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देश में शराब होगी सस्‍ती, 20 अक्‍टूबर से एवोकैडो-कीवी-सेब के भी गिरेंगे दाम, IND-NZ FTA से आपकी जेब पर क्‍या असर होगा?

India-New Zealand FTA की तारीख का ऐलान हो गया है. ये 20 अक्टूबर 2026 से लागू होगा. जानिए न्यूजीलैंड की वाइन, कीवी, सेब, एवोकैडो और सीफूड कितने सस्ते हो सकते हैं और किन प्रोडक्ट्स को टैरिफ छूट नहीं मिलेगी.

देश में शराब होगी सस्‍ती, 20 अक्‍टूबर से एवोकैडो-कीवी-सेब के भी गिरेंगे दाम, IND-NZ FTA से आपकी जेब पर क्‍या असर होगा?
India New Zealand FTA का आपकी जेब पर क्‍या असर होगा?
NDTV इंडिया ग्राफिक्‍स

India-New Zealand FTA: बस कुछ दिन और... फिर देश में न्‍यूजीलैंड से इंपोर्ट किए जाने वाले कई सामान सस्‍ते में मिलेंगे. सेब, एवोकैडो के साथ-साथ कीवी, चेरी, ब्‍लूबेरीज जैसे ड्रायफ्रूट्स भी सस्‍ते में मिलेंगे. और हां, न्यूजीलैंड की वर्ल्‍ड फेमस वाइन भी सस्‍ती मिलेगी. दरअसल, भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता यानी FTA 20 अक्टूबर 2026 से लागू होने जा रहा है. इस डील के बाद भारतीय सामान को न्यूजीलैंड में 100% ड्यूटी-फ्री पहुंच मिलेगी. 

भारत भी न्यूजीलैंड से आने वाले कई प्रोडक्ट्स पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाएगा और फिर चरणबद्ध तरीके से खत्म करेगा. इसका सीधा असर आपकी खरीदारी पर भी पड़ सकता है. न्यूजीलैंड की वाइन, कीवी, सेब, चेरी, एवोकैडो, ब्लूबेरी, सीफूड, ऊन और लकड़ी जैसे प्रोडक्ट्स आने वाले समय में भारत में सस्ते हो सकते हैं.

हालांकि, इसका मतलब ये नहीं है कि 20 अक्टूबर से ही ये सभी चीजें अचानक सस्ती हो जाएंगी. कई प्रोडक्ट्स पर मिलने वाली छूट कोटा आधारित है, जबकि कुछ पर इंपोर्ट ड्यूटी अगले कई वर्षों में धीरे-धीरे कम होगी.

आइए समझते हैं कि FTA लागू होने के बाद आपकी जेब पर इसका क्या असर पड़ सकता है.

न्यूजीलैंड की वाइन हो सकती है सस्ती

भारत में इंपोर्टेड वाइन पर अभी काफी ज्यादा टैरिफ लगता है. FTA के तहत न्यूजीलैंड की वाइन पर लगने वाले टैरिफ को अगले 10 वर्षों में घटाकर 25% या 50% तक लाने का प्रावधान है. टैरिफ की दर वाइन की कीमत के आधार पर तय होगी.

इससे खासकर प्रीमियम न्यूजीलैंड वाइन की कीमतों में कमी आ सकती है. हालांकि, ये राहत एक साथ नहीं बल्कि चरणबद्ध तरीके से मिलेगी.

कीवी पर मिलेगी ड्यूटी-फ्री एंट्री

न्यूजीलैंड की पहचान उसके कीवी से भी है. FTA के तहत तय कोटा के अंदर न्यूजीलैंड की कीवी को भारत में ड्यूटी-फ्री एंट्री मिलेगी.

शुरुआती कोटा 6,250 टन बताया गया है, जिसे अगले छह वर्षों में बढ़ाकर 15,000 टन तक किया जाएगा. कोटा से ज्यादा आने वाली कीवी पर भी मौजूदा शुल्क में 50% कटौती का प्रावधान है.

