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This Article is From Oct 09, 2025

भारत में हर 10 में से एक व्यक्ति मानसिक रूप से बीमार, 90 फीसदी इलाज से दूर

World Mental Health Day: आज यह एक गंभीर सामाजिक और राष्ट्रीय चुनौती बन चुका है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NMHS) के अनुसार, भारत में हर दसवां व्यक्ति किसी न किसी मानसिक विकार से पीड़ित है.

भारत में हर 10 में से एक व्यक्ति मानसिक रूप से बीमार, 90 फीसदी इलाज से दूर
World Mental Health Day 2025: 2025 की वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट में भारत का स्थान 147 देशों में 118वां है.

World Mental Health Day 2024: मानसिक स्वास्थ्य का मतलब सिर्फ मानसिक बीमारी से बचाव नहीं है, बल्कि यह हमारे सोचने, महसूस करने और निर्णय लेने की क्षमता से जुड़ा है. जब हमारा मानसिक स्वास्थ्य अच्छा होता है, तो हम जीवन की चुनौतियों का सामना बेहतर तरीके से कर पाते हैं. भारत में मानसिक स्वास्थ्य एक ऐसा विषय है जिसे अक्सर नजरअंदाज किया जाता है, लेकिन आज यह एक गंभीर सामाजिक और राष्ट्रीय चुनौती बन चुका है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NMHS) के अनुसार, भारत में हर दसवां व्यक्ति किसी न किसी मानसिक विकार से पीड़ित है. 

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हर 10 में से एक व्यक्ति मानसिक समस्या से परेशान

राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NMHS) 2015-16 के अनुसार, भारत में 10.6 प्रतिशत वयस्क मानसिक विकारों से पीड़ित हैं, लेकिन इनमें से 70% से 92% को सही इलाज नहीं मिल पाता.

WHO के अनुसार, भारत में प्रति 100,000 जनसंख्या पर आत्महत्या दर 21.1 है, जो वैश्विक औसत से ज्यादा है.

2025 की वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट में भारत का स्थान 147 देशों में 118वां है, जो मानसिक संतुलन की कमी को दर्शाता है.

2024 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर एक लाख लोगों पर सिर्फ 1 मनोचिकित्सक उपलब्ध है, जबकि WHO मानक के अनुसार कम-से-कम 3 होने चाहिए.

मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी बड़ी समस्याएं:

छात्रों में तनाव और अवसाद: एक अध्ययन के अनुसार, 70% छात्र मध्यम से उच्च स्तर की चिंता से पीड़ित हैं और 60% में अवसाद के लक्षण पाए गए.

कामकाजी लोगों में बर्नआउट: 90% कर्मचारी कार्यस्थल पर तनाव और सूचना अधिभार से जूझ रहे हैं, जिससे मानसिक थकावट बढ़ रही है.

ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाओं की कमी: ग्रामीण भारत में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बेहद सीमित है, जिससे इलाज का अंतराल और बढ़ जाता है.

सामाजिक कलंक: मानसिक बीमारी को लेकर पागल या कमजोर जैसे शब्दों का इस्तेमाल लोगों को मदद लेने से रोकता है.

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समाधान क्या है?

मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा: स्कूलों और कॉलेजों में मानसिक स्वास्थ्य को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना चाहिए.
योग और मेडिटेशन: मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक.
काउंसलिंग और थेरेपी: प्रोफेशनल मदद लेने से मानसिक समस्याओं का समाधान संभव है.
सामाजिक सपोर्ट: परिवार और दोस्तों का सहयोग मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करता है.

भारत में मेंटल हेल्थ एक मौन संकट है, जो आंकड़ों में तो दिखता है लेकिन सामाजिक बातचीत में नहीं. WHO और NMHS जैसे स्रोतों ने इस संकट की गंभीरता को उजागर किया है. अब समय आ गया है कि हम मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें, इसके बारे में खुलकर बात करें.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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