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Vidyut Jammwal ने 15 मिनट तक रोकी सांस, ब्रीथ होल्ड कितना सुरक्षित, क्या आम लोग कर सकते हैं ट्राई?

विद्युत जामवाल के 15 मिनट तक सांस रोकने के दावे ने लोगों को हैरान कर दिया. जानिए लंबे समय तक सांस रोकने पर शरीर में क्या होता है, Hypoxia क्या है और क्या यह आम लोगों के लिए सुरक्षित है.

Vidyut Jammwal ने 15 मिनट तक रोकी सांस, ब्रीथ होल्ड कितना सुरक्षित, क्या आम लोग कर सकते हैं ट्राई?
15 मिनट तक सांस रोकने पर शरीर के अंदर क्या होता है?
  • Vidyut Jammwal held his breath for 15 minutes during a Mumbai Street Fighter event demonstration
  • He used a Patanjali Yoga Sutra technique linked to his character Dhalsim’s yogic mastery
  • Prolonged breath-holding can cause hypoxia and is unsafe without proper training or supervision

बॉलीवुड कलाकार विद्युत जामवाल अपनी हैरतअंगेज फिटनेस और मार्शल आर्ट्स के लिए जाने जाते हैं. वे गाहे-बगाहे कुछ ऐसा कर देते हैं कि लोगों का ध्‍यान उधर चला ही जाता है. हाल ही में उन्होंने जो किया, उसने वहां मौजूद हर शख्स को सन्न कर दिया. मुंबई में आगामी हॉलीवुड फिल्म 'स्ट्रीट फाइटर' के एक खास इवेंट में विद्युत ने स्टेज पर ध्यान की मुद्रा में बैठकर कथित तौर पर पूरे 15 मिनट तक सांस रोककर रखी.

बॉलीवुड अभिनेता विद्युत जामवाल ने एक इवेंट में कथित तौर पर 15 मिनट तक सांस रोककर सबको हैरान कर दिया. उन्होंने इसे योग की 'कुंभक' तकनीक बताया. लेकिन क्या इतनी देर तक सांस रोकना वास्तव में सुरक्षित है? विशेषज्ञों के मुताबिक लंबे समय तक सांस रोकने से शरीर में ऑक्सीजन की कमी (Hypoxia) हो सकती है, जिससे बेहोशी और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है. फिल्म में वह 'धलसीम' (Dhalsim) का किरदार निभा रहे हैं, जो योग और अपनी सांसों पर बेमिसाल नियंत्रण के लिए मशहूर है. स्टंट के बाद विद्युत ने बताया कि उन्होंने 'पतंजलि योग सूत्र' की प्राचीन तकनीक का इस्तेमाल किया है.

उनका कहना था कि इसी अभ्यास ने उन्हें जिंदगी में बड़े मुकाम हासिल करने में मदद की. विद्युत ने कहा कि हमें अंधी दौड़ में भागने के बजाय कभी-कभार ठहरना, सांस लेना और खुद को शांत रखना भी सीखना चाह‍िए. 

लेक‍िन सवाल ये है कि यह क‍ितना काम का है. क्या एक आम इंसान के लिए इतनी देर सांस रोकना मुमकिन या सुरक्षित है? तो चल‍िए जानते हैं- 

जब आप सांस रोकते हैं, तो शरीर के भीतर क्या घटता है?

यह तो हम स्‍कूल से ही पढ़ने आ रहे हैं कि हमारा शरीर एक मशीन है. सांस अंदर लेने पर ऑक्सीजन अंगों तक पहुंचती है और बाहर छोड़ने पर कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) बाहर निकलती है.

जैसे ही आप सांस रोकना शुरू करते हैं तो आपके शरीर में नीचे दी गई चीजें होने लगती हैं:

1. खून में मौजूद ऑक्सीजन धीरे-धीरे घटने लगती है.
2. कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा तेजी से बढ़ने लगती है.
3. दिमाग को जो सांस लेने की छटपटाहट महसूस होती है, वह असल में ऑक्सीजन की कमी से नहीं, बल्कि बढ़े हुए CO2 के दबाव की वजह से होती है.

एक ट्रेंड इंसान अपने मानसिक नियंत्रण से उस छटपटाहट को कुछ देर दबा तो सकता है, लेकिन शरीर की ऑक्सीजन की भूख खत्म नहीं होती. जब खून में ऑक्सीजन बेहद निचले स्तर पर पहुंच जाती है, तो उस मेडिकल कंडीशन को 'हाइपोक्सिया' (Hypoxia) कहा जाता है. यानी दिमाग और दिल को जरूरत के मुताबिक ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही.

क्या 15 मिनट सांस रोकना सबके लिए सेफ है?

बिल्कुल नहीं. किसी भी इंसान के लिए सांस रोकने की कोई एक 'सेफ लिमिट' तय नहीं है.

