योग गुरु बाबा रामदेव ने सनातन धर्म, हिंदू देवी-देवताओं और धार्मिक ग्रंथों को लेकर की जा रही कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. हरिद्वार में हुए प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि सनातन धर्म के खिलाफ सुनियोजित तरीके से भ्रम फैलाया जा रहा है. उन्होंने भगवान राम, माता सीता, भगवान कृष्ण, भगवान शिव और अन्य देवी-देवताओं को लेकर किए जा रहे दावों को झूठा बताते हुए कहा कि धर्मग्रंथों की गलत व्याख्या कर सनातन परंपराओं को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है. साथ ही उन्होंने आर्य आक्रमण सिद्धांत को भी खारिज किया और कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े तथ्यों को सामने लाने के लिए भारतीय प्राच्य विद्या परिषद के 104वें अधिवेशन में विस्तृत चर्चा की जाएगी.
देवी-देवताओं पर टिप्पणियों को लेकर जताई नाराजगी
हरिद्वार के कनखल स्थित दिव्य योग मंदिर में आयोजित प्रेस वार्ता में बाबा रामदेव ने कहा कि कुछ लोग सनातन धर्म के आराध्य देवी-देवताओं को लेकर भ्रामक और आपत्तिजनक बातें प्रचारित कर रहे हैं. उन्होंने भगवान राम और माता सीता को मांसाहार एवं मदिरापान से जोड़ने, भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला की कथित गलत व्याख्या करने और भगवान शिव को नशे से जोड़कर प्रस्तुत किए जाने पर कड़ा विरोध जताया.
'सनातन धर्म को बदनाम करने की कोशिश'
बाबा रामदेव ने कहा कि एक ओर कुछ लोग भगवान राम, कृष्ण, शिव और अन्य देवी-देवताओं के अस्तित्व पर सवाल उठाते हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हीं के बारे में कथित आरोप भी लगाते हैं. उन्होंने दावा किया कि बीते लगभग एक हजार वर्षों में मुगल काल और ब्रिटिश शासन के दौरान सनातन धर्म को कमजोर करने के लिए कई तरह के नैरेटिव गढ़े गए. उनके अनुसार कुछ लोगों ने धर्मग्रंथों की मनमानी व्याख्या कर सनातन परंपराओं की छवि खराब करने की कोशिश की. प्रेस वार्ता के दौरान बाबा रामदेव ने आर्य आक्रमण या आर्य प्रवास सिद्धांत को लेकर भी अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि आर्य बाहर से भारत नहीं आए थे. उन्होंने दावा किया कि दुनिया के विभिन्न देशों की यात्राओं के दौरान उन्हें ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि आर्य बाहर से भारत आए थे. उनके अनुसार भारत से लोग विभिन्न कारणों से दुनिया के अन्य हिस्सों में गए, लेकिन आर्यों के बाहर से आने का दावा तथ्यात्मक नहीं है.
'राम अमीरों के और शिव गरीबों के देवता' वाली सोच पर भी आपत्ति
रामदेव ने हाल के कुछ बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ लोग भगवान राम और भगवान शिव को आर्थिक आधार पर बांटने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि भगवान राम को अमीरों का और भगवान शिव को गरीबों का देवता बताना समाज और धर्म दोनों को बांटने वाला दृष्टिकोण है. उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में इस तरह के भेदभाव की कोई जगह नहीं है. बाबा रामदेव ने बताया कि पतंजलि की ओर से आयोजित भारतीय प्राच्य विद्या परिषद के 104वें अधिवेशन में धर्मशास्त्रों, भारतीय ज्ञान परंपरा और सनातन संस्कृति से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा होगी. उन्होंने कहा कि अधिवेशन के दौरान उन दावों और व्याख्याओं की भी समीक्षा की जाएगी, जिनके माध्यम से सनातन धर्म के बारे में भ्रम फैलाने का प्रयास किया जाता है.
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