- पंजाब विधानसभा चुनाव में बीजेपी नशे के खिलाफ यात्राएं निकालकर इसे चुनाव के केंद्र में लाने की तैयारी कर रही है
- करीब 15 हजार बूथ समितियां बन चुकी हैं और बाकी करीब 10 हजार समितियों को 30 सितंबर तक तैयार करने का लक्ष्य है
- BJP योजनाओं, विकास कार्यों, PM मोदी के 25 साल के कार्यों को लेकर बड़े जनसंपर्क कार्यक्रम करने की तैयारी में है
पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने अभी से अपनी चुनावी और संगठनात्मक तैयारी तेज कर दी है. पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष के दो दिन के पंजाब दौरे में एक बात साफ तौर पर सामने आई. बीजेपी अब चुनाव के आखिरी समय का इंतजार नहीं करना चाहती, बल्कि अभी से जमीन पर अपना संगठन मजबूत करके चुनावी माहौल तैयार करना चाहती है.
लुधियाना में पंजाब बीजेपी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक में बीएल संतोष ने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने पर जोर दिया. साथ ही उन्होंने नशे के मुद्दे को पंजाब की हर विधानसभा सीट तक ले जाने की रणनीति पर भी जोर दिया.
बीजेपी ने सितंबर में पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर नशे के खिलाफ यात्राएं निकालने का फैसला किया है. दिल्ली से पार्टी के कई बड़े नेता इन कार्यक्रमों में शामिल हो सकते हैं या इनका नेतृत्व कर सकते हैं. बीजेपी की कोशिश है कि नशे का मुद्दा शहर और गांव, दोनों जगह के मतदाताओं को जोड़ने वाला बड़ा चुनावी मुद्दा बने.

बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष
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नशा क्यों बना बीजेपी की रणनीति का केंद्र
पंजाब में नशे का मुद्दा पिछले एक दशक से राजनीति के केंद्र में रहा है. 2017 में कांग्रेस ने नशे के खिलाफ कार्रवाई के वादे के साथ सत्ता हासिल की थी. इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने भी नशे की समस्या खत्म करने का वादा प्रमुखता से उठाया और सत्ता में आई.
अब बीजेपी इसी मुद्दे को अपने चुनावी अभियान का बड़ा आधार बनाने की कोशिश कर रही है.
इस रणनीति को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के नशा विरोधी अभियान से भी जोड़ा जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अगस्त को 100 हफ्ते चलने वाले देशव्यापी नशा विरोधी अभियान के तहत 'नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान' शुरू किया था.
बीजेपी के नेताओं से लोगों को 'मन की बात' कार्यक्रम सुनने के लिए भी ज्यादा से ज्यादा जुटाने को कहा गया है. पार्टी को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री पंजाब में नशे की समस्या को लेकर भी कोई खास संदेश दे सकते हैं.
बीजेपी के लिए नशे का मुद्दा इसलिए भी अहम है क्योंकि पंजाब की राजनीति में लंबे समय से धार्मिक और पहचान से जुड़े मुद्दे काफी प्रभावी रहे हैं. इनमें बेअदबी, बंदी सिख और सिख समुदाय से जुड़े कई मुद्दे शामिल हैं.
बीजेपी की कोशिश है कि नशे जैसे सामाजिक मुद्दे को आगे करके वह इन पारंपरिक राजनीतिक मुद्दों से आगे एक व्यापक चुनावी संदेश तैयार कर सके. पार्टी मानती है कि नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग पंजाब के अलग-अलग इलाकों और अलग-अलग वर्गों में समर्थन हासिल कर सकती है.

