धान कटाई के मौसम में अगर आपके खेत के ऊपर हाईटेक कैमरे वाले ड्रोन उड़ें तो चौंकिएगा मत. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग यानि CAQM ने निगरानी के प्रोटोकॉल में बदलाव किए हैं. खासतौर पर उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान की सरकारों से कहा है कि ड्रोन से खेतों की निगरानी के लिए के लिए एक योजना बनाए. आयोग ने इस बात पर जोर दिया है कि UAV यानि अनमैन्ड एरियल व्हीकल में लगे कैमरे उच्च रिजॉल्यूशन, रियल टाइम इमेजिंग और नीचे उड़ान भरने में सक्षम हों, ताकि धान के खेतों में पराली जलाने की घटना की हवाई निगरानी की जा सके.
दरअसल, CAQM अपने कंट्रोल रूम से सेटेलाइट इमेज के जरिए पराली जलाने की घटनाओं पर निगाह रखते हैं. लेकिन हाल के दिनों में देखा गया है कि सेटेलाइट की निगरानी से बचने के लिए धान के खेत में पराली दोपहर 3 बजे से लेकर रात 9 बजे तक जलाते थे ताकि सेटेलाइट की मॉनिटरिंग से बच सकें. यही वजह है कि कई बार सेटेलाइट इमेज भेजने के बावजूद ग्राउंड पर तैनात टीम उस जगह पर नहीं पहुंच पाती था या फिर भटक जाती थी.
ड्रोन की फीड लाइव कंट्रोल रूप में पहुंचाने के निर्देश
इसी वजह से CAQM ने इस बार ISRO की मदद से ड्रोन के जरिए धुंए के ग़ुबार, आग का सटीक पता, रियल टाइम पिक्चर के साथ ड्रोन की फ़ीड लाइव कंट्रोल रुम में पहुंचाने के निर्देश दिए हैं. यही नहीं राज्यों को ड्रोन की कितनी उड़ानें भरी जाएंगी, हॉट स्पॉट की लिस्ट और प्रभावित खेतों की सटीक पहचान के लिए राजस्व नक्शों के मिलान को भी कहा गया है. यानि पराली अगर खेत में जली तो हवाई आंखों से देखकर नोटिस सीधे खेत के मालिक किसान के नाम से पहुंच जाएगी.
प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के लिए, आयोग ने ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS)-आधारित पोजीशनिंग (मीटर रिज़ॉल्यूशन में), जियोफेंसिंग, रिटर्न-टू-होम कार्यक्षमता, फ्लाइट डेटा लॉगिंग और हाई-रिज़ॉल्यूशन वाले RGB कैमरे से लैस ड्रोन की तैनाती की सिफारिश की है, जो लाइव-स्ट्रीमिंग क्षमता के साथ जियो-टैग की गई छवियों और वीडियो, जलने वाले स्थलों, धुएं के गुबार, नए/पुराने जले हुए क्षेत्रों और आसपास के खेत की सीमाओं की जियोटैग की गई इमेजरी/वीडियो कैप्चर करने में सक्षम हों.
अयोग ने दिए निर्देश
आयोग ने निर्देश दिया है कि ड्रोन से कैप्चर किए गए सभी निगरानी वीडियो संबंधित राज्य सरकार के केंद्रीय डेटाबेस में संबंधित कटाई के मौसम के 3 महीने बाद तक रखे जाएंगे. इसके अलावा, राज्यों को ड्रोन-आधारित निगरानी डेटा के विश्लेषण, रिपोर्टिंग और निगरानी के लिए एक केंद्रीकृत डैशबोर्ड स्थापित करने का भी निर्देश दिया गया है. महत्वपूर्ण बात यह है कि आयोग ने निर्देश दिया है कि लाइव-स्ट्रीमिंग फीड सहित ड्रोन से कैप्चर किए गए सभी वीडियो तक पहुंच CAQM के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (I3C) को प्रदान की जाएगी, जिससे रियल-टाइम निगरानी, समन्वित निर्णय लेने और समय पर कार्रवाई संभव हो सके.
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