रकांत हंडोरे की बेटी प्रज्योति हंडोरे चेंबूर-गोवंडी क्षेत्र के वार्ड 140 से चुनाव हार गईं. हालांकि, शिवसेना (उबाठा) विधायक और पूर्व महापौर सुनील प्रभु के बेटे अंकित प्रभु ने गोरेगांव पूर्व के वार्ड 54 से जीत हासिल की. पूर्व महापौर विश्वनाथ महादेश्वर की पत्नी पूजा महादेश्वर ने सांताक्रूज पूर्व के वार्ड 87 से जीत दर्ज की

पूर्व गैंगस्टर अरुण गावली की दोनों बेटियां हारीं

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सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद अरुण गावली नागपुर केंद्रीय जेल से रिहा हुए थे. 

पूर्व गैंगस्टर और पूर्व विधायक अरुण गावली की दोनों बेटियां बीएमसी चुनाव हार गईं. गीता गावली और योगिता ने अरुण गावली की अखिल भारतीय सेना (एबीएचएस) के टिकट पर मुंबई के बायकुला क्षेत्र से चुनाव लड़ा था. बीएमसी की तीन बार पार्षद रह चुकीं गीता वार्ड संख्या 212 से चुनाव हार गईं, जबकि उनकी बहन योगिता वार्ड संख्या 207 से हारीं. गीता समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार अमरीन शहजाद अब्राहनी से हारीं. पहली बार चुनाव लड़ रही योगिता भाजपा उम्मीदवार रोहिदास लोखंडे से पराजित हुईं.

सबसे रोचक: कल्याण-डोंबिवली में शिंदे ने BJP को पछाड़ा

कल्याण-डोंबिवली में BJP पर भारी पड़े शिंदे

कल्याण-डोंबिवली में BJP पर भारी पड़े शिंदे

कल्याण-डोम्बिवली महानगरपालिका (केडीएमसी) के चुनावों में शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली, जिसमें शिवसेना ने महायुति के अपने सहयोगी दल को एक सीट से हरा दिया. एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने 122 सदस्यीय महानगरपालिका में 52 सीट जीतीं, जबकि भाजपा 51 सीट के साथ दूसरे स्थान पर रही. केडीएमसी के चुनाव विभाग के आंकड़ों के अनुसार शिवसेना (उबाठा) 11 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर रही, जबकि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को पांच सीटें, कांग्रेस को दो सीट और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) को एक सीट मिली. किसी भी एक पार्टी के अकेले दम पर स्पष्ट बहुमत का आंकड़ा पार करने में सफल न होने के कारण ये परिणाम आने वाले दिनों में गहन बातचीत और रणनीतिक चर्चाओं की संभावना को दर्शाते हैं.

ठाणे में शून्य पर आउट हुई कांग्रेस

नवी मुंबई, ठाणे और नाशिक के नतीजे

नवी मुंबई, ठाणे और नाशिक के नतीजे

मुंबई से सटे ठाणे में कांग्रेस शून्य पर आउट हो गई, जिसके बाद जिलाध्यक्ष ने इस्तीफा दे दिया. ठाणे महानगरपालिका में कांग्रेस की हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए ठाणे शहर के कांग्रेस अध्यक्ष विक्रांत चव्हाण ने अपने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने महाराष्ट्र कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल को अपना इस्तीफा भेजा. छत्रपति संभाजीनगर में 115 सदस्यीय नगर निकाय में भाजपा 58 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. एआईएमआईएम 33 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही. एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने 12 सीटें जीतीं, जबकि शिवसेना (यूबीटी) और बहुजन विकास अघाड़ी ने छह और चार सीटें हासिल कीं. नवी मुंबई में भाजपा ने 111 सदस्यीय नगर निगम में 66 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया. शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना 42 सीटों के साथ मुख्य विपक्षी दल बनकर उभरी. शिवसेना (यूबीटी) ने दो सीटें और एमएनएस ने एक सीट जीती. वसई-विरार में बहुजन विकास अघाड़ी ने 115 सीटों में से 71 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की. भाजपा ने शेष 44 सीटें जीतीं.

ओवैसी की AIMIM  ने 114 सीटें जीतीं

ओवैसी का ग्राफ बढ़ा

ओवैसी का ग्राफ बढ़ा

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने राज्य भर के नगर निकायों में कुल 114 सीटों पर जीत हासिल की है. एआईएमआईएम ने छत्रपति संभाजीनगर में 33 सीटें, मालेगांव में 21, अमरावती में 15, नांदेड़ में 13, धुले में 10, सोलापुर में 8, मुंबई में 6, ठाणे में 5, जलगांव में 2 और चंद्रपुर में 1 सीट जीती. पिछले नगर निकाय चुनावों में पार्टी ने 80 सीटें जीती थीं.

