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IIT बॉम्बे में छात्रों के बाद अब फैकल्टी का प्रदर्शन, फोरम ने कहा- प्रो. दूल्ला का नहीं हुआ निलंबन

आईआईटी बॉम्बे के फैकल्टी फोरम ने छात्र साहिल वाकोड़े की मौत के बाद प्रो. सूर्यनारायण दूल्ला के निलंबन संबंधी मीडिया रिपोर्टों को गलत बताया है.

IIT बॉम्बे में छात्रों के बाद अब फैकल्टी का प्रदर्शन, फोरम ने कहा- प्रो. दूल्ला का नहीं हुआ निलंबन
फैकल्टी फोरम ने छात्र की मौत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए प्रो. दूल्ला के काम की सराहना की है.
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आईआईटी बॉम्बे के एक छात्र की दुर्भाग्यपूर्ण मौत के बाद उठे विवाद के बीच संस्थान का 'फैकल्टी फोरम' अपने सहयोगी प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला के बचाव में उतर आया है. लगभग 750 सदस्यों वाले इस फोरम ने मीडिया में चल रही निलंबन की खबरों का पुरजोर खंडन करते हुए स्पष्ट किया है कि प्रो. दूल्ला को निलंबित नहीं किया गया है, बल्कि निष्पक्ष जांच के लिए उन्हें केवल डीन पद की प्रशासनिक जिम्मेदारियों से अस्थायी रूप से हटाया गया है. 

फैकल्टी फोरम ने छात्र की मौत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए प्रो. दूल्ला के काम की सराहना की है.

झूठी मीडिया रिपोर्टों से फैकल्टी फोरम आहत

आईआईटी बॉम्बे फैकल्टी फोरम के अध्यक्ष प्रो. राजकुमार एस. पंत की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि मीडिया के एक हिस्से में प्रो. सूर्यनारायण दूल्ला के निलंबन को लेकर भ्रामक और गलत खबरें चलाई जा रही हैं. फैकल्टी फोरम का कहना है कि इन झूठी खबरों से पूरे संस्थान के शिक्षक और सदस्य आहत हुए हैं.

फोरम ने साफ शब्दों में कहा कि प्रो. दूल्ला संस्थान में प्रोफेसर के पद पर लगातार कार्यरत हैं और उनका शैक्षणिक रिकॉर्ड तथा संस्थान के लिए किया गया काम बेहद शानदार रहा है.

जांच पूरी होने तक डीन पद से अस्थायी कार्यमुक्ति

18 सितंबर 2026 को कैंपस में हुई छात्र की दुखद मृत्यु के मामले में फोरम ने स्थिति स्पष्ट की है. बयान के अनुसार, मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ही प्रो. दूल्ला को डीन (प्रशासनिक मामले) के पद से अस्थायी रूप से कार्यमुक्त किया गया है. यह कदम केवल जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए उठाया गया है, न कि किसी अनुशासनात्मक कार्रवाई के तौर पर.

छात्रों के फीडबैक पर मिले 'टीचिंग एक्सीलेंस अवार्ड्स'

फैकल्टी फोरम ने प्रो. सूर्यनारायण दूल्ला की अकादमिक उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि वे आईआईटी बॉम्बे के बेहद प्रतिष्ठित और सम्मानित प्रोफेसरों में से एक हैं. उन्हें शिक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए दो बार 'टीचिंग एक्सीलेंस अवार्ड्स' से नवाजा जा चुका है.

फोरम ने बताया कि ये पुरस्कार सीधे तौर पर छात्रों के फीडबैक और रेटिंग के आधार पर दिए जाते हैं, जो यह साबित करता है कि छात्रों के बीच उनकी लोकप्रियता और विश्वसनीयता कितनी गहरी है.

डीन (छात्र मामले) के रूप में प्रो. दूल्ला के लंबे कार्यकाल को याद करते हुए फैकल्टी फोरम ने कहा कि उन्होंने कैंपस में छात्र समुदाय की भलाई और कल्याण के लिए कई अहम पहल शुरू की थीं. छात्रों की समस्याओं को सुलझाने और कैंपस जीवन को बेहतर बनाने में उनकी भूमिका हमेशा सराहनीय रही है.

