तमिलनाडु में अपने राजनीतिक डेब्यू में ही एक्टर विजय की टीवीके ने जब 108 सीटें जीती थीं, तब हर कोई हैरान रह गया था. टीवीके राज्य की सबसे बड़ी पार्टी तो बन गई, लेकिन बहुमत से 11 कदम पीछे रह गई. राज्यपाल ने साफ कह दिया, बहुमत नहीं तो कुर्सी नहीं. एक दिन पहले तक विजय सत्ता के अंकगणित में उलझे थे. हालात ऐसे थे कि पार्टी विधायकों ने सामूहिक इस्तीफे पर सोचना शुरू कर दिया था. उधर सत्ता की दो धुर विरोधी पार्टियां हाथ मिलाने पर विचार करने लगी थीं. लेकिन 24 घंटे में ही हालात ऐसे पलटे कि अब विजय की मुश्किलें दूर होती दिख रही हैं.
राज्यपाल से कुछ देर में मुलाकात
टीवीके नेता विजय ने शुक्रवार की शाम राज्यपाल आरवी आर्लेकर से मुलाकात की और सरकार बनाने का दावा पेश किया. माना जा रहा है कि उन्होंने बहुमत के लिए जरूरी 118 विधायकों के समर्थन का पत्र पेश किया है. सूत्रों के मुताबिक, विजय ने शनिवार को ही शपथ ग्रहण कराने का अनुरोध किया है. अब फैसला राज्यपाल के हाथ में है.
चुनाव नतीजे आने के बाद राज्यपाल से विजय की ये तीसरी मुलाकात थी. कांग्रेस पार्टी पहले ही विजय के समर्थन का ऐलान कर चुकी है. लेकिन कांग्रेस के 5 विधायकों के सपोर्ट के बावजूद आंकड़े 112 पर आकर रुक गया था. सारा दारोमदार छोटी पार्टियों पर टिका था. सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती ना-नुकुर के बाद लेफ्ट और वीसीके जैसी पार्टियों का दिल पिघल गया है और वह विजय के लिए संकटमोचक बनकर आगे आई हैं.

छोटे दल बने विजय के संकटमोचक
सीपीआई के डी राजा ने सरकार गठन के लिए सीवीके को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है. सूत्रों के मुताबिक, सीपीएम और वीसीके भी समर्थन देने को तैयार हो गए हैं. समर्थन पत्र भी टीवीके को सौंप दिए जाने की खबर है. हालांकि राजनीति में कोई भी सौदा बिना मोलभाव के नहीं होता. चर्चा है कि वीसीके एक मंत्री के बदले समर्थन के लिए तैयार हुई है. वीसीके, वाम दलों और दो छोटे दलों के समर्थन से टीवीके बहुमत के आंकड़े से ऊपर 121 तक पहुंचती नजर आ रही है.

धुर विरोधियों की जुगलबंदी
टीवीके के विजय रथ के सत्ता तक पहुंचने की राह में सबसे बड़ा खतरा उस वक्त पैदा हो गया था, जब खबरें आईं कि तमिलनाडु की धुर विरोधी DMK और AIADMK अपने 50 साल पुराने मतभेदों को भुलाकर कुर्सी के लिए एकजुट होने पर विचार कर रही हैं. सूत्रों की मानें तो डीएमके ने एआईएडीएमके के सामने शर्त रख दी कि अगर साथ आना है तो एनडीए से गठबंधन तोड़ना होगा. हालांकि इनकी समस्या ये है कि DMK और AIADMK का गठबंधन भी 106 के आंकड़े पर आकर रुक जाता है और सत्ता की सीढ़ी चढ़ने के लिए ये भी लगभग उसी स्थिति में है, जैसे कल तक विजय थे.
TVK का 'सामूहिक इस्तीफे' का दांव
इधर डीएमके और एआईएडीएमके के हाथ मिलाने की खबरें आने लगीं, उधर टीवीके ने बड़ा कदम उठाने पर विचार शुरू कर दिया. टीवीके सूत्रों ने कहा कि अगर दोनों दल गठबंधन करके सरकार बनाने का दावा करते हैं तो टीवीके के सभी 108 विधायक सामूहिक इस्तीफा दे देंगे. ऐसा होता तो ये तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम होता.

DMK, कांग्रेस अब साथ भी नहीं बैठेंगे
तमिलनाडु में सत्ता की इस खिचड़ी में पर्दे के पीछे 2 बड़े घटनाक्रम हुए. एक तरफ टीवीके का समर्थन करने के मुद्दे पर कांग्रेस और डीएमके के रिश्ते बिगड़ गए हैं. दोनों के बीच खटास का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि डीएमके सांसद कनिमोझी के लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अलग बैठने का इंतजाम करने को कह दिया है. इस पत्र से साफ है कि DMK और कांग्रेस के बीच का गठबंधन अब राष्ट्रीय स्तर पर भी खत्सम हो चुका है. यह डीएमके के इंडिया गठबंधन से अलग होने का भी इशारा है.
BJP की 'ना काहू से दोस्ती, न बैर'
दूसरा तमिलनाडु में सत्ता की इस दौड़ के बीच बीजेपी ने साफ कर दिया कि वह में किसी भी पक्ष का समर्थन नहीं करेगी. मतलब उसने AIADMK से भी खुद को अलग कर लिया है. तमिलनाडु के चुनाव में दोनों गठबंधन करके साथ उतरी थीं. हालांकि इसे अपेक्षित सफलता नहीं मिली. AIADMK का कांटा 47 पर तो बीजेपी का महज 1 पर आकर रुक गया था. बीजेपी के तटस्थ रहने से AIADMK के लिए डीएमके की शर्त पूरा करने की मुश्किल भी खत्म हो गई है.
अब 'विजय रथ' की चाल का इंतजार
अब कांग्रेस, लेफ्ट और वीसीके के सहयोग से सत्ता की तरफ बढ़ते विजय को देखते हुए लगता है, AIADMK और डीएमके ने अपने कदम थाम लिए हैं. डीएमके ने गठबंधन के लिए इंतजार करने का फैसला किया है. डीएमके नेता टीकेएस एलंगोवन ने शुक्रवार को कहा कि राज्यपाल ने टीवीके को सरकार बनाने के लए 10 मई तक की मोहलत दी है. उसके बाद ही हम अपने अगले कदम के बारे में विचार करेंगे.
अब विजय की टीवीके कांग्रेस, लेफ्ट और वीसीके जैसे दलों का सहारा लेकर सरकार बनाने की स्थिति में दिख रही है. हालांकि दिक्कत ये है कि ये करीब 7 दलों का बेहद नाजुक गठबंधन होगा और राजनीति में नए-नवेले विजय के लिए इसे संभालना टेढ़ी खीर साबित हो सकता है.
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