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विजय की शपथ के दौरान वंदेमातरम पर क्‍यों छिड़ा 'महाभारत', जान लीजिए सबकुछ

विजय के शपथ ग्रहण समारोह में ‘वंदे मातरम्’ गाने को लेकर विवाद छिड़ गया है. TVK को समर्थन का ऐलान कर चुके वीसीके और सीपीआई ने इस मुद्दे पर राज्‍य सरकार से सवाल पूछे हैं.

विजय की शपथ के दौरान वंदेमातरम पर क्‍यों छिड़ा 'महाभारत', जान लीजिए सबकुछ
  • विजय के शपथ ग्रहण समारोह में ‘वंदे मातरम्’ को पहले और ‘तमिल थाई वाझथु’ को आखिर में गाने को लेकर विवाद हो गया.
  • CPI नेता एम वीरपांडियन ने विरोध दर्ज कराया और कहा कि 'वंदे मातरम' राष्‍ट्रगान के रूप में काम नहीं कर सकता है.
  • समारोह में राज्य गीत को तीसरे स्थान पर रखे जाने पर वीसीके ने राज्‍य सरकार से स्‍पष्‍टीकरण मांगा है.

तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता से नेता बने TVK प्रमुख विजय ने रविवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. उनके इस ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत कई बड़े राजनीतिक चेहरे शामिल हुए. हालांकि विजय का यह शपथ समारोह विवादों में घिर गया है. विवाद का केंद्र बना है समारोह के दौरान ‘वंदे मातरम्' और तमिलनाडु के राज्य गीत ‘तमिल थाई वाझथु' के क्रम को लेकर उठे सवाल. इसे लेकर अब TVK के सहयोगी दलों ने ही सवाल खड़े कर दिए हैं. बहुमत साबित करने से पहले सहयोगी दलों की नाराजगी विजय को भारी पड़ सकती है. 

शपथ ग्रहण समारोह कई मायनों में अलग और ध्यान खींचने वाला रहा. कार्यक्रम की शुरुआत ‘वंदे मातरम्' से हुई और इस बार इसे दो छंदों के बजाय पूरे छह छंदों में गाया गया. इसके बाद राष्ट्रगान ‘जन गण मन' प्रस्तुत किया गया. कार्यक्रम के अंत में तमिलनाडु का राज्य गीत ‘तमिल थाई वाझथु' गाया गया. यही क्रम अब राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है.

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परंपरा की दुहाई और CPI नेता के सवाल 

सीपीआई नेता एम वीरपांडियन ने अपना विरोध दर्ज कराया है. उन्‍होंने साफ कहा कि 'वंदे मातरम' राष्‍ट्रगान के रूप में काम नहीं कर सकता है. साथ ही उन्‍होंने इसे सरकारी परंपराओं का भी उल्‍लंघन बताया है. सीपीआई नेता एम वीरपांडियन ने कहा कि समारोह के दौरान ‘तमिल थाई वाझथु' को तीसरा स्थान दिया गया, जबकि ‘वंदे मातरम्' और राष्ट्रगान को क्रमशः पहला और दूसरा स्थान दिया गया. उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में सरकारी समारोह पारंपरिक रूप से ‘तमिल थाई वाझथु' से शुरू होते हैं और राष्ट्रगान के साथ समाप्त होते हैं. 

वीरपांडियन ने आरोप लगाया कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ही यह बात स्थापित हो चुकी थी कि ‘वंदे मातरम्' राष्ट्रगान के रूप में काम नहीं कर सकता क्योंकि यह गीत एक विशिष्ट देवता को समर्पित है और इसमें सांप्रदायिक धार्मिक चरित्र निहित है. 

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VCK ने सरकार से मांगा स्‍पष्‍टीकरण 

सीपीआई के बाद अब वीसीके ने भी इस मुद्दे पर अपनी आपत्ति जताई है. विजय के शपथ ग्रहण समारोह में तमिलनाडु के राज्य गीत को तीसरे स्थान पर रखे जाने पर पार्टी ने राज्‍य  सरकार से स्‍पष्‍टीकरण मांगा है. खुद पार्टी प्रमुख ने इसे लेकर के राज्‍य सरकार से स्थिति साफ करने के लिए कहा है. 

टीवीके को तमिलनाडु विधानसभा में साफ बहुमत नहीं मिला है. हालांकि चुनाव बाद सरकार बनाने के क्रम में विजय को कांग्रेस, वीसीके, सीपीआई, सीपीआईएम और आईयूएमएल ने पार्टी का साथ देने का वादा किया है.  हालांकि वंदे मातरम के मुद्दे पर टीवीके को सहयोगी दलों की नाराजगी भारी पड़ सकती है. 

राष्‍ट्र गान के समान वंदे मातरम को दर्जा 

पश्चिम बंगाल चुनाव में मिली प्रचंड जीत के बाद मोदी कैबिनेट की पहली बैठक में एक बड़ा फैसला किया गया. मंगलवार को प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को राष्ट्रीय गान जन गण मन के समान दर्जा देने का फ़ैसला किया है. कैबिनेट ने ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम' में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इस संशोधन के बाद बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समान दर्जा प्राप्त होगा यानी इसके लिए वही नियम और पाबंदियां लागू होंगी जो अभी राष्ट्रगान के लिए हैं. 

वर्तमान में राष्ट्रीय ध्वज, संविधान के अपमान और राष्ट्रगान के गायन में बाधा डालने पर जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है. अब वंदे मातरम को भी इस सूची में शामिल किया जाएगा. इसके नियमों का उल्लंघन करना एक संज्ञेय अपराध बन जाएगा.  देश वर्तमान में वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ मना रहा है. 

सरकार के इस फैसले के बाद से ही वंदे मातरम को लेकर के बयानों का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. यही कारण है कि वंदे मातरम के पक्ष और विपक्ष में लगातार राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिल  रही है. 

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अभिषेक पारीक
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