छात्र की मौत पर जताया गहरा शोक

फैकल्टी फोरम ने बयान में एक बार फिर स्पष्ट किया कि 18 सितंबर की दुर्भाग्यपूर्ण घटना में अपने छात्र को खोने का दुख पूरे आईआईटी बॉम्बे परिवार को है.

फोरम के सदस्यों ने कहा कि छात्र की मौत उनके लिए बेहद दुखद और सदमे जैसी है, लेकिन इसके साथ ही वे अपने निष्ठावान सहयोगी की प्रतिष्ठा को धूमिल करने की कोशिशों के खिलाफ मजबूती से उनके साथ खड़े हैं.

आईआईटी मद्रास से भी प्रोफेसर दूल्ला को समर्थन

विवाद में अब आईआईटी मद्रास फैकल्टी एसोसिएशन ने भी एंट्री ली है. आईआईटी मद्रास फैकल्टी एसोसिएशन ने प्रो. सूर्यनारायण दूल्ला का समर्थन किया है. अध्यक्ष प्रो. एथयराजा मणि ने एक प्रेस रिलीज़ जारी कर ये बातें कही हैं. 18 सितंबर को आईआईटी बॉम्बे के छात्र के निधन से हमें गहरा दुख हुआ है. हम उसके माता-पिता, दोस्तों और आईआईटी बॉम्बे के छात्र समुदाय के दुख में उनके साथ हैं.

जैसा कि आईआईटी बॉम्बे फैकल्टी फोरम ने कहा है, प्रो. सूर्यनारायण दूल्ला ने कोर्स इंस्ट्रक्टर और पर्यवेक्षक के रूप में सीनेट द्वारा मंजूर की गई शैक्षणिक प्रक्रिया के अनुसार ही काम किया है. परीक्षा की पवित्रता बनाए रखना आईआईटी के प्रोफेसरों की जिम्मेदारी है और उन्हें इसे सद्भावपूर्वक निभाना चाहिए.

एसोसिएशन ने तीन मांगें रखी हैं. इस घटना की जांच उचित संस्थागत और कानूनी प्राधिकरण द्वारा निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से हो, जिसमें छात्र और उसके परिवार की गरिमा का पूरा सम्मान रखा जाए. 

जांच पूरी होने से पहले किसी भी व्यक्ति को मीडिया या सोशल मीडिया पर दोषी न ठहराया जाए. मीडिया ट्रायल से न्याय में कोई मदद नहीं मिलेगी. जांच में इस बात पर भी विचार होना चाहिए कि क्या कदाचार से निपटने की संस्थागत प्रक्रियाएं छात्रों को पर्याप्त समर्थन और काउंसलिंग देती हैं.

आईआईटी मद्रास फैकल्टी एसोसिएशन ने सभी हितधारकों से संयम और संवेदनशीलता दिखाने तथा तथ्यों को सामने आने देने की अपील की है. प्रेस रिलीज़ के अंत में कहा गया है कि, "हम आईआईटी बॉम्बे के अपने सहयोगी और हमारे संस्थानों के छात्रों और उनके परिवारों के साथ एकजुटता से खड़े हैं."

क्राइम ब्रांच कर रही जांच

IIT बॉम्बे सुसाइड केस को क्राइम ब्रांच ने जांच संभाली है. इसके लिए फोरेंसिक टीम IIT बॉम्बे पहुंची है. ACP की अगुवाई वाली क्राइम ब्रांच टीम हॉस्टल के कमरे की दोबारा जांच करेगी. एक फोरेंसिक वैन IIT बॉम्बे कैंपस पहुंच गई है.

जांच आज ऑफिशियली क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है. ACP रैंक का एक ऑफिसर अब जांच को हेड कर रहा है. फोरेंसिक टीम नई जांच के तहत हॉस्टल के उस कमरे की दोबारा जांच करेगी जहां साहिल वाकोडे ने सुसाइड किया था.

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