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बैलेट पेपर से हुए चुनाव में भी हार गया विपक्ष, इस राज्य में 100 में से 94 सीटों पर NDA का कब्जा

त्रिपुरा के त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव में बैलट पेपर से मतदान हुआ, लेकिन नतीजों में NDA ने करीब 94% सीटों पर जीत दर्ज कर विपक्ष को बड़ा झटका दिया. टिपरा मोथा और भाजपा का दबदबा रहा, जबकि कांग्रेस और वामदलों का प्रदर्शन निराशाजनक रहा.

बैलेट पेपर से हुए चुनाव में भी हार गया विपक्ष, इस राज्य में 100 में से 94 सीटों पर NDA का कब्जा

देशभर में चुनावी पारदर्शिता, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को लेकर चल रहे सियासी विवाद के बीच एक बेहद अहम खबर सामने आई है. पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा में 'बैलट पेपर' के जरिए कराए गए त्रि-स्तरीय पंचायत चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है. एनडीए ने 100 में से करीब 94 प्रतिशत सीटों पर एकतरफा कब्जा जमाकर विपक्ष को करारी शिकस्त दी है. यह नतीजा ऐसे समय में आया है जब देश के विपक्षी दल लगातार चुनावों में ईवीएम को हटाकर बैलट पेपर से चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं. असम के बाद अब त्रिपुरा में मतपत्रों से हुए चुनाव के इस बड़े परिणाम ने राष्ट्रीय स्तर पर चल रही ईवीएम बनाम बैलट पेपर की बहस को अब एक नया मोड़ दे दिया है.

1,644 सीटें पहले ही निर्विरोध घोषित

इस चुनाव की शुरुआत ही एनडीए की बढ़त के साथ हुई थी. नॉमिनेशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही 167 पूरी विलेज कमिटियां निर्विरोध घोषित कर दी गईं, जिनमें कुल 1,644 सीटें शामिल थीं. इसके अलावा तीन सीटें खाली रह गईं. इसके बाद शेष बची 4,594 सीटों पर वोटिंग कराने की नौबत आई.

टिपरा मोथा और भाजपा की आंधी में उड़ा विपक्ष

नतीजों में एनडीए के सहयोगी दलों का दबदबा साफ दिखाई दिया. इस पूरे चुनाव में टिपरा मोथा ने अकेले ही 3,428 सीटें हासिल कीं, जो कि कुल सीटों का लगभग 74.62 प्रतिशत है. वहीं, भाजपा 859 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही. इन दोनों दलों ने मिलकर राज्य की करीब 94 फीसदी सीटों पर अपनी जीत दर्ज की. इसके अलावा चुनावी मैदान में उतरे निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी बेहतर प्रदर्शन करते हुए 173 सीटों पर कब्जा जमाया.

कांग्रेस और वामदलों का शर्मनाक प्रदर्शन

बैलट पेपर से चुनाव कराने की पुरजोर मांग करने वाले विपक्षी दलों का इस चुनाव में पूरी तरह से सूपड़ा साफ हो गया है.

मतपत्रों से वोटिंग होने के बावजूद विपक्ष जनता के बीच अपनी साख बचाने में नाकाम रहा. मुख्य विपक्षी दल माकपा (CPI-M) को केवल 87 सीटों पर संतोष करना पड़ा, जबकि आईपीएफटी (IPFT) को 33 सीटें मिलीं.

देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस का प्रदर्शन सबसे शर्मनाक रहा और वह दहाई का आंकड़ा बमुश्किल पार करते हुए सिर्फ 14 सीटों पर ही सिमट कर रह गई. इन नतीजों में निर्विरोध जीती गई सीटें भी शामिल हैं.

ईवीएम विवाद और सियासत पर इसका असर

उत्तर भारत और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में इस समय ईवीएम को लेकर अविश्वास का माहौल बनाने की पुरजोर कोशिश की जा रही है. कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल हर चुनाव के बाद बैलट पेपर की वकालत करते नजर आते हैं. ऐसे माहौल में त्रिपुरा के ये चुनावी नतीजे भाजपा के लिए एक मजबूत ढाल बनकर उभरे हैं. भाजपा अब राष्ट्रीय स्तर पर इस नतीजे को सामने रखकर विपक्ष के ईवीएम राग पर पलटवार कर रही है.संबित पात्रा ने बयान जारी करके कहा है- जब भी विपक्ष हारता है तो ठीकरा ईवीएम पर फोड़ता है, लेकिन मतपत्रों (बैलट पेपर) से हुए इस चुनाव के नतीजे यह साबित करते हैं कि देश की जनता का भरोसा आज भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विकास की राजनीति पर ही है.
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