दुनिया में हर पल, हर समय कहीं न कहीं किसी हिस्से में भूकंप के झटके आते रहते हैं. हाल ही में भूटान और फिलीपींस में भूकंप के झटके महसूस किए गए. भूटान में 5.6 रिक्टर स्केल का भूकंप आया, तो वहीं फिलीपींस में 7.8 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया. इसके अलावा देश में हिमाचल प्रदेश और लद्दाख में भी पिछले दो दिनों में भूकंप के झटके महसूस किए गए. भारत की बात करें तो पिछले 6 महीनों में 634 से ज्यादा भूकंप के झटके दर्ज किए गए हैं. इनमें सबसे ज्यादा भूकंप नॉर्थ ईस्ट और नॉर्थ रीजन में आए हैं. इन दोनों क्षेत्रों में कुल 478 भूकंप के झटके महसूस किए गए.
नॉर्थ ईस्ट क्षेत्रों में सबसे ज्यादा भूकंप आए
भारत में सबसे ज्यादा भूकंप हिमालय क्षेत्र में आते हैं. कई रिकॉर्ड इस बात को बताते हैं कि भूकंप की दृष्टि से हिमालय सबसे संवेदनशील क्षेत्र है. इसकी मुख्य वजह भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट का करोड़ों वर्षों से जारी टकराव है. आंकड़ों के मुताबिक भारतीय प्लेट हर साल करीब 5 सेंटीमीटर उत्तर की ओर बढ़ते हुए यूरेशियन प्लेट के नीचे धंस रही है, और इन दोनों प्लेटों का टकराव मुख्य रूप से हिमालय क्षेत्र में होता है. पिछले 6 महीनों के आंकड़ों का विश्लेषण भी बताता है कि नॉर्थ और नॉर्थ ईस्ट क्षेत्रों में सबसे ज्यादा भूकंप आए हैं.
कब कहां कितने भूकंप आए?
- दिसंबर 2025 में देश में कुल 72 भूकंप दर्ज किए गए, जिसमें 9 असम, 8 अरुणाचल प्रदेश, 7 गुजरात और लद्दाख, 5 महाराष्ट्र, 4 अंडमान और बंगाल की खाड़ी में भूकंप दर्ज किए गए. क्षेत्रवार बात करें तो नॉर्थ में 15, नॉर्थ ईस्ट में 15, साउथ में 5, वेस्ट में 13 और सेंट्रल में 4 भूकंप आए.
- जनवरी 2026 में कुल 64 भूकंप आए, जिसमें 9 असम, 6-6 गुजरात, लद्दाख और मणिपुर, 4 अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल में 5, जम्मू-कश्मीर में 1, मेघालय में 2, नागालैंड में 1, सिक्किम में 2, त्रिपुरा में 1 और उत्तराखंड में 2 भूकंप दर्ज किए गए. क्षेत्रवार नॉर्थ में 18, नॉर्थ ईस्ट में 25, साउथ में 7, वेस्ट में 11 और ईस्ट में 2 भूकंप आए.
- फरवरी 2026 में कुल 136 भूकंप दर्ज किए गए, जिसमें 74 अकेले सिक्किम में आए. इसके अलावा असम में 9, अरुणाचल प्रदेश में 7, कर्नाटक में 8, लद्दाख में 3, मणिपुर में 6, मेघालय में 5, मिजोरम में 1 और त्रिपुरा में 1 भूकंप आया. क्षेत्रवार नॉर्थ में 9, नॉर्थ ईस्ट में 103, साउथ में 12, वेस्ट में 8, सेंट्रल में 1 और ईस्ट में 2 भूकंप आए.