कांग्रेस-सपा के लिए खतरा बने ओवैसी

  • महाराष्ट्र में असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने 2026 के नगर निगम चुनावों में जबरदस्त प्रदर्शन किया. पार्टी ने राज्य की 13 नगरपालिकाओं में शानदार प्रदर्शन किया. यह महाराष्ट्र की स्थानीय स्वशासी संस्थाओं में एआईएमआईएम की अब तक की सबसे मजबूत उपस्थिति है. 
  • असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने महाराष्ट्र में नगर निगम चुनावों में मजबूत जीत हासिल करके समाजवादी पार्टी (सपा) और अन्य दलों के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. 
  • पार्टी की कोशिश है कि 2029 के विधानसभा चुनाव से पहले पूरे राज्य में अपनी मौजूदगी और बढ़ाए. इस जीत के बाद कांग्रेस को भी मुसलमानों और अल्पसंख्यकों के बीच तेजी से घटती लोकप्रियता को सुधारने के लिए प्रयास तेज करने होंगे, क्योंकि एआईएमआईएम ने इन वर्गों में अपना आधार मजबूत कर लिया है. 
  • एआईएमआईएम ने अपने पारंपरिक गढ़ों से बाहर भी अपनी पकड़ मजबूत की है और कई अहम क्षेत्रों में राजनीतिक दलों को चुनौती दी है. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, एआईएमआईएम ने खासकर मराठवाड़ा और पश्चिमी महाराष्ट्र में अपने वोट शेयर को मजबूत किया है. 
  • छत्रपति संभाजीनगर एआईएमआईएम का मजबूत गढ़ माना जाता है और यहां उसने सबसे ज्यादा पार्षदों को जीत दिलाई.
  • एआईएमआईएम ने बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) और ठाणे नगर निगम (टीएमसी) में भी अपनी पकड़ बनाई है. 
  • एआईएमआईएम ने खासतौर पर उन इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत की है जो अल्पसंख्यक बहुल हैं. एआईएमआईएम ने पारंपरिक कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार) के उम्मीदवारों को पीछे छोड़ा.

चंद्रपुर में कांग्रेस ने BJP को दिया बड़ा झटका

अकोला, चंद्रपुर और परभणी महानगर पालिकाओं के नतीजे.

अकोला, चंद्रपुर और परभणी महानगर पालिकाओं के नतीजे.

कांग्रेस ने चंद्रपुर में भाजपा को झटका देते हुए सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है और उसे कुल 66 में से 30 सीट पर जीत मिली है. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खाते में 23, शिवसेना (UBT) ने छह और जन विकास सेना को तीन, वंचित बहुजन आघाडी (वीबीए) को दो और निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में दो सीट गई हैं. एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना,ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन( एआईएमआईएम) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को एक-एक सीट मिली है. चंद्रपुर में 2017 के चुनावों में भाजपा को 66 सीट में से 36 पर जीत मिली थी और सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय वडेट्टीवार ने चंद्रपुर में कहा कि पार्टी महानगपालिका की सत्ता में आएगी और 40 से अधिक पार्षदों के समर्थन से अपना महापौर नियुक्त करेगी. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पार्षदों के अलावा जनविकास सेना के तीन पार्षदों ने भी पार्टी को समर्थन दिया है. वडेट्टीवार ने दावा किया कि टिकट न मिलने के बावजूद चुनाव लड़ने वाले दो निर्दलीय पार्षद भी कांग्रेस का समर्थन कर रहे हैं.

