- असम चुनाव में जोरहाट सीट पर कांग्रेस के गौरव गोगोई और बीजेपी के हितेंद्र नाथ गोस्वामी के बीच कड़ा मुकाबला है.
- गौरव गोगोई पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं. यह क्षेत्र उनके पिता तरुण गोगोई का राजनीतिक गढ़ माना जाता है.
- हितेंद्र नाथ गोस्वामी का लंबा चुनावी अनुभव है और वे पहले असम गण परिषद से विधायक बने.
असम विधानसभा चुनाव का सबसे चर्चित मैदान इस बार जोरहाट है, जहां कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और सांसद गौरव गोगोई का मुकाबला बीजेपी नेता और पांच बार के विधायक हितेंद्र नाथ गोस्वामी से है. दोनों नेताओं ने नामांकन के आखिरी दिन पर्चा दाखिल किया और अपनी जीत के दावे किए.
गौरव गोगोई की प्रतिष्ठा दांव पर
पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे गौरव गोगोई जोरहाट के ही सांसद हैं. यह पूरा इलाका उनके पिता और पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई की राजनीतिक कर्मभूमि माना जाता है. तरुण गोगोई दो बार जोरहाट से सांसद और तिताबोर से लगभग 20 साल तक विधायक रहे. ऐसे में कांग्रेस ने जोरहाट सीट को गौरव गोगोई के जरिए अपने मजबूत गढ़ में बदलने की रणनीति बनाई है.
गोस्वामी का लंबा चुनावी अनुभव
हितेंद्र नाथ गोस्वामी 1991 में पहली बार असम गण परिषद (AGP) के टिकट पर विधायक बने थे. वे 1996, 2001 और 2016 में भी जीते. बाद में बीजेपी में शामिल होकर विधानसभा अध्यक्ष भी बने. हालांकि 2021 में उनकी जीत का अंतर काफी कम हो गया था और इस बार उन्हें कांग्रेस के शीर्ष नेता की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है.
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गोस्वामी ने नामांकन के बाद कहा कि गौरव गोगोई ने सांसद रहते जोरहाट के लिए कुछ नहीं किया और वे 'हारकर वापस दिल्ली लौट जाएंगे.'
मेरी लड़ाई सीएम हिमंता से: गोगोई
गौरव गोगोई ने दावा किया कि उनकी लड़ाई सीधे मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से है. उन्होंने कहा कि यह मुकाबला 'हिमंत बिस्वा सरमा वाली कांग्रेस और तरुण गोगोई के आदर्शों वाली कांग्रेस' के बीच है. गौरव ने दावा किया कि चुनाव के बाद हिमंत सरमा सीएम नहीं रहेंगे और असम के लोगों को राजा बनाने की बात कही.
जुबीन गर्ग की मौत भी बना मुद्दा
प्रसिद्ध गायक ज़ुबीन गर्ग की रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत का मामला पूरे असम में राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है. चूंकि जुबीन मूल रूप से जोरहाट के ही रहने वाले थे, इसलिए यह सवाल यहाँ और ज्यादा प्रभाव डाल रहा है.
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दोनों दलों का शक्ति प्रदर्शन
नामांकन के दिन कांग्रेस और बीजेपी, दोनों ही पार्टियों ने जोरदार शक्ति प्रदर्शन किया. गोगोई की रैली में भीड़ और उत्साह अधिक दिखाई दिया. वहीं बीजेपी की रैली में महिलाओं की बड़ी भागीदारी देखी गई. माना जा रहा है कि हिमंता सरकार द्वारा महिलाओं के खातों में भेजी गई आर्थिक सहायता बीजेपी के लिए बड़ा लाभ साबित हो सकती है.
मंदिरों में माथा टेककर चुनावी मैदान में उतरे गोगोई
नामांकन से पहले गौरव गोगोई ने सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों पर जाकर पूजा की और नए और खुशहाल असम की दुआ मांगी. जोरहाट में उन्हें मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा है, लेकिन पूरे असम में कांग्रेस की वापसी के लिए उन्हें किसी चमत्कार की जरूरत होगी.
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