- मार्च 2026 में कुल 112 भूकंप दर्ज किए गए. इनमें 14 असम, 13 अरुणाचल प्रदेश, 11 लद्दाख, 20 सिक्किम, 2 उत्तराखंड, 9 हिमाचल, 2 जम्मू-कश्मीर, 7 मणिपुर, 4 मेघालय, 3 मिजोरम, 4 नागालैंड और 2 त्रिपुरा में आए. क्षेत्रवार नॉर्थ में 28, नॉर्थ ईस्ट में 67, साउथ में 1, वेस्ट में 10, सेंट्रल में 2 और ईस्ट में 2 भूकंप आए.
- अप्रैल 2026 में कुल 134 भूकंप दर्ज किए गए, जिसमें 16 असम, 15 लद्दाख, 14 महाराष्ट्र, 17 सिक्किम, 11 मणिपुर, 12 अरुणाचल और 13 उत्तराखंड में भूकंप दर्ज हुए. क्षेत्रवार 40 नॉर्थ, 63 नॉर्थ ईस्ट, 23 वेस्ट, 2 साउथ, 2 सेंट्रल और 4 ईस्ट में भूकंप आए.
- मई 2026 में कुल 125 भूकंप दर्ज किए गए, जिसमें 25 असम, 19 महाराष्ट्र, 17 अरुणाचल प्रदेश, 11 मणिपुर, 5 उत्तराखंड, 8 नागालैंड और 6 मध्य प्रदेश में भूकंप आए. क्षेत्रवार 14 नॉर्थ, 69 नॉर्थ ईस्ट, 23 वेस्ट, 4 साउथ और सेंट्रल में 2 भूकंप आए.
यहां कभी भी बड़ा भूकंप आ सकता है!
यह आंकड़े साफ बताते हैं कि हिमालय क्षेत्र में भूकंप का खतरा लगातार बना हुआ है. वैज्ञानिकों ने लंबे समय से इस क्षेत्र पर रिसर्च की है. खासतौर पर उत्तराखंड क्षेत्र, जहां पिछले 500 सालों में कोई बड़ा भूकंप नहीं आया, उसे ‘सेंट्रल सीस्मिक गैप' कहा जाता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि यहां कभी भी बड़ा भूकंप आ सकता है. उत्तराखंड का अधिकांश हिस्सा भूकंप के जोन-4 और जोन-5 में आता है.
हिमालय में कब-कब आया बड़ा भूकंप?
हिमालय में भूकंप का इतिहास भी काफी भयावह रहा है. 1905 में कांगड़ा में 7.8 तीव्रता, 1934 में बिहार-नेपाल सीमा पर 8.2 तीव्रता और 1950 में असम में 8.6 तीव्रता का भूकंप आया था. 2015 में नेपाल में 7.8 तीव्रता का भूकंप आया. कांगड़ा से लेकर नेपाल के बीच जो सेंट्रल सीस्मिक गैप बताया जाता है, वह उत्तराखंड क्षेत्र ही है. हालांकि 1991 का उत्तरकाशी और 1999 का चमोली भूकंप आया, लेकिन ये इतने बड़े नहीं थे कि जमीन के भीतर जमा ऊर्जा को पूरी तरह बाहर निकाल सकें.
क्या कहते हैं वाडिया इंस्टीट्यूट के एक्सपर्ट?
वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के निदेशक विनीत कुमार गहलोत के अनुसार पूरा हिमालय क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है. उनका कहना है कि पिछले 50 मिलियन वर्षों से भारतीय प्लेट यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है, जिसकी वजह से लगातार भूकंप आ रहे हैं और भविष्य में भी आते रहेंगे. उन्होंने बताया कि नॉर्थ और नॉर्थ ईस्ट क्षेत्र में ज्यादा भूकंप आने का कारण यही प्लेटों का टकराव है. साथ ही उन्होंने कहा कि लगातार छोटे भूकंप इस बात का संकेत नहीं हैं कि बड़ा भूकंप नहीं आएगा, बल्कि यह इस बात की संभावना को दर्शाते हैं कि भविष्य में बड़ा भूकंप आ सकता है.
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