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बूथ पर फोकस, क्योंकि यहीं बीजेपी कमजोर रही है
बीएल संतोष की बैठक में सिर्फ चुनावी मुद्दों की बात नहीं हुई. संगठन को जमीन पर मजबूत करने पर भी खास जोर दिया गया.
पंजाब में करीब 25 हजार मतदान केंद्र हैं. बीजेपी के संगठनात्मक ढांचे के मुताबिक हर बूथ समिति में 11 सदस्य होते हैं. पार्टी ने अभी तक करीब 15 हजार बूथों पर समितियां बना ली हैं.
अब बाकी करीब 10 हजार बूथ समितियां 30 सितंबर तक बनाने का लक्ष्य रखा गया है. इसके बाद संगठन की स्थिति को लेकर विस्तृत रिपोर्ट भी तैयार की जाएगी.
यह कदम बीजेपी के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. किसान आंदोलन के बाद पंजाब में पार्टी को खासकर ग्रामीण इलाकों में संगठन और कार्यकर्ताओं की कमी का सामना करना पड़ा था. कई जगह पार्टी का बूथ स्तर का ढांचा उतना मजबूत नहीं था, जितना वह दूसरे राज्यों में रहा है.
ऐसे में बीजेपी की कोशिश अब चुनाव से काफी पहले अपने बूथ नेटवर्क को मजबूत करने की है. इसका मतलब साफ है कि पार्टी ऊपर से चुनावी प्रचार शुरू करने के बजाय नीचे से संगठन तैयार करना चाहती है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
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मोदी सरकार की योजनाओं को भी घर-घर पहुंचाने की तैयारी
बीजेपी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे होने के मौके पर कार्यक्रम आयोजित करने और केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने का भी फैसला किया है.
पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को कहा गया है कि वे केंद्र की योजनाओं और सरकार के कामकाज की जानकारी सीधे मतदाताओं तक पहुंचाएं.
यानी बीजेपी की रणनीति के दो बड़े हिस्से दिखाई दे रहे हैं. पहला, पंजाब की स्थानीय समस्या के रूप में नशे को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाना. दूसरा, नरेंद्र मोदी सरकार की योजनाओं और विकास के काम को इसके जवाब के रूप में सामने रखना.
इस तरह पार्टी पंजाब में स्थानीय मुद्दे और केंद्र सरकार के काम को एक साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है.
क्या बीजेपी अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है?
संगठन को मजबूत करने की यह कवायद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पंजाब बीजेपी के भीतर गठबंधन को लेकर मतभेद हैं. पार्टी के एक बड़े वर्ग ने किसी संभावित गठबंधन का विरोध किया है.
हालांकि अभी गठबंधन को लेकर अंतिम तस्वीर साफ नहीं है, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व की मौजूदा रणनीति से इतना जरूर संकेत मिलता है कि बीजेपी खुद को पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार करना चाहती है.
यही वजह है कि पार्टी पहले बूथ स्तर का संगठन तैयार कर रही है और उसके बाद बड़े चुनावी अभियान को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी.

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बीजेपी का असली लक्ष्य क्या है?
बीजेपी के लिए पंजाब आसान चुनावी मैदान नहीं रहा है. राज्य में कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और शिरोमणि अकाली दल जैसे दलों की मजबूत राजनीतिक मौजूदगी रही है. किसान आंदोलन के बाद बीजेपी के लिए ग्रामीण पंजाब में अपनी स्वीकार्यता बढ़ाना भी बड़ी चुनौती रहा है.
ऐसे में 2027 के चुनाव से करीब एक साल पहले संगठन को मजबूत करने की कोशिश पार्टी की लंबी तैयारी का हिस्सा है.
बीएल संतोष के लुधियाना दौरे से निकलने वाला संदेश यही है कि बीजेपी पंजाब में चुनाव की शुरुआत चुनावी विज्ञापनों से नहीं, बल्कि बूथ स्तर के संगठन से करना चाहती है.
नशे के खिलाफ अभियान को इसका सबसे बड़ा जन मुद्दा बनाया जा रहा है, जबकि नरेंद्र मोदी सरकार की योजनाओं और विकास के काम को पार्टी अपना राजनीतिक जवाब बना रही है.
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