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संसद में कांग्रेस से अलग बैठेंगे DMK सांसद, कनिमोझी ने लोकसभा अध्यक्ष को क्यों लिखा पत्र? जानिए पूरा मामला

कनिमोझी ने इस पत्र में लिखा कि "हमारा गठबंधन अब समाप्त हो चुका है. हमारे सदस्यों के लिए वर्तमान बैठने की व्यवस्था को जारी रखना अनुपयुक्त होगा. मैं आपसे अनुरोध करती हूं कि DMK संसदीय दल के माननीय सदस्यों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था की जाए.

संसद में कांग्रेस से अलग बैठेंगे DMK सांसद, कनिमोझी ने लोकसभा अध्यक्ष को क्यों लिखा पत्र? जानिए पूरा मामला
  • डीएमके सांसद कनिमोझी ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर पार्टी के लिए अलग बैठने की व्यवस्था का अनुरोध किया है.
  • पत्र में उल्लेख है कि कांग्रेस के साथ गठबंधन समाप्त हो चुका है इसलिए अब साथ बैठना उचित नहीं माना जा रहा है.
  • DMK और कांग्रेस का तमिलनाडु व केंद्र की राजनीति में लंबे समय से मजबूत सहयोग रहा है लेकिन अब अलगाव हो गया है.
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द्रविड़ मुनेत्र कड़गम यानी डीएमके की वरिष्ठ नेता और सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने लोकसभा अध्यक्ष  को एक औपचारिक पत्र लिखकर संसद में अपनी पार्टी के सदस्यों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था करने का अनुरोध किया है.  इस पत्र ने देश के राजनीतिक हलकों में इस बात की पुष्टि कर दी है कि DMK और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बीच का गठबंधन अब राष्ट्रीय स्तर पर भी समाप्त हो चुका है. यह डीएमके के इंडिया गठबंधन से अलग होने का भी इशारा है.

7 मई को लिखे इस आधिकारिक पत्र में कनिमोझी ने स्पष्ट रूप से "बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों" का हवाला दिया है.  उन्होंने लिखा है कि चूंकि कांग्रेस के साथ उनका गठबंधन अब खत्म हो गया है. इसलिए DMK सांसदों का सदन में कांग्रेस सदस्यों के साथ बैठना अब उचित नहीं है. इससे पहले कांग्रेस ने तमिलनाडु में विजय को समर्थन देने का फैसला किया था. कांग्रेस ने यह भी कहा था कि वह अब आने वाले सारे चुनाव विजय की टीवीके साथ गठबंधन में लड़ेगी.

कनिमोझी ने इस पत्र में लिखा कि "हमारा गठबंधन अब समाप्त हो चुका है. हमारे सदस्यों के लिए वर्तमान बैठने की व्यवस्था को जारी रखना अनुपयुक्त होगा. मैं आपसे अनुरोध करती हूं कि DMK संसदीय दल के माननीय सदस्यों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था की जाए.

तमिलनाडु की राजनीति में एक-दूसरे के मजबूत सहयोगी

DMK और कांग्रेस लंबे समय से केंद्र और तमिलनाडु की राजनीति में एक-दूसरे के मजबूत सहयोगी रहे हैं. इस अलगाव का असर न केवल संसद के भीतर के समीकरणों पर पड़ेगा, बल्कि आगामी चुनावों और क्षेत्रीय राजनीति पर भी इसके गहरे परिणाम होने की संभावना है. लोकसभा अध्यक्ष को लिखे गए इस पत्र से यह साफ है कि DMK अब सदन में अपनी एक स्वतंत्र पहचान बनाए रखना चाहती है ताकि वे अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकें.

अगला कदम क्या होगा?

अब सबकी नजरें लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय पर टिकी हैं. यदि इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया जाता है, तो सदन का 'सीटिंग चार्ट' बदला जाएगा और DMK विपक्षी खेमे में एक स्वतंत्र गुट के रूप में नजर आएगी. कांग्रेस की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन इस घटनाक्रम ने विपक्षी एकता के भविष्य पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं. डीएमके के लोक सभा में 22 और राज्य सभा में आठ सांसद हैं. डीएमके का इंडिया गठबंधन से अलग होने का फ़ैसला इस गठबंधन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है जिसका असर कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर मतदान पर भी पड़ सकता है.

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(Disclaimer: New Delhi Television is a subsidiary of AMG Media Networks Limited, an Adani Group Company.)

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