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असम में JMM के अकेले लड़ने पर कांग्रेस की बढ़ी चिंता, कहा- एकजुटता पर पड़ेगा असर

असम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और जेएमएम के बीच गठबंधन हुई थी लेकिन सीट बंटवारे पर बात नहीं बनने के बाद जेएमएम ने अलग चुनाव लड़ने का फैसला किया है.

असम में JMM के अकेले लड़ने पर कांग्रेस की बढ़ी चिंता, कहा- एकजुटता पर पड़ेगा असर
झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश
Jharkhand:

असम विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने 21 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है. JMM के इस फैसले पर कांग्रेस ने चिंता जताई है. बता दें असम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और जेएमएम के बीच गठबंधन हुई थी लेकिन सीट बंटवारे पर बात नहीं बनने के बाद जेएमएम ने अलग चुनाव लड़ने का फैसला किया है. वहीं, झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि जेएमएम द्वारा 21 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का निर्णय आदिवासी वोटों के बंटवारे का कारण बन सकता है, जिससे उनकी एकजुट ताकत पर असर पड़ने की आशंका है.

JMM को कांग्रेस ने दिया था 5-7 सीटों का प्रस्ताव

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की ओर से जारी बयान में बताया गया है कि पार्टी ने असम चुनाव में JMM के साथ गठबंधन के लिए गंभीर पहल की थी और 5 से 7 सीटों का प्रस्ताव दिया था. साथ ही, जिन सीटों पर JMM चुनाव लड़ता, वहां कांग्रेस की ओर से पूरा संगठनात्मक समर्थन देने का आश्वासन भी दिया गया था. कांग्रेस का कहना है कि उसकी मंशा JMM के प्रतिनिधियों को असम विधानसभा तक पहुंचाने की थी, लेकिन झामुमो ने स्थानीय दलों के समर्थन के आधार पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का फैसला किया. 

दरअसल, सीट बंटवारे को लेकर सहमति नहीं बनने के बाद JMM ने सोमवार को असम विधानसभा के लिए 21 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी.

जेएमएम की चुनावी रणनीति

पार्टी के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय की ओर से जारी सूची के अनुसार, सभी प्रत्याशी अपने नामांकन भी दाखिल कर चुके हैं. असम में जेएमएम की सक्रियता हाल के समय में बढ़ी है. पार्टी को वहां उसका पारंपरिक ‘तीर-धनुष' चुनाव चिह्न मिल चुका है, जिसे वह रणनीतिक बढ़त के रूप में देख रही है. जेएमएम की चुनावी रणनीति खासकर चाय बागान क्षेत्रों में काम करने वाले टी-ट्राइब और आदिवासी वोट बैंक पर केंद्रित है.

पार्टी नेतृत्व का मानना है कि असम में झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से जाकर बसे आदिवासी समुदाय को अब तक अपेक्षित राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिला है. इसी आधार पर झामुमो वहां अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रहा है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की हालिया जनसभाओं में उमड़ी भीड़ को भी पार्टी अपने पक्ष में सकारात्मक संकेत के रूप में देख रही है.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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