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भारत की ये मिसाइल 3 मिनट में पहुंच सकती है रावलपिंडी, लॉन्च हुई तो रोकना नामुमकिन

डीआरडीओ चेयरमैन ने बताया कि लॉन्ग रेंज यानी लंबी दूरी की एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल (LR-AShM) का विकास तेजी से आगे बढ़ रहा है और यह भविष्य में भारतीय सेनाओं के लिए 'गेमचेंजर' साबित होगी.

भारत की ये मिसाइल 3 मिनट में पहुंच सकती है रावलपिंडी, लॉन्च हुई तो रोकना नामुमकिन
  • DRDO लंबी दूरी की एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल विकसित कर रहा है, जो ब्रह्मोस से तेज और शक्तिशाली होगी.
  • इस मिसाइल की रफ्तार मैक-5 से मैक-10 के बीच होगी, जिससे इसे रोकना दुश्मन के लिए बेहद कठिन होगा.
  • इसके दो सफल परीक्षण हो चुके हैं. तीसरे परीक्षण के बाद इसे सेना को यूजर इवैल्यूएशन ट्रायल के लिए सौंपा जाएगा.
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नई दिल्‍ली:

भारत की मिसाइल पावर की पूरी दुनिया कायल है. ब्रह्मोस, आकाश और बराक जैसी मिसाइलों ने ऑपरेशन सिंदूर में अपना लोहा मनवाया है और अब मिसाइल तकनीक के मामले में भारत एक नए और अत्याधुनिक दौर में प्रवेश करने जा रहा है. अब तक जिस ब्रह्मोस मिसाइल को भारत की सबसे तेज और घातक मिसाइल माना जाता था, उससे भी ज्यादा शक्तिशाली और तेज एक नई हाइपरसोनिक मिसाइल विकसित की जा रही है. खुद डीआरडीओ (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) के चेयरमैन डॉ. समीर वी. कामत ने इसकी जानकारी दी है. 

डीआरडीओ चेयरमैन ने बताया कि लॉन्ग रेंज यानी लंबी दूरी की एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल (LR-AShM) का विकास तेजी से आगे बढ़ रहा है और यह भविष्य में भारतीय सेनाओं के लिए 'गेमचेंजर' साबित होगी. हाइपरसॉनिक का मतलब इस मिसाइल की रफ्तार मैक 5 (1 मैक में 1234.8 किलोमीटर प्रति घंटा) या उससे अधिक होगी. एक उदाहरण से समझें तो वाघा बॉर्डर से लॉन्‍च यह मिसाइल महज 3 मिनट में रावलपिंडी तक पहुंचकर कहर बरपा सकती है, जो करीब 300 किमी दूर है. 

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दो टेस्‍ट सफल, तीसरा टेस्‍ट जल्‍द 

डॉ. कामत के अनुसार, इस मिसाइल के अब तक इस मिसाइल के दो टेस्ट सफल हो चुके हैं और तीसरा टेस्ट भी जल्द ही किया जाएगा. इसके बाद इसे यूजर इवैल्यूएशन ट्रायल के लिए सेनाओं को सौंपा जाएगा, जहां सेना इसे अलग-अलग परिस्थितियों में परखेगी. अगर ये टेस्ट सफल रहे, तो यह मिसाइल जल्द ही सेना और नौसेना में शामिल कर ली जाएगी.

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नहीं रोक पाएगा कोई एयर डिफेंस 

यह नई मिसाइल ब्रह्मोस से कई गुना ज्यादा तेज होगी. जहां ब्रह्मोस मैक-3 की रफ्तार से उड़ती है, वहीं यह हाइपरसोनिक मिसाइल मैक-5 से मैक-10 तक की स्पीड हासिल कर सकती है. इतनी अधिक गति के कारण दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम के लिए इसे रोकना बेहद मुश्किल होगा. इतनी रफ्तार की वजह से एयर डिफेंस के रडार के पास इतना समय ही नहीं होता कि वो आ रही मिसाइल को रोकने के लिए अपनी मिसाइल लॉन्च कर सके. जब तक उसका रडार कुछ समझ पाता है, तब तक मिसाइल काफी आगे निकल चुकी होती है. 

ये है सबसे बड़ी खासियत 

  • स्पीड के अलावा इस मिसाइल की रेंज भी काफी ज्यादा होगी, जिससे भारत दूर बैठे दुश्मन के युद्धपोतों और एयरक्राफ्ट कैरियर को निशाना बना सकेगा. 
  • यह मिसाइल खास तौर पर समुद्र में मौजूद दुश्मन के जहाजों को नष्ट करने के लिए बनाई जा रही है. 
  • इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह उड़ान के दौरान अपना रास्ता बदल सकती है, जिससे दुश्मन का रडार और डिफेंस सिस्टम भ्रमित हो जाता है. यह तकनीक भविष्य के युद्धों में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है. 
  • एक तरफ बैलिस्टिक मिसाइलें ऊंची उड़ान भरती हैं, इसीलिए वो आसानी से ट्रैक हो जाती हैं. लेकिन हाइपरसॉनिक क्रूज मिसाइलें काफी नीचे उड़ती हैं. ये तेज और घुमावदार रास्ता लेती हैं, जिससे रडार से बचना आसान होता है. 

चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा भारत 

दिलचस्प बात ये है कि यह मिसाइल पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित की जा रही है, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भी एक बड़ी उपलब्धि है. इससे भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में आ जाएगा, जिनके पास हाइपरसॉनिक स्ट्राइक क्षमता है. आने वाले वर्षों में यह मिसाइल भारत की सैन्य ताकत को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाली साबित होगी और जिस तरह से हमारे प्यारे पड़ोसी चीन और पाकिस्तान समय-समय पर हमें प्यार भरे नजराने देते रहते हैं, उनके लिए ये एक बहुत ही उपयुक्त रिटर्न गिफ्ट साबित होगा.
 

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