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डांटने से नहीं, इस तरीके से मिल सकती है राहत, बच्चों की Bedwetting पर नई स्टडी

क्या आपका बच्चा रात में बिस्तर गीला कर देता है? एक नए अध्ययन में आयुर्वेदिक दवा और योग के संयोजन से Bedwetting में उल्लेखनीय सुधार देखने का दावा किया गया है.

डांटने से नहीं, इस तरीके से मिल सकती है राहत, बच्चों की Bedwetting पर नई स्टडी
क्या योग Bedwetting में मदद कर सकता है?
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नई दिल्ली: छोटे बच्चे रात को सोते समय बिस्तर गीला कर दें, तो अक्सर माता-पिता इसे आम बात मानकर छोड़ देते हैं या फिर बच्चे पर गुस्सा करने लगते हैं. पर यह परेशानी बच्चे के आत्मविश्वास को भीतर से तोड़ देती है. मेडिकल भाषा में इसे नॉक्टर्नल एन्यूरेसिस (Nocturnal Enuresis) कहा जाता है, जो कई बच्चों में आत्मविश्वास और व्यवहार पर असर डाल सकती है.

अब एक नई रिसर्च से अच्छी खबर आई है. दावा है कि अगर आयुर्वेद और योग को एक साथ आजमाया जाए, तो बेडवेटिंग की इस आदत में करीब 70 फीसदी तक कमी आ सकती है. यह स्टडी प्रसिद्ध मेडिकल पत्रिका 'एवाईयू' (AYU) में छपी है.

यह रिसर्च जामनगर के इंस्टीट्यूट ऑफ टीचिंग एंड रिसर्च इन आयुर्वेद (ITRA) में की गई. वैज्ञानिकों ने 6 से 14 साल की उम्र के 38 बच्चों पर दो महीने (8 हफ्ते) तक यह प्रयोग करके देखा.

बच्चों को दो अलग-अलग ग्रुप में रखा गया था:

पहले ग्रुप को सिर्फ एक आयुर्वेदिक दवा दी गई. दूसरे ग्रुप को दवा के साथ-साथ सुबह-शाम चार आसान योगासन कराए गए—उत्कटासन, अर्ध-शलभासन, भुजंगासन और शवासन.

आठ हफ्ते बाद नतीजे चौंकाने वाले रहे. जिन बच्चों को सिर्फ आयुर्वेदिक दवा दी गई थी, उनमें करीब 38% सुधार दिखा. वहीं जिन बच्चों ने दवा के साथ योग भी किया, उनमें करीब 70% तक सुधार दर्ज किया गया.

फायदा सिर्फ बिस्तर गीला न करने तक ही सीमित नहीं रहा. योग और दवा के मेल से बच्चों के मिजाज और दिमाग पर भी गजब का असर दिखा. उनकी याददाश्त 61% तक बेहतर पाई गई, चिड़चिड़ापन करीब 66% कम हुआ और बेवजह की उछल-कूद या बेचैनी में 71% तक कमी दर्ज की गई. बच्चे पढ़ाई में बेहतर ध्यान लगाने लगे और उनका खोया हुआ कॉन्फिडेंस भी लौटने लगा.

ITRA की डायरेक्टर प्रो. डॉ. तनुजा नेसरी का कहना है कि रात में पेशाब निकल जाने की आदत कई वजहों से हो सकती है. इसका सीधा असर बच्चे की मानसिक स्थिति और उसके व्यवहार पर पड़ता है. लेकिन योग और आयुर्वेदिक दवा मिलकर इस समस्या की जड़ पर काम करते हैं, जिसके काफी अच्छे नतीजे देखने को मिले हैं.

रिसर्च के मुताबिक, योगासन पेल्विक हिस्से (पेट के निचले हिस्से और मूत्राशय) की मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं, जिससे पेशाब रोकने पर बच्चे का कंट्रोल बेहतर होता है. वहीं दवा के तौर पर 'मेध्य रसायन चूर्ण' दिया गया था, जिसमें ब्राह्मी, शंखपुष्पी, मुलेठी और गिलोय जैसी दिमाग को शांत और दुरुस्त रखने वाली जड़ी-बूटियां शामिल थीं.

हालांकि, जानकारों का कहना है कि हर बच्चे की शारीरिक बनावट और समस्या की वजह अलग हो सकती है. इसलिए खुद से कोई दवा या योगासन शुरू कराने से पहले किसी अच्छे डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें.

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