- सत्य निकेतन मामले में पुलिस ने कहा- मालिक को पता था कि बिल्डिंग की नींव कमजोर है.
- हादसे में अब तक 7 छात्रों की मौत हुई है. 5 छात्रों का इलाज चल रहा है.
- AIIMS में घायलों का इलाज चल रहा है, जिसमें से 3 की हालत गंभीर बताई जा रही है.
दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार को हुए बिल्डिंग हादसे को लेकर दर्ज FIR में पुलिस ने बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं. FIR के मुताबिक, किराए के लालच में बिल्डिंग मालिक हरिराम बंसल उर्फ गुप्ता और उसके भाई ने कई साल पुरानी इमारत के ऊपर कथित तौर पर चार मंजिलें बनवा दीं. पुलिस के मुताबिक, मालिकों को इस बात की जानकारी थी कि पुरानी बिल्डिंग की नींव अतिरिक्त वजन सहने की स्थिति में नहीं थी. इसके बावजूद बिल्डिंग में नए निर्माण का काम जारी रखा गया.
हादसे में 7 लोगों की मौत
रविवार से सोमवार शाम तक मलबे से 12 लोगों को बाहर निकाला गया और अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है.
- अभिषेक, उम्र 20 वर्ष
- युवराज सोनी, उम्र 20 वर्ष
- पवन, उम्र 17 वर्ष
- अर्पित जाजज, उम्र 19 वर्ष
- अक्षत सिंह यादव, उम्र 18 वर्ष
इसके अलावा 75 वर्षीय मजदूर सुरिंदर सिंह की भी मौत हुई. सातवें मृतक की पहचान अभी नहीं हो सकी है.
घायलों का इलाज जारी
हादसे में घायल हुए असगर अली (30), नीरज बावन (19), आदित्य कुमार (19), नितिश चिब (19) और मोहम्मद अयान (18) का इलाज AIIMS ट्रॉमा सेंटर और सफदरजंग अस्पताल में चल रहा है. इनमें से तीन घायलों की हालत गंभीर बताई गई है.
पुलिस के मुताबिक, रविवार को मलबे से पांच मृतकों और पांच घायलों को निकाला गया था, जबकि सोमवार को दो अन्य मृतकों के शव मलबे से बाहर निकाले गए.
FIR के मुताबिक, जांच में सामने आया कि इस बिल्डिंग में HostelDaze नाम से PG/हॉस्टल चलाया जा रहा था. बिल्डिंग में ग्राउंड फ्लोर के अलावा चार ऊपरी मंजिलें थीं और यहां बड़ी तादाद में छात्र और अन्य लोग रह रहे थे. अचानक बिल्डिंग गिरने की वजह से कई लोग मलबे में दब गए.
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FIR में मालिक पर गंभीर आरोप
FIR में पुलिस ने लिखा है कि बिल्डिंग मालिक को अच्छी तरह पता था कि मौजूदा इमारत की नींव ज्यादा वजन सहन नहीं कर सकती और अतिरिक्त भार के कारण बिल्डिंग गिर सकती है तथा लोगों की जान जा सकती है. इसके बावजूद किराए की लालच में ऊपरी मंजिलों का निर्माण कराया गया.
पुलिस के मुताबिक, इस निर्माण की वजह से जान-माल का नुकसान हुआ है. FIR में PCR कॉल, मौके की परिस्थितियों और मृतकों एवं घायलों की MLC के आधार पर प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध सामने आने की बात कही गई है.
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