फ्री-डाइवर्स और एथलीट सालों की कड़ी ट्रेनिंग के बाद अपने शरीर को कम ऑक्सीजन में ढलने के काबिल बनाते हैं. उनके फेफड़े और नसें इस तरह तैयार हो जाती हैं कि वे हाइपोक्सिया के असर को देर तक झेल सकें.

लेकिन किसी आम इंसान के लिए इसे कॉपी करना सीधा-सीधा जान जोखिम में डालना है. डॉक्टरों की साफ चेतावनी है कि बिना निगरानी और सालों के अभ्यास के ऐसा करने पर इंसान सीधे बेहोश हो सकता है और ब्रेन डैमेज तक का खतरा रहता है.

विद्युत का यह करतब सालों की ट्रेनिंग का नतीजा हो सकता है, लेकिन इसे सोशल मीडिया का कोई 'फिटनेस चैलेंज' समझने की भूल कतई न करें.

सबसे बड़ी गलती: सांस रोकने से पहले गहरी-तेज सांसें लेना

अक्सर लोग सांस रोकने का रिकॉर्ड बनाने के चक्कर में पहले जल्दी-जल्दी गहरी सांसें खींचते हैं, जिसे मेडिकल भाषा में हाइपरवेंटिलेशन (Hyperventilation) कहते हैं.

यह सबसे खतरनाक खेल है. ऐसा करने से खून में कार्बन डाइऑक्साइड तो घट जाती है, जिससे आपको देर तक सांस रोकने में बेचैनी नहीं होती, पर शरीर में ऑक्सीजन का कोई बड़ा बैकअप तैयार नहीं होता.

नतीजा? आपको सांस लेने की तलब महसूस ही नहीं होगी और शरीर में चुपचाप ऑक्सीजन खत्म हो जाएगी. इंसान बिना किसी चेतावनी या दर्द के सीधा बेहोश (Hypoxic Blackout) होकर गिर पड़ता है. अगर कोई पानी के अंदर यह कर रहा हो, तो डूबने से मौत तय है.

फेफड़ों की ताकत या सिर्फ दिमाग का भ्रम?

बहुत से लोग सोचते हैं कि देर तक सांस रोक लेने का मतलब है कि उनके फेफड़े बहुत बड़े या मजबूत हो गए हैं. ऐसा बिल्कुल नहीं है.

सांस रोकने की क्षमता केवल फेफड़ों के साइज पर नहीं, बल्कि:

  • शरीर के मेटाबॉलिज्म रेट
  • कार्बन डाइऑक्साइड सहने की क्षमता
  • नर्वस सिस्टम के शांत रहने
  • शरीर द्वारा ऑक्सीजन की धीमी खपत पर निर्भर करती है.

इसलिए ज्यादा देर सांस रोकने को कभी भी 'मजबूत फेफड़ों' का सर्टिफिकेट न समझें.

योग में कुंभक का महत्व, लेकिन सीमाएं भी जरूरी

योग विज्ञान में सांस रोकने की क्रिया को 'कुंभक' कहा जाता है, जो प्राणायाम का एक अहम हिस्सा है. 'क्योरियस' (Cureus) जर्नल में छपी एक स्टडी के मुताबिक, सीमित और सही तरीके से किया गया कुंभक तनाव कम करने, एंटीऑक्सीडेंट सिस्टम को मजबूत करने और हीमोग्लोबिन स्तर को सुधारने में मदद कर सकता है.

जैसे 'विम हॉफ मेथड' में भी गहरी सांस के बाद केवल 15 सेकंड का होल्ड सुरक्षित माना जाता है. लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं कि कोई भी 10-15 मिनट का अभ्यास खुद से शुरू कर दे.

अगर किसी को बीपी, दिल की बीमारी, सांस की दिक्कत या चक्कर आने की हिस्ट्री है, तो उन्हें ऐसे किसी भी अभ्यास से दूर रहना चाहिए. प्राणायाम करते वक्त अगर हल्का सा भी चक्कर आए, सीने में भारीपन लगे, आंखों के आगे अंधेरा छाए या सिर घूमे, तो तुरंत रुक जाएं और सामान्य सांस लें.

विद्युत के स्टंट से हमें असल में क्या सीखना चाहिए?

विद्युत के इस डेमो में 15 मिनट का आंकड़ा सिर्फ एक अचरज है; असली चीज है उनका मानसिक ठहराव और एकाग्रता.

मेडिटेशन और योग का फायदा उठाने के लिए आपको ऑक्सीजन से लड़ने की जरूरत नहीं है. शांत बैठकर धीमी और गहरी सांस लेना, दिमाग को स्थिर करना ही शरीर को तंदुरुस्त रखने के लिए काफी है. अगर सांस रोकने की उन्नत तकनीक सीखनी ही है, तो किसी योग्य गुरु के सानिध्य में सीखें. अकेले कमरे में स्टंटमैन बनने की कोशिश जानलेवा हो सकती है.

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