
जम्मू-कश्मीर में पंचायत चुनाव के तारीखों का ऐलान भी अब तक नहीं हुआ है...
नई दिल्ली:
जम्मू-कश्मीर में आने वाले कुछ दिनों में दो लोकसभा और पंचायतों के चुनाव होने जा रहे है लेकिन अभी तक ये साफ नहीं हो पाया है कि पीडीपी और बीजेपी एक साथ मिलकर दोनों चुनाव लड़ेंगे. रियासत में सत्ता में भागीदार दोनों दल ये फैसला नहीं कर पाई है कि वह इन चुनावों में साथ उतरे या फिर अकेले जोर आजमाइश कर लें.
हलांकि अब तक चुनाव की तिथियों का ऐलान नहीं हुआ है लेकिन पीडीपी ये तय कर चुका है वो कश्मीर के खाली हुए दो लोकसभा सीटों पर आने वाले दिनों में होने वाले उपचुनाव में अपना उम्मीदवार उतारेगा. 2016 में खाली हुए इन दोनों लोकसभा सीटों पर पीडीपी का ही कब्जा था. मुफ्ती मोहम्मद सईद अनंतनाग लोकसभा सीट से सांसद चुने गए थे. मुख्यमंत्री बनने से पहले उन्होंने लोकसभा सीट से त्यागपत्र दिया था. इसके अलावा पीडीपी के बीजेपी के राज्य में सरकार बनाये जाने के खिलाफ पिछले साल 2016 में पीडीपी नेता तारिक हामिद कर्रा ने श्रीनगर लोकसभा और पार्टी पीडीपी दोनों से इस्तीफा देकर कांग्रेस में शामिल हो गए थे.
जम्मू-कश्मीर में पंचायत चुनाव के तारीखों का ऐलान भी अब तक नहीं हुआ है. संभावना ये जताई जा रही है अप्रैल महीनों में ये चुनाव होंगे लिहाजा इसको लोकर सरगर्मिया तेज हो गई हैं. वही सीपीआई (एम) ने कहा कि फिलहाल कश्मीर का माहौल चुनाव के अनुकूल नहीं है. पहले सरकार को विश्वास बहाली के लिए कदम उठाने चाहिए फिर पंचायत चुनाव की बात हो. गौरतलब है कि हर बार पंचायत चुनाव आतंकवादियों के निशाने पर होता है. इसकी कीमत कई दफा पंचायत उम्मीदवार को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है.
जम्मू कश्मीर में पहले ही कई मुद्दों पर बीजेपी का पीडीपी से मतभेद खुलकर सामने आते रहे है शायद यही वजह है पार्टी पुरी तरह से नाप तौलकर ही अपने पत्ते खोलेगी.
हलांकि अब तक चुनाव की तिथियों का ऐलान नहीं हुआ है लेकिन पीडीपी ये तय कर चुका है वो कश्मीर के खाली हुए दो लोकसभा सीटों पर आने वाले दिनों में होने वाले उपचुनाव में अपना उम्मीदवार उतारेगा. 2016 में खाली हुए इन दोनों लोकसभा सीटों पर पीडीपी का ही कब्जा था. मुफ्ती मोहम्मद सईद अनंतनाग लोकसभा सीट से सांसद चुने गए थे. मुख्यमंत्री बनने से पहले उन्होंने लोकसभा सीट से त्यागपत्र दिया था. इसके अलावा पीडीपी के बीजेपी के राज्य में सरकार बनाये जाने के खिलाफ पिछले साल 2016 में पीडीपी नेता तारिक हामिद कर्रा ने श्रीनगर लोकसभा और पार्टी पीडीपी दोनों से इस्तीफा देकर कांग्रेस में शामिल हो गए थे.
जम्मू-कश्मीर में पंचायत चुनाव के तारीखों का ऐलान भी अब तक नहीं हुआ है. संभावना ये जताई जा रही है अप्रैल महीनों में ये चुनाव होंगे लिहाजा इसको लोकर सरगर्मिया तेज हो गई हैं. वही सीपीआई (एम) ने कहा कि फिलहाल कश्मीर का माहौल चुनाव के अनुकूल नहीं है. पहले सरकार को विश्वास बहाली के लिए कदम उठाने चाहिए फिर पंचायत चुनाव की बात हो. गौरतलब है कि हर बार पंचायत चुनाव आतंकवादियों के निशाने पर होता है. इसकी कीमत कई दफा पंचायत उम्मीदवार को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है.
जम्मू कश्मीर में पहले ही कई मुद्दों पर बीजेपी का पीडीपी से मतभेद खुलकर सामने आते रहे है शायद यही वजह है पार्टी पुरी तरह से नाप तौलकर ही अपने पत्ते खोलेगी.
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