- महाराष्ट्र की 29 महानगर पालिकाओं के चुनाव में बीजेपी के अगुआई वाले महायुति ने 25 पर जीत हासिल की है
- BMC में बीजेपी-शिंदे के गठबंधन ने प्रचंड जीत दर्ज कर बहुमत के आंकड़े को पार कर लिया है
- कभी संघ के गढ़ जिस नागपुर में कांग्रेस का दबदबा रहता था, वहां BJP की प्रचंड लहर
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मुंबई:
महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव में टीम बीजेपी (BJP) की सूनामी में सब उड़ गए. मुंबई BMC समेत 25 महानगरपालिकाओं में बीजेपी की अगुआई वाले महायुति ने जीत हासिल की है. इसमें संघ, सीएम देवेंद्र फडणवीस और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का 'घर' नागपुर भी है. जिस मुंबई पर सबकी नजरें लगी हुई थीं, वहां बीजेपी-शिंदे की जोड़ी ने प्रचंड बहुमत हासिल किया है. महाराष्ट्र में किसे क्या मिला है, जानिए हर सवाल का जवाब...
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
महाराष्ट्र की 29 महानगर पालिकाओं के कुल 2869 वॉर्डों में बीजेपी 1338 जीत रही है. शिवसेना 365, कांग्रेस 283, उद्धव शिवसेना 161, एनसीपी अजित पवार 140, AIMIM 94 पर आगे चल रही है.
नागपुर में बीजेपी ने अपनी पकड़ और मजबूत की है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का गढ़ नागपुर एक समय में कांग्रेस का मजबूत किला हुआ करता था, लेकिन धीरे-धीरे यह भगवामय हो गया. इस चुनाव में बीजेपी ने नागपुर में प्रचंड जीत हासिल की है. 151 प्रभाग वाले नागपुर में बीजेपी अकेले 103 सीटें जीत चुकी है.
अविभाजित शिवसेना के लगभग तीन दशक के वर्चस्व को तोड़ते हुए, भाजपा बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनावों में शुक्रवार को सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी और पुणे में भी विजयी रही. भाजपा नीत गठबंधन को बीएमसी की 227 सीटों में से लगभग 125 सीटें मिलने की संभावना है. देश के सबसे धनी नगर निकाय बीएमसी का 2025-26 का बजट 74,427 करोड़ रुपये है. मुंबई और 28 अन्य नगर निकायों के चुनावों के लिए हुए मतदान के एक दिन बाद मतगणना शुक्रवार को हुई. इन चुनावों में 54.77 प्रतिशत मतदान हुआ था. बीएमसी की सत्ता के लिए हुए इस मुकाबले में ठाकरे बंधु (उद्धव और राज ठाकरे) दो दशकों बाद फिर से एकजुट हुए, लेकिन अब तक घोषित परिणामों से संकेत मिलता है कि उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है. पुणे और पड़ोसी पिंपरी-चिंचवड नगर निकाय चुनावों में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और राकांपा (शरदचंद्र पवार) गठबंधन को पछाड़ते हुए भाजपा भारी जीत की ओर अग्रसर है.
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार को राजनीतिक दृष्टि से एक बड़ा झटका लगा है. पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ नगर निगम चुनावों में एनसीपी के उनके गुट को करारी हार का सामना करना पड़ा है. इस हार ने न केवल भाजपा को उनके गृह क्षेत्र में चुनौती देने की उनकी रणनीति को ध्वस्त कर दिया है, बल्कि महायुति गठबंधन में दबी हुई भूमिका निभाने के अलावा उनके पास कोई विकल्प भी नहीं बचा है. अजित पवार ने एनसीपी के भीतर अपने विद्रोह के बाद से भाजपा के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखे थे, खासकर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और भाजपा के बीच लगातार होने वाले टकरावों की तुलना में. हालांकि, जब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घोषणा की कि भाजपा पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ेगी तो पवार ने अपनी रणनीति बदल दी. एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए उन्होंने शरद पवार के एनसीपी गुट के साथ स्थानीय गठबंधन किया। राज्य स्तर पर भाजपा का सहयोगी होने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर उनके प्रतिद्वंद्वियों के साथ गठबंधन करने की यह "दोहरी रणनीति" पूरी तरह से विफल रही.
महाराष्ट्र की 29 महानगर पालिकाओं के चुनावों से पहले 10 नगर निकायों के कुल 65 उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया. निर्विरोध चुने गए उम्मीदवारों की सूची में बीजेपी 43 सीटों के साथ शीर्ष पर है. उसके बाद, उसकी सहयोगी एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना (18 उम्मीदवार), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (2) का स्थान है. ठाणे जिले के कल्याण-डोम्बिवली से सबसे अधिक 20 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए, जिनमें बीजेपी के 16 और शिवसेना के छह उम्मीदवार शामिल हैं.
पिंपरी चिंचवाड़ और पुणे में बीजेपी के दो-दो उम्मीदवार बिना चुनाव लड़े ही विजेता घोषित किए गए और ठाणे जिले के भिवंडी निज़ामपुर में छह उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए. पनवेल में सात उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए, जिनमें भाजपा के छह और एक निर्दलीय उम्मीदवार शामिल है. जलगांव में 12 उम्मीदवार बिना चुनाव लड़े ही निर्वाचित हुए, जिनमें शिवसेना और भाजपा के छह-छह उम्मीदवार शामिल हैं.
धुले में निर्विरोध चुने गए चारों उम्मीदवार भाजपा से हैं. वहीं, ठाणे में सभी छह पार्षद शिवसेना के हैं। अहिल्यानगर में भाजपा के तीन और राकांपा के दो उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए.
अजित पवार की एनसीपी को नागपुर नगर निगम में अपना पहला पार्षद मिला है. पार्टी की उम्मीदवार आभा पांडे निर्वाचित हुईं हैं. वहीं नागपुर में कांग्रेस के अल्पसंख्यक वोटों को एकजुट करने में विफल रहने के कारण इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग और एआईएमआईएम ने अपनी पकड़ मजबूत की है. मिशन-100 अभियान के बावजूद कांग्रेस खुद को 2017 जैसी ही स्थिति में पा रही है. 2017 में उसने 30 सीटें जीती थीं. आठ साल बाद, आज वह 28 सीटों पर आगे है.
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को कहा कि राज्य में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) सहित 29 महानगरपालिकाओं के चुनावों में लोगों ने भाजपा नीत ‘महायुति’ को वोट दिया, क्योंकि वे ईमानदारी और विकास चाहते हैं.
फडणवीस ने कहा, ‘‘भाजपा ने विकास का एजेंडा पेश किया. हमने इसे जनता के सामने रखा और उन्होंने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी. हमें कई महानगरपालिकाओं में रिकॉर्ड तोड़ जनादेश मिला है और यह इस बात को रेखांकित करता है कि लोग ईमानदारी और विकास चाहते हैं. इसीलिए लोगों ने भाजपा को वोट दिया.’’ उन्होंने कहा कि ‘महायुति’ ने महानगरपालिका चुनावों में सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं.
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