परभणी में उद्धव का करिश्मा, NCP-कांग्रेस का वर्चस्व खत्म

महाराष्ट्र की परभणी और लातूर महानगर पालिका के नतीजे

महाराष्ट्र की परभणी और लातूर महानगर पालिका के नतीजे

भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन ने कई नगर निगमों में शानदार जीत दर्ज की है, लेकिन पिछड़े मराठवाड़ा क्षेत्र का परभणी जिला इस रुझान से अलग एक बड़ा अपवाद बनकर सामने आया.  सत्तारूढ़ गठबंधन को बड़ा झटका देते हुए उद्धव ठाकरे की शिवसेना परभणी में भाजपा की रफ्तार रोकने में कामयाब रही. यह जीत शिवसेना (यूबीटी) के लिए ऐतिहासिक मानी जा रही है. परभणी नगर निगम (पीएमसी) में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने शानदार जीत दर्ज की है. यह पहली बार है जब उद्धव ठाकरे की पार्टी सीधे तौर पर परभणी नगर निगम की सत्ता संभालेगी. इस जीत के साथ ही एनसीपी और कांग्रेस का लगभग दो दशक पुराना वर्चस्व खत्म हो गया है. शिवसेना (यूबीटी) को 25 सीटें मिलीं, कांग्रेस को 12, भाजपा को 12, एनसीपी (अजित पवार) को 11, जन सुराज पार्टी को 3, यशवंत सेना को 1 और एक सीट निर्दलीय के खाते में गई. शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस अन्य दलों के समर्थन से मेयर पद पर दावा पेश करने की तैयारी में है. परभणी में आखिरी बार शिवसेना के पास 2007 में मेयर पद था, जब यह नगर परिषद थी. 2011 में नगर निगम बनने के बाद से यहां सत्ता एनसीपी और बाद में कांग्रेस के पास रही. 19 साल बाद शिवसेना (यूबीटी) की यह वापसी बेहद अहम मानी जा रही है.

लातूर में देशमुख पर वार BJP को भारी पड़ गया

लातूर में कायम विलासराव देशमुख की सियासी विरासत

लातूर में कायम विलासराव देशमुख की सियासी विरासत

लातूर महानगरपालिका में शुक्रवार को कांग्रेस की स्पष्ट जीत ने यह दर्शाया कि पार्टी के दिवंगत नेता विलासराव देशमुख की विरासत की जड़ें मध्य महाराष्ट्र के इस शहर में आज भी मजबूत हैं और चुनाव प्रचार के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश इकाई के प्रमुख की विवादास्पद टिप्पणी उलटी पड़ गई. भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि देशमुख की यादों को उनके गृह नगर लातूर से ‘मिटा दिया जाएगा'. मराठवाड़ा क्षेत्र के लोकप्रिय नेता और दो बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे देशमुख का 2012 में निधन हो गया था. लातूर महानगरपालिका की 70 में से 43 सीट कांग्रेस ने हासिल कीं, जबकि भाजपा को 22, वंचित बहुजन आघाडी को चार और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) को एक सीट पर जीत मिली. यहां 2017 के पिछले चुनावों में भाजपा ने 36 सीट जीती थीं, जबकि कांग्रेस 33 सीट के साथ दूसरे स्थान पर रही थी. राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना ​​है कि चव्हाण की टिप्पणियों ने कांग्रेस के पक्ष में वोटों को एकजुट किया. राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि उनकी टिप्पणी पर हुई तीव्र प्रतिक्रियाओं से पता चलता है कि मराठवाड़ा में विलासराव देशमुख की स्मृति से कितना भावनात्मक जुड़ाव है.