इससे आने वाले वर्षों में भारतीय बाजार में न्यूजीलैंड की कीवी की उपलब्धता बढ़ सकती है और कीमतों पर भी असर पड़ सकता है.

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सेब के दाम पर क्या होगा असर?

न्यूजीलैंड से आने वाले सेब को भी FTA में राहत मिली है. शुरुआती तौर पर 32,500 टन के कोटा के तहत सेब पर 25% इंपोर्ट ड्यूटी लगने का प्रावधान है.

कोटा से ज्यादा आयात होने पर सामान्य 50% शुल्क जारी रह सकता है. इसलिए ये मानना सही नहीं होगा कि सभी न्यूजीलैंड सेब तुरंत सस्ते हो जाएंगे.

इनकी कीमत आयात की मात्रा, सीजन, घरेलू सप्लाई और बाजार की मांग पर भी निर्भर करेगी.

एवोकैडो, चेरी और ब्लूबेरी भी होंगे सस्ते?

एवोकैडो, चेरी, ब्लूबेरी और पर्सिमन जैसे प्रीमियम फलों को अगले 10 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से ड्यूटी-फ्री पहुंच देने का प्रावधान है.

यानी इन फलों पर इंपोर्ट ड्यूटी धीरे-धीरे कम होगी. इसका फायदा भारतीय ग्राहकों को कम कीमत या बाजार में ज्यादा विकल्प के रूप में मिल सकता है, लेकिन ये बदलाव पहले दिन से दिखाई देना जरूरी नहीं है.

महंगा Manuka Honey भी हो सकता है सस्ता

न्यूजीलैंड का Manuka Honey दुनियाभर में अपने प्रीमियम प्राइस के लिए जाना जाता है. FTA के तहत इसे भी सीमित कोटा और कम टैरिफ का फायदा मिल सकता है.

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इसके टैरिफ को करीब 66% से घटाकर लगभग 16.5% तक लाने की योजना है. ये कटौती पांच वर्षों में चरणबद्ध तरीके से हो सकती है.

सैल्‍मन और दूसरे सी-फूड पर भी राहत

न्यूजीलैंड से आने वाले Salmon, Mussels और दूसरे सीफूड प्रोडक्ट्स पर भी इंपोर्ट ड्यूटी कम होने या चरणबद्ध तरीके से खत्म होने का रास्ता खुलेगा.

इसका असर खासकर भारत के प्रीमियम सीफूड मार्केट पर पड़ सकता है. हालांकि, यहां भी अंतिम रिटेल कीमत ट्रांसपोर्ट, कोल्ड-चेन और डिस्ट्रीब्यूशन लागत पर निर्भर करेगी.

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ऊन, Lamb और लकड़ी पर क्या बदलेगा?

न्यूजीलैंड से आने वाले भेड़ के मांस और ऊन को समझौता लागू होने के साथ ड्यूटी-फ्री पहुंच मिल सकती है.

ऊन सस्ता होने से ऊन आधारित कपड़ों, कंबल और दूसरे प्रोडक्ट्स बनाने वाली कंपनियों की लागत पर असर पड़ सकता है.

लकड़ी और फॉरेस्ट्री प्रोडक्ट्स पर भी बड़ी संख्या में टैरिफ तत्काल या चरणबद्ध तरीके से हटाने का प्रावधान है. इससे फर्नीचर और कंस्ट्रक्शन सेक्टर को फायदा मिल सकता है.

किन भारतीय सेक्टर्स को मिलेगा फायदा?

