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क्या है जम्मू-कश्मीर की 150 साल पुरानी परंपरा 'दरबार मूव'? चार साल बाद फिर लौटी, नेशनल कॉन्फ्रेंस का चुनावी वादा भी था

Darbar Move News: उमर अब्दुल्ला सरकार के लिये दरबार मूव की वापसी एक बड़ा फैसला है.यह नेशनल कांफ्रेंस का चुनावी वादा था. सरकार ने इसे पिछले साल फिर शुरू किया.उमर अब्दुल्ला सरकार ने यह निर्णय लिया था.

क्या है जम्मू-कश्मीर की 150 साल पुरानी परंपरा 'दरबार मूव'? चार साल बाद फिर लौटी, नेशनल कॉन्फ्रेंस का चुनावी वादा भी था
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  • श्रीनगर में चार साल बाद दरबार मूव की परंपरा फिर से शुरू हो गई है, जिससे प्रशासनिक कामकाज सक्रिय हुआ
  • मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में सरकारी कार्यालय सोमवार से श्रीनगर में कामकाज फिर से शुरू कर दिए गए
  • दरबार मूव की परंपरा 150 साल पुरानी है, जो जम्मू और श्रीनगर के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए शुरू की गई थी
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श्रीनगर:

श्रीनगर में एक बार फिर दरबार मूव शुरू हो गया है.चार साल के लंबे अंतराल के बाद यह परंपरा फिर से वापस लौटी है. सोमवार से सरकारी कामकाज श्रीनगर में शुरू हो गया. इससे प्रशासनिक गतिविधियों में उत्साहजनक तेजी आई है. सुबह मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सचिवालय पहुंचे.यहां  सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी.उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया.

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

श्रीनगर के सदर सचिवालय में फिर से काम शुरू हुआ.यहां मुख्यमंत्री और मंत्रियों के दफ्तर हैं. प्रशासनिक सचिव भी यहां से काम करते हैं. सर्दियों में ये दफ्तर जम्मू में चलते हैं. गर्मी का मौसम आते ही इन्हें श्रीनगर लाया जाता है.यहां करीब करीब 30 विभागों के दफ्तर भी शिफ्ट हुए हैं.सभी ने श्रीनगर में काम शुरू कर दिया है.जम्मू में सरकारी दफ्तर 30 अप्रैल को बंद हुए थे.चार मई से श्रीनगर में काम शुरू हो गया. अधिकारियों ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं.हर जगह पुलिस और सुरक्षा बल तैनात नजर आ रहे हैं.

क्या है दरबार मूव?

उमर अब्दुल्ला सरकार के लिये दरबार मूव की वापसी एक बड़ा फैसला है.यह नेशनल कांफ्रेंस का चुनावी वादा था. सरकार ने इसे पिछले साल फिर शुरू किया.उमर अब्दुल्ला सरकार ने यह निर्णय लिया था.वैसे यह परंपरा करीब 150 साल पुरानी है.इसे डोगरा शासकों ने शुरू किया था. इसका मकसद दोनों क्षेत्रों को जोड़ना था. इसका मकसद था जम्मू और श्रीनगर के बीच संतुलन बनाए रखना था.

आपको बता दें कि हर साल दो बार दफ्तरों का स्थान बदलता है.सर्दियों में जम्मू और गर्मियों में श्रीनगर. साल 2021 में इस परंपरा को रोक दिया गया था. तब उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने यह फैसला लिया था. उन्होंने ई-गवर्नेंस को कारण बताया था.साथ ही खर्च कम करने की बात कही थी. उस वक्त  बताया गया था कि इससे 200 करोड़ रुपये बचेंगे.

इस व्यवस्था से क्या बदल जाएगा?

अब फिर से यह व्यवस्था लागू हो गई है. इससे लोगों को प्रशासन तक पहुंच सरल और आसान होगी. दफ्तर खुलने से पहले श्रीनगर को सजाया गया.सड़कों की मरम्मत की गई.सफाई और सौंदर्यीकरण पर खास ध्यान दिया गया.सरकारी इलाकों को नए रूप में तैयार किया गया.ताकि अधिकारियों की वापसी अच्छे से हो सके. स्थानीय लोगों में भी उत्साह देखा गया.

लोगों को उम्मीद है कि इससे रियासत में  कामकाज बेहतर होगा. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे संतुलन बनेगा.दोनों क्षेत्रों का विकास भी आगे बढ़ेगा. सरकार का कहना है कि इससे व्यवस्था सुचारू रहेगी और लोगों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी.जम्मू कश्मीर में  दरबार मूव की वापसी को एक अहम कदम माना जा रहा है.

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