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
महाराष्ट्र की 29 महानगर पालिकाओं के कुल 2869 वॉर्डों में बीजेपी 1338 जीत रही है. शिवसेना 365, कांग्रेस 283, उद्धव शिवसेना 161, एनसीपी अजित पवार 140, AIMIM 94 पर आगे चल रही है.
नागपुर में बीजेपी ने अपनी पकड़ और मजबूत की है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का गढ़ नागपुर एक समय में कांग्रेस का मजबूत किला हुआ करता था, लेकिन धीरे-धीरे यह भगवामय हो गया. इस चुनाव में बीजेपी ने नागपुर में प्रचंड जीत हासिल की है. 151 प्रभाग वाले नागपुर में बीजेपी अकेले 103 सीटें जीत चुकी है.
अविभाजित शिवसेना के लगभग तीन दशक के वर्चस्व को तोड़ते हुए, भाजपा बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनावों में शुक्रवार को सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी और पुणे में भी विजयी रही. भाजपा नीत गठबंधन को बीएमसी की 227 सीटों में से लगभग 125 सीटें मिलने की संभावना है. देश के सबसे धनी नगर निकाय बीएमसी का 2025-26 का बजट 74,427 करोड़ रुपये है. मुंबई और 28 अन्य नगर निकायों के चुनावों के लिए हुए मतदान के एक दिन बाद मतगणना शुक्रवार को हुई. इन चुनावों में 54.77 प्रतिशत मतदान हुआ था. बीएमसी की सत्ता के लिए हुए इस मुकाबले में ठाकरे बंधु (उद्धव और राज ठाकरे) दो दशकों बाद फिर से एकजुट हुए, लेकिन अब तक घोषित परिणामों से संकेत मिलता है कि उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है. पुणे और पड़ोसी पिंपरी-चिंचवड नगर निकाय चुनावों में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और राकांपा (शरदचंद्र पवार) गठबंधन को पछाड़ते हुए भाजपा भारी जीत की ओर अग्रसर है.
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार को राजनीतिक दृष्टि से एक बड़ा झटका लगा है. पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ नगर निगम चुनावों में एनसीपी के उनके गुट को करारी हार का सामना करना पड़ा है. इस हार ने न केवल भाजपा को उनके गृह क्षेत्र में चुनौती देने की उनकी रणनीति को ध्वस्त कर दिया है, बल्कि महायुति गठबंधन में दबी हुई भूमिका निभाने के अलावा उनके पास कोई विकल्प भी नहीं बचा है. अजित पवार ने एनसीपी के भीतर अपने विद्रोह के बाद से भाजपा के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखे थे, खासकर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और भाजपा के बीच लगातार होने वाले टकरावों की तुलना में. हालांकि, जब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घोषणा की कि भाजपा पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ेगी तो पवार ने अपनी रणनीति बदल दी. एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए उन्होंने शरद पवार के एनसीपी गुट के साथ स्थानीय गठबंधन किया। राज्य स्तर पर भाजपा का सहयोगी होने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर उनके प्रतिद्वंद्वियों के साथ गठबंधन करने की यह "दोहरी रणनीति" पूरी तरह से विफल रही.
महाराष्ट्र की 29 महानगर पालिकाओं के चुनावों से पहले 10 नगर निकायों के कुल 65 उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया. निर्विरोध चुने गए उम्मीदवारों की सूची में बीजेपी 43 सीटों के साथ शीर्ष पर है. उसके बाद, उसकी सहयोगी एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना (18 उम्मीदवार), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (2) का स्थान है. ठाणे जिले के कल्याण-डोम्बिवली से सबसे अधिक 20 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए, जिनमें बीजेपी के 16 और शिवसेना के छह उम्मीदवार शामिल हैं. पिंपरी चिंचवाड़ और पुणे में बीजेपी के दो-दो उम्मीदवार बिना चुनाव लड़े ही विजेता घोषित किए गए और ठाणे जिले के भिवंडी निज़ामपुर में छह उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए. पनवेल में सात उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए, जिनमें भाजपा के छह और एक निर्दलीय उम्मीदवार शामिल है. जलगांव में 12 उम्मीदवार बिना चुनाव लड़े ही निर्वाचित हुए, जिनमें शिवसेना और भाजपा के छह-छह उम्मीदवार शामिल हैं. धुले में निर्विरोध चुने गए चारों उम्मीदवार भाजपा से हैं. वहीं, ठाणे में सभी छह पार्षद शिवसेना के हैं। अहिल्यानगर में भाजपा के तीन और राकांपा के दो उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए.
अजित पवार की एनसीपी को नागपुर नगर निगम में अपना पहला पार्षद मिला है. पार्टी की उम्मीदवार आभा पांडे निर्वाचित हुईं हैं. वहीं नागपुर में कांग्रेस के अल्पसंख्यक वोटों को एकजुट करने में विफल रहने के कारण इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग और एआईएमआईएम ने अपनी पकड़ मजबूत की है. मिशन-100 अभियान के बावजूद कांग्रेस खुद को 2017 जैसी ही स्थिति में पा रही है. 2017 में उसने 30 सीटें जीती थीं. आठ साल बाद, आज वह 28 सीटों पर आगे है.
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को कहा कि राज्य में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) सहित 29 महानगरपालिकाओं के चुनावों में लोगों ने भाजपा नीत ‘महायुति’ को वोट दिया, क्योंकि वे ईमानदारी और विकास चाहते हैं. फडणवीस ने कहा, ‘‘भाजपा ने विकास का एजेंडा पेश किया. हमने इसे जनता के सामने रखा और उन्होंने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी. हमें कई महानगरपालिकाओं में रिकॉर्ड तोड़ जनादेश मिला है और यह इस बात को रेखांकित करता है कि लोग ईमानदारी और विकास चाहते हैं. इसीलिए लोगों ने भाजपा को वोट दिया.’’ उन्होंने कहा कि ‘महायुति’ ने महानगरपालिका चुनावों में सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं.

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