FTA लागू होने के बाद न्यूजीलैंड के बाजार में भारतीय एक्सपोर्टरों के लिए कई सेक्टर्स में नए अवसर खुलेंगे. इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • टेक्सटाइल और परिधान
  • लेदर और फुटवियर
  • इंजीनियरिंग प्रोडक्ट्स
  • फार्मास्यूटिकल्स
  • कृषि और प्रोसेस्ड फूड
  • मेडिकल डिवाइसेज
  • पारंपरिक चिकित्सा और आयुष
  • टेक्नोलॉजी

भारत को खासतौर पर ऑटो कॉम्पोनेंट्स, ऑटोमोबाइल और एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टर्स में एक्सपोर्ट बढ़ने की उम्मीद है. सरकार के मुताबिक न्यूजीलैंड के बाजार में भारतीय प्रोडक्ट्स को लेकर अच्छा उत्साह है.

दूध-पनीर सस्ता होगा? जवाब है- नहीं

FTA के बावजूद न्यूजीलैंड के डेयरी प्रोडक्ट्स को भारत ने बड़ी छूट नहीं दी है.

दूध, क्रीम, पनीर, दही, Whey और Casein जैसे संवेदनशील डेयरी प्रोडक्ट्स को टैरिफ रियायत के दायरे से बाहर रखा गया है.

इसलिए FTA लागू होने के बाद न्यूजीलैंड का दूध या पनीर अचानक सस्ता होने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए.

प्याज, चना, मटर और मक्का पर भी सुरक्षा

भारत ने किसानों से जुड़े कई संवेदनशील प्रोडक्ट्स को भी FTA में मिलने वाली बड़ी टैरिफ रियायतों से बाहर रखा है.

इनमें प्याज, चना, मटर, मक्का, बादाम, चीनी, खाद्य तेल, मसाले और कुछ दूसरे कृषि उत्पाद शामिल हैं.

इसका मकसद घरेलू किसानों और स्थानीय उद्योगों को सस्ते आयात से अचानक पैदा होने वाली प्रतिस्पर्धा से बचाना है.

सिर्फ खरीदारी नहीं, नौकरियों पर भी पड़ेगा असर

FTA का असर सिर्फ न्यूजीलैंड से आने वाले सामान की कीमतों तक सीमित नहीं रहेगा. न्यूजीलैंड में भारत से होने वाले एक्सपोर्ट को ड्यूटी-फ्री एंट्री मिलने से भारतीय कंपनियों के लिए भी बड़ा बाजार खुल सकता है.

टेक्सटाइल, लेदर, कारपेट, ऑटो कॉम्पोनेंट्स, इंजीनियरिंग गुड्स और दूसरे MSME प्रोडक्ट्स को कीमत के मामले में प्रतिस्पर्धी बढ़त मिल सकती है.

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक, समझौते से किसानों, छोटे और लघु उद्योगों, कारीगरों और युवाओं के लिए नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है.

FTA का मतलब 50% ड्यूटी घटी तो कीमत भी 50% कम?

नहीं. इसे समझना सबसे जरूरी है.

अगर किसी प्रोडक्ट पर इंपोर्ट ड्यूटी 50% कम होती है तो इसका मतलब ये नहीं है कि दुकान पर उसकी कीमत भी 50% कम हो जाएगी.

किसी इंपोर्टेड सामान की अंतिम कीमत तय करने में इंपोर्ट ड्यूटी के अलावा शिपिंग कॉस्ट, कोल्ड-चेन, डिस्ट्रीब्यूटर मार्जिन, करेंसी एक्सचेंज रेट, रिटेलर मार्जिन, कोटा और सीजन जैसे कई फैक्टर शामिल होते हैं.

इसलिए 20 अक्टूबर से न्यूजीलैंड के सभी सामान सस्ते नहीं होंगे, लेकिन FTA लागू होने के बाद वाइन, कीवी, सेब और दूसरे प्रीमियम प्रोडक्ट्स में भारतीय ग्राहकों को धीरे-धीरे ज्यादा विकल्प और बेहतर कीमतें मिल सकती हैं. दूसरी तरफ डेयरी और कई संवेदनशील कृषि उत्पादों को भारत ने टैरिफ सुरक्षा के दायरे में रखा है.

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